जानिए कौन हैं सुमन चक्रवर्ती, जिन्होंने ‘वस्त्र विद्युत’ का आविष्कार ?

आलेख : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 5 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत की बढ़ती जनसंख्या के साथ ही उसकी सभी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना सरकार के लिए एक जटिल समस्या बनता रहा है, विशेषकर बिजली आपूर्ति। भारत का औसतन प्रति व्‍यक्ति ऊर्जा उपभोग 914 यूनिट वार्षिक है, जबकि स्वतंत्रता के 72 वर्षों के पश्चात भी भारत में लगभग 30 प्रतिशत बिजली आपूर्ति के साथ करोड़ लोग बिजली की कमी के साथ रह रहे हैं। यह बड़ी त्रासद स्थिति है। इसका परिवारों की उत्‍पादकता, विशेषकर महिलाओं और बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा पर बहुत नकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही बिजली की कमी आय बढ़ाने के अवसरों को भी सीमित कर देती है। भारत में आज 1,70,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। बिजली का लगभग 60 प्रतिशत से अधिक उत्पादन कोयला, भूरा कोयला (लिग्नाइट) से पैदा होता है, जबकि 22 प्रतिशत जल विद्युत परियोजनाओं से विद्युत उत्पादन किया जाता है। निरंतर बिजली की माँग और इसके लगातार बढ़ते रहने के बावजूद भारत में प्रति व्यक्ति सबसे कम बिजली की खपत 734 यूनिट होती है या यूँ कहें कि हर नागरिक न चाहते हुए भी इतनी ही बिजली की खपत कर पाता है, वहीं विश्व में औसतन बिजली की खपत 2,429 यूनिट है अर्थात भारत में बिजली की खपत नहीं के बराबर है। कनाडा में बिजली की खपत सबसे अधिक प्रतिव्यक्ति 18,347 यूनिट होती है। अमरीका में प्रत्येक व्यक्ति 13,647 यूनिट और चीन में हर नागरिक 2456 यूनिट बिजली की खपत करता है।

कपड़ों से बिजली पैदा करने का विश्वसनीय प्रयास

भारत में स्वतंत्रता के समय से ही बिजली की भयंकर कमी रही है, परंतु इसके उत्पादन में 8 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी होती आई है। नीति आयोग के अनुसार जहाँ पीक अवस्र में बिजली की कमी 10 प्रतिशत होती है वहीं समान्यत: 7 प्रतिशत बिजली की कमी होती है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार 37 राज्यों में से केवल नौ राज्यों आंध्र प्रदेश, गोवा, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, केरल, पंजाब, कर्नाटक और तमिलनाडु में ही पूरी तरह विद्युतीकरण किया जा सका है। भारत के कई गाँव, कस्बे आज भी अंधकार में डूबे हुए हैं। इस समस्या से भली-भाँति परिचित मैकेनिकल इंजीनियरिंग के एक प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती ने खुले स्थान में सूखने वाले कपड़ों से बिजली पैदा कर बिजल की कमी को कुछ कम करने का एक विश्वसीनय और प्रशंसनीय प्रयास किया है। हालाँकि सूखे कपड़े से जो बिजली पैदा होगी, उसका उपयोग बड़े पैमाने पर नहीं किया जा सकेगा, परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्या को अवश्य दूर किया जा सकता है। कपड़े से उत्पन्न ये बिजली 24 घंटों में लगभग 10 वॉल्ट तक का चार्ज करने की क्षमता रखती है। प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती का कहना है, ‘कपड़े सेल्यूलोज फाइबर के बने होते हैं, जिसके कारण उनमें करंट पैदा होता है।’ प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती के प्रयोग के अनुसार कपड़े के एक टुकड़े को थोड़ा नमक और पानी में डुबाने से करंट फाइबर में दौड़ने लगता है और बिजली पैदा होती है। इस क्रिया से बहुत देर तक तथा निरंतर वॉल्टेज में बिजली पैदा की जा सकती है। आइए जानते हैं इस बोमिसाल अविष्कार को करने वाले आविष्कारक प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती के विषय में।

