प्रभु राम के दर्शन से पहले आपके मन और वातावरण को पावन कर देगा 2100 किलो का यह घंटा : जानिए महत्व

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 13 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। हिन्दू धर्म के अनुसार सृष्टि की रचना में ध्वनि का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि ध्वनि से प्रकाश की उत्पत्ति और प्रकाश से ध्वनि की उत्पत्ति हुई है। ब्रह्मांड में व्याप्त अनाहत और अजर-अमर ध्वनि के कुछ प्रतीक भी माने जाते हैं, जैसे शंख, बाँसुरी, वीणा और घंट। इन सबमें सबसे अधिक प्रभावशाली, लोकप्रिय और वैज्ञानिक है घंट (Bell), जिसे आम भाषा में घंटा या घंटी भी कहते हैं। घंटा इसलिए प्रभावशाली व वैज्ञानिक है, क्योंकि घंटे से निकलने वाले स्वर को सृष्टि का प्रारंभ करने वाले नाद (ध्वनि) का प्रतीक माना जाता है। जिन स्थानों पर घंटी बजने की ध्वनि नियमित आती है, वहाँ का वातावरण सदैव शुद्ध और पवित्र बना रहता है। इससे नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती है। इतना ही नहीं घंटी या घंटे को काल का प्रतीक भी माना गया है। यही कारण है कि भारतीय सनातन धर्म परम्परा में हर मंदिर, देव स्थान, पूजा स्थान आदि के द्वार पर घंट या घंटियाँ अवश्य लगी होती हैं। अब जबकि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है, तो स्वाभाविक है कि प्रस्तावित राम मंदिर में भी घंटा और घंटियाँ लगाई जाएँगी, जिसकी तैयारियाँ शुरू हो गई हैं।

वास्तव में अयोध्या मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पूर्व ही प्रस्तावित राम मंदिर के लिए विशालकाय घंटा बनाने का कार्य आरंभ हो गया था। अब जबकि यह निश्चित हो गया है कि अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा, तब इस विशालकाय घंट के निर्माण में और तेजी आ गई है। यह घंटा इसलिए विशालकाय है, क्योंकि इसका वजन 2100 किलो है। यह भारी-भरकम घंटा राम मंदिर के मुख्य द्वार पर लगाया जाएगा और इसका निर्माण उत्तर प्रदेश में एटा के जलेसर में किया जा रहा है। विशेष बात यह है कि यहाँ एक नहीं 2 नहीं, अपुति 10 घंटे बनाए जा रहे हैं, जिनकी कीमत 10 लाख रुपये है। राम मंदिर के लिए जिस घंटे का निर्माण किया जा रहा है, प्रयास यह है कि वह देश के सभी मंदिरों में लगे सभी घंटों में सबसे बड़ा और भारी हो। 2100 किलो के घंटे सहित इन सभी घंटों को बनाने के लिए पीतल के अतिरिक्त कई अन्य धातुओं का भी प्रयोग किया जा रहा है। सबसे बड़े घंटे की ऊँचाई 6 फीट और चौड़ाई 5 फीट है। चूँकि हिन्दु धर्म में मंदिर के घंटों का विशेष महत्व है, इसलिए राम मंदिर के घंटे को बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

क्या है धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक प्रभाव ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि का प्रारंभ एक ध्वनि गुंजन से माना जाता है, जिसे नाद कहते हैं। उल्लेखनीय है कि यही नाद ओंकार के उच्चारण से भी जाग्रत होता है। देवालयों और मंदिरों के गर्भगृह के बाहर लगी घंटी या घंटे को काल का प्रतीक भी माना गया है। सबसे पहले धार्मिक स्थानों में घंटी लगाने का आरंभ जैन और हिन्दु मंदिरों से हुआ। तत्पश्चात बौद्ध धर्म और फिर ईसाई धर्म ने इस परंपरा को अपनाया। जिन धार्मिक स्थानों में प्रतिदिन घंटी बजती है। उन्हें जाग्रत देव मंदिर कहा जाता है। पूजा व आरती के समय बजाए जाने वाली छोटी घंटियों और घंटे-घडियालों में एक विशेष ताल और गति होती है। इन लय युक्त तरंगों का प्रभाव व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पडता है। घंटे की आवाज कर्कश न होकर मनमोहक एवं कर्ण-पिर्य होती है जिससे किसी भी प्रकार हानि नहीं होती। दूसरी तरफ विज्ञान के अनुसार भी घंटे का अपना एक महत्व है। वैज्ञानिक दृष्टि से जब घंटी बजाई जाती है, तो वातावरण में कंपन पैदा होता है, जो वायुमंडल के कारण अत्यंत दूर तक जाता है। इस कंपन का लाभ यह है कि इसकी परिधि में आने वाले सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है। मंदिर की घंटियाँ कैडमियम, ज़िंक, निकेल, क्रोमियम और मैग्नीशियम से बनती हैं। इसकी ध्वनि दूर तक जाती है, जो मस्तिष्क के दाएँ और बाएँ हिस्से को संतुलित करता है। जैसे ही आप घंटी या घंटा बजाते हैं, एक तीव्र ध्वनि आवाज उत्पन्न होती है, जो 10 सेकेंड तक गूंजती है। यह अवधि शरीर के सभी 7 हीलिंग सेंटर्स को एक्टिवेट करने के लिए उपयोगी होती है। साथ ही आसपास के वातावरण को भी शुद्ध करती है। घंटी की ध्वनि मन, मस्तिष्क और शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। इस ऊर्जा से बुद्धि प्रखर होती है। मंदिरों में जब भी आरती होती है, तो घंटी की ध्वनि से वहाँ उपस्थित लोग मंत्र-मुग्ध हो जाते हैं।

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