ग्रेटा की गर्जना, ‘आपने हमारा बचपन छीना, हम कभी क्षमा नहीं करेंगे, आपने कैसे किया यह दुस्साहस ?’

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* कौन है 16 वर्ष की लड़की, जिसने दुनिया को झकझोरा ?

* क्या और किसके लिए है ग्रेटा थनबर्ग की वैश्विक लड़ाई ?

रिपोर्ट : तारिणी मोदी/तुहिना चौबे

अहमदाबाद 24 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। 16 वर्ष की आयु में एक साधारण लड़की क्या करती है ? आप कहेंगे कि स्कूल में पढ़ाई-लिखाई या सहेलियों के साथ खेल-कूद या घूमना-फिरना या फिर ज्यादा से ज्यादा किसी प्रतियोगिता में भाग ले कर मेडल आदि जीत कर सबको खुश करने जैसे काम करेगी या फिर किशोरावस्था के लड़कपन में अपने किसी हमउम्र के साथी के साथ प्रेम-प्रसंग में पड़ कर अपना समय उसके साथ मौज-मस्ती में बिताएगी।

दुनिया में 16 वर्ष की आयु की अधिकांश साधारण लड़कियाँ यही करती हैं, परंतु पिछले कुछ समय से इसी आयु यानी 16 वर्ष की एक लड़की ने ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) पूरी दुनिया में तहलका मचा रखा है और आज जब दुनिया के सबसे बड़े मंच संयुक्त राष्ट्र में बोलने की बारी आई, तो वह ऐसा गरजी कि दुनिया भर के बड़े-बड़े नेता स्बब्ध रह गए। ग्रेटा मुख से अंगारे बरस रहे थे। ये अंगारे वह किसी को झुलसाने के लिए नहीं, अपितु प्यासी-तपती धरती को ठंडा करने के लिए बरसा रही थी। इस नन्हीं लड़की ने यह सिद्ध कर दिखाया कि अगर आप के अंदर हौसला है। जोश है। आपके इरादे नेक और नीयत साफ है, तो आप दुनिया को हिला सकते हैं।

ग्रेटा थनबर्ग स्वीडन की निवासी है, जिसने आज संयुक्त राष्ट्र में दहाड़ लगाई और विश्व भर के सक्रिय नेताओं को ललकारा। पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) ने संयुक्त राष्ट्र के उच्चस्तरीय जलवायु सम्मेलन के दौरान अपने भाषण से संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित दुनिया के बड़े नेताओं को झकझोर कर रख दिया। जलवायु परिवर्तन (CLIMATE CHANGE) और वैश्विक तपन (GLOBAL WARMING) से उत्पन्न चुनौतियों का मुक़ाबला करने में दुनिया के देशों की अकर्मण्यता के खिलाफ युवा आंदोलन का चेहरा बन चुकी स्वीडिश किशोरी ने अपना संबोधन कुछ इस अंदाज़ में शुरू किया, ‘हमारा यह संदेश है कि हम आपको देख रहे हैं।’ इस पर सभा में ठहाके गूंज उठे, परंतु जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि ग्रेटा के संदेश का लहज़ा बहुत गंभीर और कटाक्षपूर्ण था।

और ग्रेटा गरजते हुए ललकारने लगी

ग्रेटा थनबर्ग ने आगे कहा, ‘यह पूरी तरह से ग़लत है। मुझे यहाँ नहीं होना चाहिए था। मुझे महासागर पार स्कूल में होना चाहिए था।’ इसके बाद तो ग्रेटा आक्रामक होने लगी और सभा में सन्नाटा छा गया। ग्रेटा ने जो कहा, उसने सभी नेताओं को स्बद्ध कर दिया। ग्रेटा ने कहा, ‘आपने हमारे सपने, हमारा बचपन अपने खोखले शब्दों से छीना। आपकी हिम्‍मत कैसे हुई ? यद्यपि, मैं अभी भी भाग्यशाली हूँ, परंतु लोग झेल रहे हैं, मर रहे हैं, पूरा पारितंत्र (Ecosystem ) नष्ट हो रहा है।’ अपने भाषण के दौरान ग्रेटा थनबर्ग भावुक भी हो गईं। उन्होंने आगे कहा, ‘आपने हमें असफल कर दिया। युवा समझते हैं कि आपने हमें छला है। हम युवाओं की आँखें आप लोगों पर हैं और यदि आपने हमें फिर असफल किया, तो हम आपको कभी क्षमा नहीं करेंगे।’ ग्रेटा संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में उन सभी युवाओं का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, जो पर्यावरण को सुरक्षित देखना चाहते हैं। एक उदीयमान युवा पीढ़ी होने के नाते ग्रेटा थनबर्ग ने अपने भाषण में सभी युवाओं की ओर से दुनिया को चेतावनी देते हुए कहा, ‘हम सामूहिक विलुप्ति के कगार पर हैं और आप पैसों और आर्थिक विकास की काल्पनिक कथाओं के बारे में बातें कर रहे हैं। आपने साहस कैसे किया ? दुनिया जाग चुकी है और आपको यहाँ इसी समय रेखा खींचनी होगी। युवाओं को समझ में आ रहा है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर आपने हमें छला है।’

