जीवन के प्रति जागृति : तेजी से ‘मरते’ विश्व में भारत बन रहा ‘दीर्घायु’

*योग और जैविक खाद्य पदार्थ बन रहे जीवनदान

*‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का भी दिख रहा असर

*लड़कियों की मृत्यु दर में व्यापक गिरावट

विश्लेषण : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 2 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार मनुष्य की औसत आयु लगभग 120 वर्ष बताई गई है, परंतु योगबल, संयमित आहार और विहार के बल पर प्राचीन भारतीय मानव की सामान्य आयु 300 से 400 वर्ष हुआ करती थी। हिमालय में तो आज भी ऐसे कई ऋषि-मुनि हैं, जिनकी आयु 600 वर्ष से अधिक होने का दावा किया जाता है। प्राचीन काल के अनुसार मनुष्य की सामान्य उम्र 500 वर्ष तक रही होगी, परंतु वर्तमान में यह घटकर 50-55 पर पहुँच गई है। इसका मुख्य कारण बदला पर्यावरण और खान-पान ही है, जिससे उम्र में लगातार गिरावट आ रही है। आज 100 वर्ष की आयु जीने वालों में गिने-चुने लोग ही शामिल हैं। वर्तमान में तो लोग 50 से 60 के बीच ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं, उसमें भी कई लोग तो समय से पहले ही बुढ़े दिखने लगते हैं। वर्तमान में मनुष्य प्रदूषण भरे वातावरण में नकली और अपौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन कर कई तरह के रोग से ग्रस्त हो रहा है, हालाँकि बीते कुछ समय से लोग अपने स्वस्थय को लेकर काफी सजय हो गए हैं, जिसका एक उदाहरण प्रस्तुत किया है नैशनल हेल्थ सर्वे की एक रिपोर्ट ने।

विश्व की 50 करोड़ जनसंख्या का जीवन 7 वर्ष कम

दरअसल ब्रिटेन (UK) की नेशनल हेल्थ प्रोफाइल (National Health Profile ) यानी NHP ने भारतीयों के जीवन चक्र पर एक सर्वे किया है, जिसमें भारतीयों का जीवन बीते 5 दशकों में 19 वर्ष यानी 68.7 वर्ष बढ़ गई है। प्रसन्नता की बात तो यह है कि भारतीय लोगों के जीवन-आयु में वृद्धि एक ऐसे समय में हुए है, जब विश्व की 50 करोड़ जनसंख्या का जीवन 7 वर्ष कम पाया गया है। इस वृद्धि का एक प्रमुख कारण लोगों का योग के प्रति सकारात्मक विचार भी है। आज भारतीय लोग योग के प्रति सजग और तत्पर दिखाई पड़ते हैं। ब्रिटेन में नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) और सामाजिक देखभाल प्रणाली अगले कुछ वर्षों से बुज़ुर्ग लोगों की देखभाल में भारी वृद्धि देख रही है। प्रमुख नए शोध के अनुसार उन लोगों में 25 प्रतिशत वृद्धि देखी गई अर्थात 2015 के बाद मृत्यु दर 25 प्रतिशत कम दर्ज की गई। 188 देशों मे मौत और उसके कारणों पर प्रकाशित जर्नल के अनुसार संक्रामक रोगों और हृदय रोगों के कारण होने वाली मौतों की दर कम हुई है। भारत की जनसंख्या और इन आँकड़ों को देखते हुए भारत शीघ्र ही दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा। 1990 की तुलना में भारत में बाल और वयस्क मृत्यु दर में काफी कमी आई है।

