मिलिए एक ऐसे IAS अधिकारी से, जो भूल होने पर स्वयं को भी क्षमा नहीं करता

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 10 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर अक्सर यह देखा जाता है कि वे किसी अच्छी बात, अच्छी योजना या अच्छे काम का आरंभ करते हैं, तो उसे एक अभियान का ही रूप दे देते हैं। फिर चाहे वह स्वच्छता अभियान हो, पर्यावरण सुरक्षा हो या विकास आदि हो। वे इनसे जुड़े हर शब्द को मंत्र बना लेते हैं। कुछ ऐसी ही रट इन दिनों मोदी ने आरंभ की है, जिसका नाम है सिंगल यू़ज़ प्लास्टिक का उन्मूलन।

प्रजा, प्रकृति और विश्व के कल्याण की बात हो, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यह नहीं देखते कि वे किस मंच पर, किन लोगों के सामने खड़े हैं ? वे नरेन्द्र मोदी ही थे, जिन्होंने पहली बार ऐतिहासिक लाल किले से खुले में शौच, शौचालय और खुले में शौच से मुक्त भारत जैसे शब्दों का उल्लेख किया था। अभी हाल ही में यानी गत 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मोदी ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रहार शुरू किया और इसका उल्लेख उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा (UNGA) में भी कर दिया। मोदी ने ठान लिया है कि भारत को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से मुक्ति दिलाना है, जो पर्यावरण के लिए घातक है।

यद्यपि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने व शासन-प्रशासन के स्तर से सिंगल-यूज़ प्लास्टिक उन्मूलन की दिशा में कार्य कर रहे हैं। सर्वप्रथम प्रधानमंत्री की पहल पर सबसे पहला अमल किया रेलवे मंत्रालय, जिसने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर पाबंदी लगाने का फैसला किया है। इस मुहिम के तहत सभी सरकारी कार्यालों में प्लास्टिक पर प्रतिबंद्ध लगा दिया गया है। अन्य सरकारी मंत्रालय व अधीनस्थ उपक्रम भी मोदी के ‘SAY NO TO SINGLE USE PLASTIC’ अभियान में सहयोग कर रहे हैं, परंतु प्रधानमंत्री के इस अभियान को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के एक अधिकारी ने भी व्यक्तिगत रूप से अंगीकार किया है। इस आईएएस अधिकारी ने उस समय सबको आश्चर्य में डाल दिया, जब उन्होंने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को लेकर स्वयं के द्वारा की गई भूल पर स्वयं को भी क्षमा नहीं किया और दंड राशि का भुगतान किया। सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुहिम का समर्थन कर रहे महाराष्ट्र के इस आईएएस अधिकारी के कार्यालय में जब उनके कार्मचारियों ने प्लास्टिक का प्रयोग किया, तो इस अधिकारी ने अपने कर्मचारियों समेत स्वयं पर भी 5 हजार रुपए का अर्थदण्ड लगा दिया। स्वयं द्वारा स्वयं को दंडित किए जाने वाला यह अनोखा अधिकारी अपने इस कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है। आपको इस आईएएस अधिकारी के विषय में बताने से पहले आइए बताते हैं कि आखिर ये सिंगल-यूज़ प्लास्टिक होता क्या है ?

क्या है सिंगल-यूज़ प्लास्टिक ?

हम रोजमर्रा के कामों में प्‍लास्टिक से बने कई प्रकार के उत्पादों प्रयोग करते हैं, जिनमें से कुछ उत्पाद ऐसे हैं, जो एक बार यूज़ करके फेंक दिए जाते हैं। इन प्लास्टिक उत्पादों को सिंगल-यूज़ प्‍लास्टिक कहा जाता है। इसे डिस्पोजेबल प्‍लास्टिक के नाम से भी जाना जाता है। प्लास्टिक बैग, प्लास्टिक की बोतलें, स्ट्रॉ, कप, प्लेट्स, फूड पैकजिंग में प्रयोग होने वाले प्लास्टिक, गिफ्ट रैपर्स और चाय-कॉफी के डिस्पोजेबल कप्स सिंगल-यूज़ प्‍लास्टिक प्रोडक्‍ट के ही उदाहरण हैं। भारत को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए सड़क और परिवहन मंत्रालय ने गत 11 सितंबर से 2 अक्टूबर तक देश भर के राजमार्गों के आसपास जमा प्लास्टिक को एकत्र करने का अभियान भी चलाया था। इसके साथ ही सभी मंत्रालयों में भी सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बहुत जल्द सरकार सिंगल-यूज़ प्‍लास्टिक उत्पादों की सूची भी जारी कर सकती है, जिसके अंतर्गत इन उत्पादों के प्रयोग पर प्रतिबंध और दंड का प्रावधान रखा जाएगा।

IAS आस्तिक क्यों हैं चर्चा में ?