ग्रेटा ने घर और स्कूल से छेड़ा आंदोलन

3 जनवरी, 2003 को स्वीडन में राजधानी स्टॉकहोम में जन्मीं ग्रेटा थनबर्ग बचपन से ही पर्यावरण के प्रति जागृत व चिंतित रहती थीं। स्वीडन की एक ओपेरा सिंगर मैलेना अर्नमन (Malena Ernman) और स्वीडन के प्रसिद्ध अभिनेता स्वांते थनबर्ग (Svante Thunberg) की पुत्री ग्रेटा थनबर्ग की छोटी बहन बीटा थनबर्ग एक प्रसिद्ध पॉप सिंगर है, परंतु ग्रेटा ग्लैमर की दुनिया से हट कर जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग से उत्पन्न चुनौतियों पर मंथन करने लगीं। ग्रेटा ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ पहली लड़ाई अपने घर से ही शुरू की। उन्होंने अपने माता-पिता को अपनी जीवनशैली बदलने के लिए कहा। लगभग 2 सालों तक उन्होंने अपने घर के माहौल को बदलने का काम किया। सबसे पहले उनके माता-पिता ने मांस का सेवन करना बंद कर दिया, साथ ही जानवर के अंगों से बनी चीजों का भी त्याग कर दिया। उन्होंने विमान से यात्राएँ करना भी बंद कर दिया, क्योंकि इन चीजों से कार्बन का उत्सर्जन अधिक होता है, जो वातावरण प्रदूषित का कारण बनता है। इसके बाद ग्रेटा ने लोगों को समझाना शुरू किया कि हवाई यात्रा न करें और रेल का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करें, जिसके बाद जून 2019 में स्वीडन के रेलवे विभाग ने बताया कि घरेलू यात्राओं के लिए रेल की यात्रा करने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। ग्रेटा ने खुद भी दो अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में जाने के लिए विमान की यात्रा से मना कर दिया था। फिर एक दिन यानी 20 अगस्त, 2018 को ग्रेटा ने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों के विरुद्ध आंदोलन छेड़ दिया। इसका आरंभ ग्रेटा ने स्वीडन के अपने स्कूल मरजोरी स्टोनमैन डगलस हाई स्कूल (Marjory Stoneman Douglas High School) से किया। वह हर शुक्रवार को हड़ताल करती थीं और धीरे-धीरे ग्रेटा का आंदोलन विश्वव्यापी जनांदोलन बन गया। ग्रेटा ने अपने इस आंदोलन का नाम फ्राइडेज फॉर फ्यूचर (Fridays for Future) रखा। जलवायु की जंग लड़ रही ग्रेटा थनबर्ग डोनाल्ड ट्रंप जैसे दुनिया के बड़े नेताओं को भी पर्यावरण पर कई बार लताड़ गला चुकी हैं।

दावोस में दिखाया दम, नेताओं का निकला दम

22 जनवरी, 2019 को दावोस विश्व आर्थिक सम्मेलन (Davos World Economic Conference) में ग्रेटा ने बिज़नेस जगत की दुनिया भर की हस्तियों की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था, ‘कुछ लोग, कुछ कंपनियों को मालूम है कि कल्पना से परे पैसा कमाना जारी रखने के लिए वे वास्तव में किन मूल्यहीन मूल्यों का बलिदान दे रहे हैं, और मेरा मानना है कि आपमें से कई उस तरह के लोगों के समूह का हिस्सा हैं। जब वह अमेरिका में थीं, तो एक रिपोर्टर ने उनसे डोनाल्ड ट्रंप से मिलने के बारे में पूछा था। इस पर ग्रेटा ने कहा, ‘जब वह बिल्कुल मेरी बातों को सुनने नहीं जा रहे हैं, तो ऐसे में मैं उनसे बात करके अपना समय क्यों बर्बाद करूं। ‘यूएस सीनेट की एक जलवायु बैठक में भी ग्रेटा ने तंज कसते हुए कहा था, कृपया अपनी प्रशंसा को बचाकर रखिए। हमें इसकी जरूरत नहीं है। वास्तव में बिना कुछ किए, सिर्फ यह कहने के लिए हमें यहाँ आमंत्रित मत कीजिए कि हम कितने प्रेरक हैं। ग्रेटा पर्यावरण के लिए काम कर रहे युवाओं के लिए एक उदाहरण हैं।

आंदोलन बना ‘ग्रेटा थनबर्ग इफेक्ट’

