जान लेने वाले कैंसर ने दिखाई जान बचाने की राह और शुरू हुआ मील ऑफ हैप्पीनेस का सफर

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 27, सितंबर 2019 (युवाPRESS)। यूँ तो जिन्दगी सभी जीते हैं, परंतु जीना उसी का नाम है जो अपने जीवन के सही उद्देश्य को जान ले। मनुष्य को दुनिया का सबसे विकसित और समझदार प्राणी इसलिये कहा जाता है, क्योंकि मनुष्य ही अपने विवेक से वह सब कर सकता है, जो इस दुनिया में अस्तित्व रखने वाले अन्य प्राणी नहीं कर सकते। 84 लाख योनियों के बाद हमें मानव जन्म इसलिये मिलता है, ताकि हम संसार में आने के बाद कुछ ऐसा करें, जिसके लिये संपूर्ण मानव जाति हमें स्मरण करे। आपके कर्तव्य निर्वहन के मार्ग में पग-पग पर कई रुकावटें आएँगी। एक पल को ऐसा भी लगेगा कि अब आप कुछ नहीं कर सकते। आप किसी संकट या बीमारी के शिकार भी हो सकते हैं, परंतु इसके बावजूद आपको जीवन के सफर में रुकना नहीं है, बस निरंतर आगे बढ़ते जाना है। ऐसी ही प्रेरणा दे रही हैं दिल्ली की एक कैंसर पीडित महिला आँचल। जिन्होंने न सिर्फ मनुष्य होने का कर्तव्य निभाया है, अपितु अपने मार्ग में आने वाली हर बाधा को अपने हौसले से हरा दिया। कभी पैसों की कमी ने उनका मार्ग रोका तो कभी घर की समस्याओं ने आगे नहीं बढ़ने दिया। इतना ही नहीं, स्वयं की बहन की हत्या हो जाने पर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ीं। उन्होंने अपने कर्तव्यों से कभी मुँह नहीं मोड़ा। बहन के जाने के बाद वह अपनी माँ की अंतिम सहारा बनीं। तब भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी श्रद्धा से निभाई। वह अपना काम लगन से और बिना किसी शिकायत के करती थी कि, एक दिन उन पर तब पहाड़ टूट पड़ा जब उन्हें अपने स्तन कैंसर के बारे में पता चला। कुछ समय के लिये वह थोड़ी निराश हुई, परंतु अगले ही पल एक नई उम्मीद के साथ फिर से उठ खड़ी हुईं और कैंसर को मात देने की ठान ली।

सैकड़ों ग़रीब बच्चों का बनीं सहारा

आँचल अब स्तन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद सैकड़ों ग़रीब बच्चों का सहारा बन चुकी हैं। दिल्ली की रहने वाली आँचल शर्मा का ममता का आँचल इतना फैल चुका है कि उसके आगे उनकी कैंसर की बीमारी भी छोटी हो गई है। दरअसल, 2017 में आँचल शर्मा को पता चला था कि उन्हें तीसरे स्टेज का स्तन कैंसर है, परंतु इसके बावजूद आँचल ने हार नहीं मानी और अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरू किया। आँचल प्रतिदिन राजधानी के रंगपुरी इलाके में झुग्गियों में रहने वाले लगभग 100 से 200 बच्चों को मुफ्त में खाना खिलाती हैं। यह सिलसिला उस दिन शुरू हुआ, जब ट्रैफिक सिग्नल पर एक छोटे बच्चे ने आँचल से खाना माँगा। आँचल ने पैसे देने से इनकार कर दिया और उसे दोपहर के भोजन के लिये पास के ढाबे पर ले गईं। यहाँ उन्होंने कई बच्चों को खाना खिलाया। कहीं न कहीं समाज की इस कड़वी सच्चाई ने आँचल को अंदर तक झकझोर कर रख दिया। उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि वह हर दिन इन बच्चों को खाना खिलाने की कोशिश करेंगी। इसके बाद वह प्रतिदिन अपने घर से खाना बना कर रंगपुरी की मलीन बस्तियों में बच्चों के लिये ले जाने लगीं। उस दिन से शुरू हुआ आँचल का यह नया सफर, जिसका नाम आँचल ने “मील ऑफ हैप्पीनेस रखा है।”

कठिनाइयों से किया डँट कर सामना

आँचल के जीवन का सफर बेहद कठिनाइयों भरा रहा है। आँचल का जन्म दिल्ली में एक निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। आँचल के 1 बहन और एक भाई था। उनके पिता एक ऑटो चालक थे, जिन्होंने अपनी सारी बचत-पूँजी कहीं निवेश कर दी और सारा धन गँवा बैठे। सब कुछ चले जाने के कारण आँचल के पिता ने शराब पीना शुरू कर दिया था और घर पर आँचल की माँ के साथ दुर्व्यवहार भी करने लगे थे। घरेलु-हिंसा और तीनों बच्चों की दुर्दशा से परेशान होकर आँचल की माँ ने एक कारखाने में नौकरी शुरू कर दी थी। किसी तरह घर का गुज़ारा होने लगा, परंतु भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। कारखाने में मजदूरों की छँटनी हुई और आँचल की माँ की नौकरी छूट गई। कुछ दिनों तक जैसे-तैसे घर चला, परंतु अब ऐसी परिस्थिति आ गई कि आँचल के पूरे परिवार को भूखा रहना पड़ रहा था। घर की ऐसी परिस्थिति देख आँचल और उसके भाई, जो उस समय 9वीं कक्षा में पढ़ रहे थे, ने पढ़ाई छोड़ कर नौकरी ढूँढना शुरू कर दिया। भाई ने मोटर गैराज में एक मैकेनिक के रूप में काम शुरू किया और आँचल ने एक ट्रेडिंग फर्म में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी की, जहाँ हर महीने उन्हें 4,000 रुपये वेतन मिलता था।

