जानिए कौन हैं भारत के सबसे बड़े दानवीर शिव नाडार ?

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 24 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय परंपरा के अनुसार दान करना बहुत ही पुण्य का काम माना जाता है, परंतु वर्तमान में यह प्रचलन कम होता जा रहा है। कुछ दशक पहले भारत में स्थापित होने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियाँ अपनी फैक्ट्री तो लगा लेती थीं, परंतु अपने आस-पास रहने वाले लोगों जिनसे उन्होंने फैक्ट्री लगाने के लिए भूमि ली या फिर जिन लोगों का जीवन फैक्ट्री लगाने से अस्त-व्यस्त हो जाता था उनके उत्थान के लिए कोई कार्य नहीं करते थे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2013 में कंपनी कानून में बदलाव करते हुए सभी भारती में स्थापित होने वाली कंपनियों को अपने लाभ का 2 प्रतिशत हिस्सा कॉर्पोरेट सोशल रिसपॉन्सिबिलिटी (CSR) पर खर्च करना अनिवार्य कर दिया, जिसके तहत एक तय सीमा से ज्यादा कारोबार करने या लाभ कमाने वाली कंपनियों के लिए सीएसआर पर खर्च करना जरूरी किया गया। कंपनियों की ये ज़िम्मेदारी होती थी कि वे फैक्ट्री या अपने कार्यलय के आस-पास रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए धन राशि के रुप में या स्कूल, घर आदि बना कर पूरा करें। 2013 से कंपनियाँ अपने सीएसआर के तहत ऐसे कई कार्य कर रही हैं, जिससे लोगों का उपकार हो रहा है। हाल ही में कंपनियों की इस जिम्मेदारी का आंकलन करने के लिए मुंबई की एक संस्था एडलगिव फाउंडेशन (EDELGIVE FOUNDATION) ने एक सर्वे किया जिसमें 72 कंपिनियों की एक लिस्ट जारी की है, जिसमें दान देने वाली कंपनी और अनके मालिकों के नाम शामिल किए गए हैं। ये उन कंपनियों की लिस्ट थी, जिन्होंने अपनी कमाई का 2 प्रतिशत हिस्सा सीएसआर कार्यों के लिए दान किया है।

क्या करता है एडलगिव फाउंडेशन ?

एडेलगिव फाउंडेशन (EDELGIVE FOUNDATION) यानी EF की स्थापना 2008 में एडेलवाइस ग्रुप (Edelweiss Group) यानी EG ने की थी, जो EG की एक परोपकारी शाखा है। पिछले कई दशक से एडेलगिव, मुख्य रूप से देश भर में छोटे और मध्यम आकार के गैर सरकारी संगठनों का समर्थन करने वाली एक अनुदान संगठन के रूप में कार्य कर रही है। इसके अतिरिक्त EF देश भर के अनुदानकर्ताओं, दाताओं और विश्वसनीय गैर सरकारी संगठनों के बीच संपर्क मंच का भी माध्यम बनी हुई है। EF का प्रयास रहा है कि एक ऐसी स्थायी संस्थानों और संगठनों का निर्माण किया जाए, जो सामाजिक विकास और नवाचार को बढ़ावा दे सके और जिसका लाभ विश्व के कौशल, संसाधनों और प्रतिभाओं को मिल सके, जिससे वे आगे बढ़ पाएँ। EF की दानवीर लोगों की लिस्ट में एजुकेशन सेक्टर में 826 करोड़ रुपये दान कर शिव नाडार प्रथम स्थान पर हैं, तो विप्रो के मालिक अज़ीम प्रेमजी 453 करोड़ रुपए के दान के साथ दूसरे स्थान पर और देश के सबसे धनवान उद्योगपति व रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL) के मालिक मुकेश अंबाणी 402 करोड़ रुपए और तीसरे स्थान पर रहे हैं।

कौन है शिव नाडार ?

शिव नाडार (Shiv Nadar) भारत के प्रमुख उद्यमी और समाजसेवियों में से एक हैं। वे एचसीएल टेक्नॉलोजीज (HCL Technologies Limited) के अध्यक्ष एवं प्रमुख रणनीति अधिकारी हैं। 2010 में उनकी व्यक्तिगत सम्पत्ति 4.2 बिलियन अमेरिकी डालर के बराबर थी। शिव नाडार को 2008 में भारत सरकार ने उद्योग एवं व्यापार के क्षेत्र में पद्मभूषण से सम्मानित किया था। उनके 5 देशों में 100 से ज्यादा कार्यालय, 30 हजार से ज्यादा कर्मचारी व अधिकारी हैं। शिव नाडार आज अपनी मेहनत, योजना और सूझबूझ के बल पर विश्व भर के कंप्यूटर व्यवसायियों और उपभोक्ताओं के विश्वास पात्र बन चुके हैं। शिव नाडार का जन्म 14 जुलाई, 1945 में तमिलनाडू में थुलुकुडी के तिरुचेंदुर से लगभग 10 किलोमीटर दूर मुल्यापोजी गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम शिवसुब्रमण्य नाडार और माता का नाम वामसुंदरी देवी था। उनकी माँ वामसुंदरी देवी दीना थांथी समाचार पत्र के संस्थापक एस. पी. अदितानार की बहन हैं। नाडार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कुंभकोणम के टाउन हायर सेकेंडरी स्कूल (Town Higher Secondary School) में किया था, इसके बाद उन्होंने मदुरै के एलंगो कॉर्पोरेशन हायर सेकेंडरी स्कूल (Elango Corporation Higher Secondary School) में भी अध्ययन किया। जून-1955 में कक्षा 6 में वे प्रथम स्थान पर आए और जून 1957 तक टाउन हाई स्कूल में कक्षा 9 तक अपनी शिक्षा पूरी की। इसके बाद शिव नाडार ने त्रिची के सेंट जोसेफ बॉयज़ हायर सेकेंडरी स्कूल (St. Joseph’s College Higher Secondary School) में दाखिला लिया और यहाँ से हाई स्कूल किया। इसके बाद नाडार ने मदुरै एक अमेरिकन कॉलेज (American College) से पूर्व-विश्वविद्यालय (pre-university degree) की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद नाडार ने कोयंबटूर के पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी (PSG College of Technology) से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (Electrical and Electronics Engineering) में डिग्री प्राप्त की।