साल 2018 में स्वीडन में 262 वर्षों के बाद सबसे भीषण गर्मी पड़ी थी। एक तरफ लोगों को गर्म लू झुलसा रही थी, तो दूसरी तरफ जंगल में लगी आग से पर्यावरण में प्रदूषण फैला रहा था। उसी दौरान 9 सितंबर, 2018 को स्वीडन में आम चुनाव हुए। ग्रेटा ने चुनाव समाप्त होने तक स्कूल न जाने का फैसला किया। ग्रेटा ने 20 अगस्त, 2018 को जलवायु पर्यावरण आन्दोलन की शुरूआत कर दी। उन्होंने सरकार के सामने मांग रखी कि पैरिस अपने समझौते के मुताबिक कार्बन उत्सर्जन में कटौती करे। पेरिस समझौते में 195 देशों ने कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने के करार पर हस्ताक्षर किए थे। पेरिस समझौते में 55 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन करने वाले देशों को इसे मानना था। भारत समेत 61 देशों ने इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है, जो लगभग 48 फ़ीसदी कार्बन उत्सर्जन करते हैं। पेरिस समझौता (Paris Agreement) या पेरिस जलवायु समझौता ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन शमन, अनुकूलन और वित्त पर समझौता किया गया है। यह 2020 से शुरू किया जाएगा। पेरिस में 12 दिसम्बर, 2015 को हुए 21वें सम्मेलन में 196 देशों ने आम सहमति से इस समझौते को अपनाया था। 195 सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किए और 148 ने इसकी पुष्टि भी की है।

स्वीडन की सड़कों पर उतरीं ग्रेटा

ग्रेटा ने अपनी बातें मनवाने के लिए स्वीडन की संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन भी करना शुरू कर दिया। स्कूली समय में उन्होंने रोजाना तीन हफ्ते तक स्वीडन की संसद के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने इस दौरान लोगों को पर्चियाँ भी बाँटीं, जिस पर लिखा होता था, ‘मैं ऐसा इसलिए कर रही हूँ क्योंकि आप वयस्क लोग मेरे भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।’ ग्रेटा ने जब सोशल मीडिया पर आंदोलन की तसवीरें पोस्ट कीं, तो तुरंत ही दुनिया भर से उनको समर्थन मिलने लगा। देखते-देखते ही वह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ने वाली योद्धा बन गईं। दुनिया भर के स्कूली छात्र ग्रेटा के इस आंदोलन देखते ही देखते इतनी प्रसिद्धि मिली कि जल्द ही इस आन्दोलन को ‘ग्रेटा थनबर्ग इफेक्ट’ कहा जाने लगा। फरवरी 2019 में 224 शिक्षाविदों ने ग्रेटा के समर्थन में एक ओपन लेटर पर हस्ताक्षर किया। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरिस ने भी उनके स्कूली आंदोलन को सराहा। इसके बाद से ग्रेटा थनबर्ग की ख्याति बढ़ने लगी और उसे जलवायु परिवर्तन के विषय पर बोलने के लिए आमंत्रित किया जाने लगा।

ग्रेटा थनबर्ग को न्यूयॉर्क में मिला सम्मान

पढ़ाई की उम्र में पर्यावरण के लिए मुहिम चलाने वाली 16 साल की ग्रेटा थनबर्ग को न्यूयॉर्क में बड़ा सम्मान मिला। एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने अपना सबसे बड़ा अवॉर्ड ‘एंबैस्डर ऑफ कान्शन्स’ ( Ambassador of Conscience Award) ग्रेटा को दिया। स्वीडन की रहने वाली ग्रेटा पिछले महीने नाव से अटलांटिक सागर पार करके न्यूयॉर्क पहुँची थीं। ग्रेटा ने कार्बन उत्सर्जन को बचाने के लिए विमान से जाने से मना कर दिया था। जब वह दो हफ्ते की कठिन यात्रा करके न्यूयॉर्क पहुँची, तो हजारों लोग उनके स्वागत में खड़े थे। ग्रेटा ने पुरस्कार लेते समय कहा, यह पुरस्कार सिर्फ मेरा नहीं है, अपितु उन लाखों युवाओं का है, जिन्होंने पिछले साल से लगातार हर शुक्रवार को स्कूल में हड़ताल की है। नवंबर 2018 में, उसके स्कूल की जलवायु हड़ताल में लगभग तीन महीने, थनबर्ग को बाल जलवायु पुरस्कार के लिए नामित किया गया था, जिसे स्वीडिश बिजली कंपनी टेलज एनर्जी (Taylor Energy) ने सम्मानित किया था। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर थनबर्ग को 2019 में स्वीडन में वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण महिला घोषित किया गया था। 13 मार्च 2019 को, स्वीडिश संसद के दो और नॉर्वेजियन संसद के तीन सदस्यों ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए थनबर्ग को उम्मीदवार के रूप में नामित किया।

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