अमूल के इस ‘अमूल्य’ कदम से इन 7 लाख लोगों को होगा 70 लाख रुपए का फायदा : कहीं आप भी तो शामिल नहीं ?

भारत की सबसे बड़ी डेयरियों में से एक अमूल डेयरी के एक फैसले ने 7 लाख से अधिक पशु पालकों को 70 लाख रुपये से अधिक का फायदा कराया है। मिल्क सिटी के नाम से मशहूर गुजरात के आणंद शहर में स्थित गुजरात कॉ-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) की ओर से संचालित आणंद मिल्क यूनियन लिमिटेड (AMUL) के नाम से डेयरी उत्पादों का कारोबार करता है। अमूल के नाम से दूध, दही, पनीर, छाछ, घी, मक्खन आदि प्रोडक्ट्स देश और दुनिया में लोगों की पसंद बनते जा रहे हैं। इससे अमूल डेयरी का कारोबार भी बढ़ता जा रहा है।

Amul – dairy industry in India

अब अमूल ने अपने दूध उत्पादक पशु पालकों को भी फायदा पहुँचाने के लिये दूध के खरीद मूल्य में इजाफा किया है। अमूल ने भैंस के दूध के एक किलो वसा (FAT) का दाम 10 रुपये बढ़ा दिया है, जबकि गाय के दूध में एक किलो वसा का दाम साढ़े चार रुपये बढ़ाया है। कंपनी का कहना है कि उसके इस निर्णय से उसे दूध बेचने वाले 7 लाख से अधिक पशु पालकों को आर्थिक लाभ होगा। कंपनी के अनुसार पशु पालकों को यह बढ़ा हुआ दाम 11 मई से ही मिलना शुरू हो गया है।

अमूल के अनुसार अभी तक कंपनी भैंस के दूध के एक किलो वसा के लिये पशु पालकों को 630 रुपये चुकाती थी, परंतु अब 10 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 640 रुपये चुकाएगी। 7 लाख पशु पालकों को 10 रुपये की बढ़ोतरी के हिसाब से 70 लाख रुपये का फायदा होगा। इसी प्रकार डेयरी गाय के दूध के एक किलो वसा के लिये अब 290 रुपये पशु पालक को चुकाएगी।

कंपनी के अनुसार उसका कारोबार और राजस्व तेजी से बढ़ रहे हैं। फेडरेशन को चालू वित्त वर्ष 2019-20 में कारोबार में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की आशा है। यदि ऐसा हुआ तो कंपनी का कारोबार चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये तक पहुँच जाएगा, जो पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 33,150 करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है।

कंपनी के मुताबिक उसने अपने उत्पादों के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, इसके बावजूद फेडरेशन का राजस्व तेजी से बढ़ रहा है। फेडरेशन के दावे के मुताबिक किसानों को दूध का अधिक मूल्य चुकाने के बावजूद उसके राजस्व पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। अमूल फेडरेशन के 18 सदस्यीय यूनियनों में गुजरात के 18,700 गाँवों के 36 लाख से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। जिनसे फेडरेशन को औसतन दैनिक 230 लाख लीटर दूध की खरीदी की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि अमूल वर्तमान में देश का एक प्रतिष्ठित ब्राण्ड है। जो गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड नामक सहकारी संस्था के प्रबंधन में चलता है। गुजरात के लगभग 26 लाख दुग्ध उत्पादक इस दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड के अंशधारी हैं। अमूल को देश में श्वेत क्रांति का जनक माना जाता है। इस संघ की कार्य प्रणाली से ही भारत दुनिया का सर्वाधिक दुग्ध उत्पादक देश बनने का गौरव प्राप्त करने में सफल हुआ है। आणंद में इस संघ की स्थापना देश की आज़ादी से पहले दिसंबर 1946 में हुई थी।

आपको यह भी बता दें कि अमूल से जुड़ी गुजरात की 18 दुग्ध डेयरियों में से एक पंचमहाल जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ जो पंचामृत डेयरी के नाम से पहचाना जाता है, उसने अमूल से पहले 1 मई से ही दूध की खरीद कीमतों में 20 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है और यह डेयरी अपने दुग्ध उत्पादक पशु पालकों को एक किलो वसा की कीमत 640 रुपये के स्थान पर 660 रुपये दे रही है। मध्य पूर्व गुजरात में पंचमहाल, महिसागर, दाहोद आदि जिलों के 3 लाख से अधिक दूध उत्पादक पंचामृत डेयरी से जुड़े हैं।

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