भारत विश्व के शीर्ष 25 देशों में शामिल

1991 से 2017 तक भारत में जन्म दर, मृत्यु दर और प्राकृतिक विकास दर में लगातार गिरावट आई है। 2017 में भारत ने प्रति 1,000 जनसंख्या पर 20.2 और प्रति 1,000 जनसंख्या पर 6.3 की मृत्यु दर दर्ज की है। देश के लिए कुल प्रजनन दर में (टीएफआर) 2.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य स्थिति के संकेतकों पर किए गए सर्वेक्षण में पाया गया है कि संचारी (संक्रामक) रोगों के कारण अधिक मौतें होती हैं, जो 2012 और 2013 में घटी हैं। 1950 के दशक से डेंगू का प्रकोप था, जिससे लोगों की मौत हो जाती थी, परंतु 2017-2018 में इसमें कमी पाई गई है। इस स्वास्थ्य सांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार पुरुषों की औसत आयु बढ़कर 64.2 वर्ष और महिलाओं की 68.5 वर्ष हो गई है। औसत आयु में बढ़ोतरी के लिहाज से भारत विश्व के शीर्ष 25 देशों में शामिल रहा।

बेटी बचाव बेटी पढ़ाव योजना भी बड़ा कारण

विश्व की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश भारत में लोग खान-पान और रहन सहन पर अधिक ध्यान रखने लगे हैं, जिसका परिणाम ये रहा कि लोगों की मृत्यु दर कम हो रही है। 1970-75 के दशक की एक रिपोर्ट के अनुसार उस दौर में जन्में किसी बच्चे के जीवन का आँकड़ा 49 वर्ष, 8 महीने और 12 दिन बताया गया था, वहीं 1980 में महिलाओं का जीवन पुरुषों की तुलना में कम था। केवल शहरों में महिलाएँ पुरुषों से ज्यादा जीवित रहती थीं। 1970-75 और 2012-16 के बीच महिलाओं की उम्र लगभग 44 प्रतिशत तक बढ़ी है, जबकि पुरुषों की 32 प्रतिशत तक, इसलिए 1970 के दशक में जन्मी लड़की उसी वर्ष में जन्में लड़कों से लगभग 6 महीने कम जीती थी, परंतु 2015 के सर्वे के अनुसार इस वर्तमान में जन्मी लड़कियों की आयु उसी वर्ष जन्मे लड़के से 2 वर्ष, 7 महीने और 6 दिन अधिक पाई गई है, वहीं 2012-16 के बीच पैदा हुए बच्चे अब 69 वर्ष तक जीने लगे हैं। इतना ही नहीं, 2017 में भारत ने शिशु मृत्यु दर को भी कम किया है। इसके पूर्व 1000 में 57 बच्चों की मौत हो जाती थी, जो अब 33 पर आ कर सिमट गई है। बेटी बचाव बेटी पढ़ाव भी इस आँकड़ों का एक प्रमुख कारण हो सकता है, क्योंकि पहले 10 प्रतिशत अधिक लड़कियाँ मरती थीं, परंतु 2017 में लड़कों के मुकाबले केवल 2.5 प्रतिशत लड़कियों की ही मृत्यु हुई है।

योग और खानपान में सुधार से मिलेगा लाभ

लगातार ग्लोबल वार्मिग, प्रदूषण तथा खानपान में आई गिरावट ने लोगों का जीवन कम करना शुरू कर दिया था। लोग उत्तम, सात्विक और स्वादिष्ट खाने के बजाए फास्ट फूड, जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक की ओर रुझान बढ़ गया है, इसके चलते व्यक्ति मोटापा, मधुमेह, कब्ज, शरीर में भारीपन आदि समस्याओं का शिकार हो गया है, परंतु 2015 के बाद से लोग ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों की ओर अग्रसर होते दिखाई दे रहे हैं। लोगों की आयु उनके शरीर की उपचय और अपचय की क्रियाओं पर निर्भर करती है यानी यदि आपके शरीर में अपचय की तुलना में उपचय की क्रियाएँ बढ़ रही हैं, तो इसका तात्पर्य ये है कि आप बुढ़ापे की ओर बढ़ रहे हैं। योगाभ्यास से अंतःस्रावी ग्रंथियों के क्रम और चक्रों को उचित व्यवस्था में स्थित किया जा सकता है। शरीर की चयापचयी क्रियाओं में संतुलन स्थापित कर शरीर के चक्र को सुधारकर शरीर को पूरी तरह दुरुस्त किया जा सकता है। यदि भारतीय लगातार योग और खानपान में सुधार करते रहे, तो वह दिन जल्द ही लौट आएगा जब लोग 300 वर्ष जीवन जिया करते थे।

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