ये तो हुई सिंगल-यूज़ प्लास्टिक की बात अब आते हैं। अब बताते हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान को आगे बढ़ाने वाले और स्वयं को दंडित करने के कारण चर्चा में आए महाराष्ट्र के बीड जिले के कलेक्टर आस्तिक कुमार पांडे के बारे में। पांडे ने प्लास्टिक कप के प्रयोग पर अपने ही कर्मचारियों समेत स्वयं पर जुर्माना लगाया है। दरअसल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 की तैयारियों को लेकर तीन दिन पहले यानी गत 7 अक्टूबर, 2019 को बीडा जिला कलेक्टर कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) का आयोजन किया गया था, जिसमें सभी पत्रकारों को प्लास्टिक के कप में चाय दी गई। यह देख एक पत्रकार ने कलेक्टर के समक्ष निर्भीकता के साथ कह दिया कि डिसपोज़ेबल प्लास्टिक पर बैन होने के बावजूद प्लास्टिक के कप में चाय देना कानून का उल्लंघन है। कलेक्टर आस्तिक कुमार पांडे ने इस बात को तत्काल संज्ञान में लेते हुए न केवल प्लास्टिक कप हटवाए, अपितु अपने कर्मचारी और स्वयं पर भी 5 हजार रुपए का अर्थदण्ड लगा दिया। इसके बाद से ही सोशल मीडिया के माध्यम से ये बात महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में फैल गई। सोशल मीडिया पर कलेक्टर आस्तिक कुमार पांडे की बहुत प्रशंसा की जा रही है। हालाँकि कलेक्टर ने स्वीकार किया है कि अधिकारी औरंगाबाद में प्लास्टिक बैन को पूरी तरह लागू करने में नाकाम रहे। इसलिए अर्थदण्ड देना उचित था। कलेक्टर कार्यालय में प्लास्टिक बैन के उल्लंघन से संबंधित यह दूसरी घटना है। इससे पहले चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र भरने आया एक उम्मीदवार पॉलीथिन में सिक्के भर कर लाया था, जिसके चलते उस उम्मीदवार पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। महाराष्ट्र में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध है। इतना ही नहीं, लोगों में जागरूकता लाने के लिए चुनाव आयोग (EC) ने भी इसे बैन किया हुआ है। विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कोई भी उम्मीदवार सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का प्रयोग नहीं कर सकता।

कौन हैं व कैसे IAS अधिकारी बने आस्तिक ?

आस्तिक कुमार पांडे मूलत: गोंडा-उत्तर प्रदेश के हैं। उनका लड़ैता नाम आशु है। आस्तिक कुमार पांडे 2011 की बैच के महाराष्ट्र कैडर के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने 2010 में संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service) यानी UPSC को अखिल भारतीय रैंक 74 के साथ क्रैक किया था। यह उनकी यूपीएससी में तीसरा प्रयास था। इससे पहले वह अपने दो प्रयासों में सफल नहीं हो पाए थे। असपलता के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरी बार अपने लक्षय तक पहुँच कर दिखाया। आस्तिक पांडेय का विवाह महर्षि कैडर के आईपीएस अधिकारी मोक्षदा पाटिल से हुई है। वर्तमान में वह महाराष्ट्र के सर्वश्रेष्ठ आईएएस अधिकारियों में से एक हैं। वह अपनी टीम को सर्वोत्तम संभव परिणाम देने के लिए प्रेरित करने के लिए नए-नए तरीकों का प्रयोग करते रहे हैं। प्रशासनिक निर्णय लेने, सरकारी कार्यक्रमों और नीतियों पर अमल करने में वह हमेशा आगे रहते हैं, उन्हें किसान कलेक्टर भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने महाराष्ट्र के अकोला में जिला मजिस्ट्रेट (Distric Magistrate ) यानी DM के रूप में किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य लाभ सुनिश्चित करने का अद्भुत काम किया था। इतना ही नहीं, अस्तिक का एक वीडियो भी बहुत वायरल हआ था, जिसमें वे लोक निर्माण विभाग यानी PWD कार्यालय की दीवार को धोते हुए दिखाई दे रहे थे, जो पान और गुटखा खाने वालों द्वारा मारी गई पिचकारी से सनी हुई थी। आस्तिक ने महाराष्ट्र के अकोला जिले में मोर्ना नदी को साफ करने के लिए एक नागरिक संचालित जन आंदोलन का सफलतापूर्वक संचालन भी किया। इस कार्य के लिए उन्हें एक्सप्रेस एक्सीलेंस की ओर से दिल्ली में आयोजित गवर्नेंस अवार्ड्स के तहत सामुदायिक भागीदारी श्रेणी में ‘बेस्ट जिला कलेक्टर मजिस्ट्रेट अवॉर्ड’ मिला था। यह अवॉर्ड उन्हें केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के हाथों प्रदान किया गया था।

हर अधिकारी बने आस्तिक, तो पूरा हो लक्ष्य

प्रति वर्ष 300 मिलियन टन प्‍लास्टिक प्रोड्यूस होता है। इसमें से 150 मिलियन टन प्‍लास्टिक सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के सामान बनाने में प्रयोग किया जाता है यानी जिसे हम एक बार प्रयोग कर फेंक देते हैं। जबकि मात्र 10 से 13 फीसदी प्‍लास्टिक ही री-साइकिल हो कर पुनः प्रयोग में लाया जाता है। बाकी 90 फीसदी प्‍लास्टिक मिट्टी और पानी दोनों को प्रदूषित करता है। जो जीव-जन्तु और मानव शारीर को नुकसान पहुँच रहे हैं। आज प्‍लास्टिक कई बीमारियों की जड़ बन चुका है, जिसे दूर करने के लिए विश्वभर में कठोर रणनीति बनाई जा रही है। यूरोपियन यूनियन ने वर्ष-2021 तक सिंगल-यूज़ प्लास्टिक सामग्री का उपयोग पूरी तरह बंद करने का लक्ष्य तय किया है। वहीं चीन के कॉमर्शियल हब शंघाई ने भी सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर 2025 तक पूर्ण प्रतिबंध का लक्ष्य रखा है, परंतु वास्तविकता यह है कि इसके लिए केवल सरकारों के भरोसे बैठे रहने से श्रेष्ठ परिणाम नहीं मिलेंगे। यदि हर अधिकारी आस्तिक कुमार पांडे की तरह प्लास्टिक पर प्रतिबंध को लेकर प्रतिबद्ध और अनुशासित बने, तभी इस लक्ष्य को प्राप्त करना संभव हो पाएगा।

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