GATE के टॉपर रहे हैं सुमन चक्रवर्ती

सुमन चक्रवर्ती भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology) यानी IIT-KHARAGPUR (खड़गपुर) में मैकेनिकल इंजीनियरिंग (Mechanical Engineering) विभाग में प्रोफेसर और संस्थान के अध्यक्ष हैं। वर्तमान में वह एक संस्थान में प्रायोजित अनुसंधान और औद्योगिक परामर्श के डीन हैं। वे अप्रैल 2015 से मार्च 2019 तक स्कूल ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी (School of Medical Science and Technology) और 2014-16 में इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ़ इंजीनियरिंग (Indian National Academy of Engineering) के चेयर प्रोफेसर रह चुके हैं। 2002 में वे संस्थान में सहायक प्रोफेसर के रूप में शामिल हुए, 2007 में एसोसिएट प्रोफेसर बने और 2008 में वह पूर्णकालिक प्रोफेसर बन गए। सुमन चक्रवर्ती ने अपनी स्कूली शिक्षा कोलकाता के सेंट लॉरेंस हाई स्कूल से की। उसके बाद 1996 में जादवपुर विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग से स्नातक की उपाधि प्राप्त की, जिसमें उनकी द्वितीय रैंक आई। ​​पढ़ाई के बाद सुमन चक्रवर्ती ने डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स लिमिटेड (Development Consultants Limited) में इंजीनियरिंग डिज़ाइन पर एक संक्षिप्त औद्योगिक प्रशिक्षण लिया। इसके बाद इंजीनियर बनने के लिए 1997 में Graduate Aptitude Test Engineering यानी GATE की परीक्षा दी। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी गेट परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने अपने मास्टर्स अध्ययन के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (Indian Institute of Science) IISc में प्रवेश लिया, जहाँ वे संकाय के टॉपर रहे और पैरास्नातक इंजीनियरिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक व सीनेट की उपाधि प्राप्त की। तत्पश्चात, उन्होंने लेक्चरर के रूप में जादवपुर विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। 2000 में वह अपने डॉक्टरेट अनुसंधान के लिए IISc में शामिल हो गए। जादवपुर विश्वविद्यालय से अध्ययन अवकाश पर उन्होंने Indian Institute of Science यानी IISc में लगभग एक वर्ष में अपनी पीएचडी थीसिस का काम पूरा। 2002 में उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय सीएफडी थीसिस (Best International CFD Thesis) अवार्ड’ भी मिला।

400 से अधिक पत्र हो चुके हैं प्रकाशित

सुमन चक्रवर्ती ने अपने सैद्धांतिक, कम्प्यूटेशनल और प्रायोगिक मॉडलिंग सहित माइक्रोफ्लुइडिक्स और माइक्रो/नैनो स्केल परिवहन प्रक्रियाओं के क्षेत्र में अनुसंधान हित के लिए कई कार्य किए हैं, जिसमें अंतर्निहित बुनियादी बातों के साथ-साथ जैव-चिकित्सा, जैव-तकनीकी, चिप शीतलन और ऊर्जा से संबंधित अनुप्रयोग शामिल हैं। सुमन चक्रवर्ती अपने मौलिक के साथ-साथ माइक्रोफ्लुइडिक्स और नैनोफ्लूडिक्स के क्षेत्र में अनुवाद संबंधी शोध के लिए जाने जाते हैं। उनके उच्च प्रकाशन के अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 400 से अधिक पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। 30 से अधिक पीएचडी छात्रों ने उनकी देखरेख में स्नातक किया है। सुमन चक्रवर्ती ने कई पाठ्य पुस्तकें लिखी हैं और कई शोध मोनोग्राफ संपादित किए हैं, उन्होंने नेशनल प्रोग्राम ऑन टेक्नोलॉजी एनहांसिंग लर्निंग के तहत कई वीडियो लेक्चर कोर्स भी विकसित किए हैं।

INAE के सबसे कम आयु के फैलो

सुमन चक्रवर्ती ने वैज्ञानिक रिपोर्ट सहित कई विशेषज्ञता के क्षेत्र में पत्रिकाओं का संपादक किया है और वे उसके संपादकीय बोर्ड के सदस्य भी रहे हैं। उन्हें उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रतिष्ठित संत स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, इसके अलावा उन्हें स्केपस यंग साइंटिस्ट अवार्ड एल्सेवियर ने अपने शोध प्रकाशनों पर उच्च प्रशंसा के लिए दिया था। इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ़ इंजीनियरिंग (INAE) के सबसे कम आयु के फैलो रहे सुमन को इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA), इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज (IAS), इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस (NASI), इंडो-यूएस रिसर्च फेलोशिप भी मिल चुका है। उन्हें अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी की फैलोशिप, रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री की फैलोशिप और अमेरिकन सोसाइटी ऑफ मैकेनिकल इंजीनियर्स की फैलोशिप और अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट फैलोशिप प्रदान की गई है। वह स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर भी रह चुके हैं। 2018 में उन्हें प्रतिष्ठित जे. सी. बोस राष्ट्रीय फैलोशिप से सम्मानित किया गया था, जो भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली सर्वोच्च फैलोशिप है।

स्वयं की स्टार्ट-अप कंपनी को किया प्रभावी

सुमन चक्रवर्ती ने विभिन्न सरकारी और निजी निकायों से अनुसंधान धन प्राप्त किया है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय फंडिंग एजेंसियां ​​(जैसे ब्रिटिश काउंसिल, रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग यूके, इंडो-यूएस साइंस एंड टेक्नोलॉजी फोरम, जेएसपीएस, जापान आदि) शामिल हैं। सुमन चक्रवर्ती ने राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में IMPRINT इंडिया पहल के हेल्थकेयर डोमेन का नेतृत्व किया है। वे जनरल मोटर्स, डेल्फी, इन्टेल, शेल, टाटा स्टील, आईटीसी जैसे औद्योगिक घरानों के सलाहकार भी रहे हैं। सुमन चक्रवर्ती ने अपने स्वयं के स्टार्ट-अप कंपनी को भी प्रभावी ढंग से चिकित्सा उत्पादों के डिजाइन में अपने शोध का अनुवाद करने के लिए प्रेरित किया है। उनकी कंपनी का उद्देश्य कम लागत वाले चिकित्सा निदान के लिए उपन्यास उपकरणों को लाना है।

You may have missed