आख़िर क्यों सुलग रहा है ‘दुनिया का फेफड़ा’ ? लोग मांग रहे दुआ !

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 22 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। AMAZON शब्द सुनते ही एक ई-कॉमर्स वेबसाइट और उस पर अपलोड की गई खरीदने योग्य ढेर सारी सामग्रियों का दृश्य आँखों के सामने उभर आता है, परंतु बहुत कम लोगों को पता होगा कि जिस अमेज़न से वे भारी डिसकाउंट पाते हैं, उस ई-कॉमर्स कंपनी का नाम अमेज़न दुनिया में 20 प्रतिशत ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाले वर्षावन (RAIN FOREST) अमेज़न से पड़ा है। ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न के मालिक जेफ बेज़ोस, जो दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं, ने अपनी कंपनी का नाम दक्षिण अमेरिका के बड़े भू-भाग में फैले अमेज़न जंगल के नाम पर ही रखा है, परंतु आज यह जंगल भीषण आग की चपेट में है और पूरी दुनिया इस आग को लेकर चिंता में पड़ गई है। यहाँ तक कि ट्विटर पर भी #PrayforAmazona ट्रेंड कर रहा है।

ब्राज़ील स्थित अमेज़न के जंगलों में पिछले एक पखवाड़े से भीषण आग लगी है, जो बुझने का नाम नहीं ले रही है। ब्राज़ील के अमेज़न वर्षा वन को दुनिया का फेफड़ा भी कहा जाता है, क्योंकि इसका विस्तार दक्षिणी अमेरिका से ब्राज़ील तक फैला हुआ है। इस जंगल में 2.1 मिलियन वर्ग मील तक घने पेड़ हैं और कहा जाता है कि इन पेड़ों के कारण यहाँ सूरज की रोशनी तक ज़मीन पर नहीं पड़ती। अमेज़न के जंगलों में लगे पेड़ों से दुनिया को 20 प्रतिशत ऑक्सीजन मिलने का दावा किया जाता है।

क्यों खतरे में है धरती ?

अमेज़न जंगलों में लगी भीषण आग के कारण लाखों पेड़-पौधे और वहाँ रहने वाले जीव-जंतु नष्ट हो रहे हैं। इन जंगलों में आग की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। 2019 में ही अमेज़न में सबसे अधिक आग लगने की घटनाएँ हुई हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि ब्राज़ील में जंगलों की कटाई के कारण आग की घटनाएँ बढ़ रही हैं और इस बार तो ऐसी भयावह आग लगी है कि ब्राज़ील का एक पूरा शहर ही आग के धुएँ से ढँक गया है। पर्यावरण कार्यकर्ता अमेज़न की दुर्दशा के लिए ब्राज़ील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो की नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है कि ब्राज़ीलियन राष्ट्रपति लकड़ी तस्करों और अवैध खनन में लोगों का तुष्टीकरण कर रहे हैं, जिससे जंगलों की दुर्दशा बढ़ी है। अमेज़न के जंगलों में 16 हजार से अधिक पेड़-पौधों की प्रजातियाँ और 25 लाख से अधिक कीड़ों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो इस समय लगी भीषण आग के कारण अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं।

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