अमेरिकी मरीन कमांडो को भारतीय सुरक्षा बल ने किया गिरफ्तार

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American Marine Commando

नई दिल्लीः बिहार में स्थित मधुबनी जिला में सीमा सुरक्षा बल ने एक American Marine Commando को गिरतार किया है। बताया जा रहा है कि 50 साल का यह कमांडो संदिग्ध रूप से सीमा पर भटक रहा था। इस बीच सीमा सुरक्षा बल के प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि 50 साल का डेविड दूहयून क्योंग अमेरिकन मरीन काप्र्स कमांडर है। American Marine Commando 19 मरर्च को ही गिरफ्तार किया गया था। फिल्हाल IB Ray और स्थानीय पुलिस उससे पूछताछ कर चुकी है।

दरअसल अमेरिकी मरीन कमांडो डेविड दूहयून क्योंग को मधुबनी जिले के पास जयनगर खोउना पोस्ट से गिफ्तार किया गया था। उसके पास से 1919 अमरीकी Dollar एक कंपास और एक परिचय पत्र बरामद किया गया है। पूछताछ में उसने बताया है कि वह पर्यटक वीजा पर नेपाल आया था। और 12 अप्रैल को उसके वीजा की अवधि खत्म हो रहा है। गुप्तचर ब्यूरो IB एंव Research and Analysis विंग रॉ समेत सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि वह पिछले साल 26 अक्तूबर 2017 को भारत भी आया था, मगर इस साल जनवरी में उसका वीजा रद्द कर उसे निष्काशित कर दिया गया। प्रवक्ता से यह जानकारी भी मिली कि उसे 26 जनवरी को निर्वासित कर दिया गया था। हालांकि यह साबित नहीं हुआ है कि उसका वीजा क्यों रद्द किया गया था।

हालांकि प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि American Marine Commando क्योंग दक्षिण अफ्रीका का रहने वाला है। मगर 1998 में वह अमेरिका चला गया। अमेरिकी मरीन कमांडर क्योंग का दावा है कि वह दिल्ली से दक्षिण कोरिया गया और वहां से 12 मार्च को नेपाल के लिए निकला। प्रवक्ता का कहना है कि अमेरिकी कमांडर क्योंग के बयान में विरोधाभास है। उसके पास टिकट और बोर्डिंग पास तो है पर पासपोर्ट पर उसकी यात्रा की जानकारी दर्ज नहीं है। अमेरिकी मरीन कमांडर क्योंग बताया कि नेपाल पहुंचने के बाद उसने देश का दौरा किया और जब वह जनकपुर और आस पास के गांव के दौरे पर था तो उसे सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने पकड़ लिया।

इस पर सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि जब उसे निर्वासित कर दिया गया था तो उसके बावजूद भी उसका देर रात भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करना चिंता का विषय है। साथ ही उसके आईडी पत्र और उसके इरादों के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस और खुफिया एजेंसियां अमेरिकी दूतावास से उसके बारे में जानकारी पाने की कोशिश कर रहे हैं।

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