बहन के हत्यारे को दिलाया दण्ड

जल्दी ही मेहनत और काबिलियत के दम पर आँचल ने रियल एस्टेट में नौकरी पा ली, परंतु दुर्भाग्य ने उनका यहाँ भी पीछा नहीं छोड़ा। रियल एस्टेट एजेंट के रूप में काम के दौरान उनके साथ 2.5 लाख रुपये का धोखा हुआ, उन्हें कमीशन के पैसे नहीं मिले, उनके घर में पैसों का संकट पैदा हुआ और इससे तनाव भी बढ़ गया, परंतु एक बार फिर आँचल ने हिम्मत नहीं हारी और एक फर्म में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की। पुराने रियल एस्टेट एजेंट के काम का अनुभव आँचल के काम आया और उन्हें इसी फर्म में ब्रोकर की नौकरी मिल गई। आँचल ने मेहनत और लगन से काम करके अपने परिवार के लिये एक फ्लैट खरीदा। इसी दौरान उनकी छोटी बहन किसी से प्रेम करने लगी थी। हालाँकि आँचल ने दोनों का साथ दिया और उनकी शादी करवा दी। शादी के 6 महीने बाद ही आँचल की बहन की हत्या हो गई, जिसने आँचल को बिखेर दिया। एक बार फिर आँचल के दुर्भाग्य ने उनका सुख-चैन छीन लिया था। आँचल के लिये इससे भी भयावह बात यह थी कि उनकी बहन की हत्या उसके पति ने ही की थी। आँचल ने अपने आँसू तब तक नहीं सूखने दिये जब तक बहन के हत्यारे को सजा नहीं हो गई। आँचल ने बहन को न्याय दिलाने के लिये एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दिलाई।

कैंसर को दी मात, खोला “Meal of Happiness”

छोटी बेटी की हत्या से परेशान आँचल के माता-पिता ने दबाव डाल कर आँचल की शादी करवा दी, परंतु आँचल की शादी ज्यादा दिन नहीं टिकी, क्योंकि उनका पति पैसों के लिये उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देता था। 3 महीने बाद ही उन्होंने पति से तलाक ले लिया और अपने करियर पर फिर से ध्यान केंद्रित किया। आँचल ने स्वयं की रियल एस्टेट फर्म शुरू की। अब आँचल अपने माता-पिता की देख-भाल और अपने काम में पूरी तरह से व्यस्त हो गई थी, परंतु दुर्भाग्य ने फिर उनका दरवाजा खटखटाया और उनका फ्लैट महा नगरपालिका के आदेश से ध्वस्त कर दिया गया। इसी दौरान आँचल को अपनी माँ की मानसिक बीमारी का भी पता चला। पिता पहले से ही क्षय रोग से पीड़ित थे। आँचल अपने माता पिता की सेवा में खुद का ध्यान रखना भूल गईं। उन्हें अपने स्तन में एक गाँठ दिखी थी, परंतु उसे मामूली समझ कर आँचल ने उसे अनदेखा कर दिया था। 2017 में उन्हें तीसरे चरण के स्तन कैंसर का पता चला। उन्होंने दर्द सहा और हर बार एक नये जोश के साथ फिर उठ खड़ी हुईं। वह अपनी ज़िंदगी को उत्साह से जीती गईं। इसी दौरान आँचल ने शुरू किया झुग्गी में रहने वाले गरीब़ बच्चों को खाना खिलाने का नया अध्याय। कुछ ही महीनों में इस पहल ने बच्चों में इतनी लोकप्रियता प्राप्त कर ली कि उन्होंने इस प्रयास को प्रचारित करने के लिये अपना एनजीओ “Meal of Happiness” पंजीकृत करवा लिया। वर्तमान में, आँचल प्रतिदिन 5,000 से अधिक बच्चों को खाना खिलाने के अपने सपने को पूरा करने के लिये क्राउड फंडिंग कर रही हैं। इसके साथ ही फूड पैकेजिंग के लिये प्लास्टिक फ्री पैकेट अपना कर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देने का प्रयास कर रही हैं। मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके असाधारण प्रयासों के लिये उन्हें ‘निडर हमेशा’ पुरस्कार से भी उन्हें सम्मानित किया है। आँचल के कैंसर को अभी भी पूरी तरह से ठीक होने के लिये चार साल लगेंगे, परंतु उनकी निजी समस्याएँ अब उनके लिये सबसे कम मायने रखती हैं।

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