COEP से की करियर की शुरुआत

1967 में शिव नाडार ने पुने के वालचंद समूह के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग-पुणे (COEP) में अपने करियर की शुरू की, परंतु उन्होंने इसे अपना उद्यम शुरू करने के लिए छोड़ दिया। कई दोस्तों और सहयोगियों के साथ साझेदारी में जिसमें अजय चौधरी (पूर्व अध्यक्ष, एचसीएल इन्फोसिस्टम्स), अर्जुन मल्होत्रा (सीईओ और चेयरमैन, हेडस्ट्रॉन्ग), सुभाष अरोड़ा, योगेश वैद्य, एस. रमन, महेंद्र प्रताप और डीएस पुरी के सहयोग से साझेदारी में एक उद्यम शुरुआत की। जिसका नाम माइक्रोकैप (Microcomp) था। ये कंपनी भारतीय बाज़ार में टेलीडिजिटल कैलकुलेटर (teledigital calculators) बेचने का काम करती थी, परंतु वह कुछ ख़ास कामयाब नहीं हो पाई।

पिता शिवसुब्रमण्य के नाम पर खोला कॉलेज

1976 में 1,87,000 रुपये के निवेश के साथ HCL (HCL Technologies Limited) कंपनी की नींव रखी गई। 1980 में एचसीएल ने आईटी हार्डवेयर बेचने के लिए सिंगापुर में सुदूर पूर्व कंप्यूटरों के उद्घाटन के साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कदम रखा। उद्यम ने पहले वर्ष में 1 मिलियन यानी 10 लाख रुपये की कमाई की। कंपनी में बिना किसी प्रबंधन नियंत्रण के शिव नाडार सबसे बड़े शेयरधारक बनें। 1996 में नाडार ने अपने पिता शिवसुब्रमण्य नाडार के नाम पर तमिलनाडु के चेन्नई में एसएसएन कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग (SSN College of Engineering) की स्थापना की। नाडार ने इस कॉलेज की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए कॉलेज को 10 लाख रुपये दान में दिए। 2006 में नाडार ने कॉलेज के सामने ये शर्त रखी कि कॉलेज अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ-साथ छात्रों को विदेशी विश्वविद्यालय से टाई-अप करने में मदद करेगा। 2005 में नाडार भारतीय स्कूल ऑफ बिजनेस (Indian School of Business) के कार्यकारी बोर्ड में शामिल हुए। मार्च 2008 में नाडार के एसएसएन ट्रस्ट ने ग्रामीण छात्रों के लिए यूपी में दो विद्याज्ञान स्कूल स्थापित करने की घोषणा की, जहाँ उत्तर प्रदेश के 50 जिलों के 200 छात्रों को मुफ्त छात्रवृत्ति प्रदान करने की योजना बनाई गई। फरवरी 2011 में नाडार ने टाउन हायर सेकेंडरी स्कूल का दौरा किया, जहाँ नाडार ने कंप्यूटर और अन्य उपकरण के लिए 80 लाख रुपये दान किए। शिव नाडार ने 2014 तक एक तकनीकी संस्थान IIT खड़गपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

लोक कल्याण के लिए 7100 करोड़ रुपये किए दान

2008 में भारत सरकार ने आईटी उद्योग में उनके योगदान के लिए नाडार को तीसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार यानी पद्म भूषण (Padma Bhushan) से सम्मानित किया। 2007 में मद्रास विश्वविद्यालय (Madras University) ने उन्हें डॉक्टरेट (Doctorate) की मानद उपाधि से सम्मानित किया। नाडार को ई एंड वाई एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर 2007 (E&Y Entrepreneur of the Year 2007) सर्विसेज (Services) के रूप में भी मान्यता दी गई है।1995 में नाडार डेटाक्वेस्ट आईटी मैन ऑफ द ईयर (Dataquest IT Man of the year) बने। 2005 में उन्हें सीएनबीसी बिजनेस एक्सिलेंस (CNBC Business Excellence) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2006 में उन्हें अखिल भारतीय प्रबंधन संघ (All India Management Association) से मानद फैलोशिप (Fellowship ) भी मिली। 2011 में नाडार को एशिया प्रशांत (Asia Pacific) में फोर्ब्स -48 हीरोज ऑफ फिलैंथ्रोफी (Forbes’ 48 Heroes of Philanthropy) में शुमार किया गया था। 2010 में उन्हें डेटाक्वेस्ट लाइफटाइम अचीवमेंट (Dataquest Lifetime Achievement) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अप्रैल-2017 में इंडिया टुडे पत्रिका ने 2017 की सूची के 50 सबसे शक्तिशाली लोगों में नाडार का नाम 16वें स्थान पर शामिल किया था। अब तक शिव नाडार ने लेक परोपकार के लिए $ 1 बिलियन ($1 billion) यानी 71 सौ करोड़ रुपये से अधिक का दान परोपकार के कार्यों के लिए कर चुके हैं।

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