कपूत निकला अण्णा का सपूत : ‘ना-ना कह कर बंगला ले लिया और मोटी तनख्वाह भी ले रहा है, मेरे सपने मिट्टी में मिल गए’ !

Written by

वर्ष 2011 का अण्णा आंदोलन तो सबको याद होगा ही। 8 वर्षों के बाद यह आंदोलन अब इतिहास बन गया है। भ्रष्टाचार और तत्कालीन कांग्रेस सरकार के विरुद्ध प्रसिद्ध समाजसेवी किसन बाबूराव हज़ारे उर्फ अण्णा हज़ारे ने दिल्ली में लाखों लोगों की भीड़ जुटा कर जो बड़ा सामाजिक आंदोलन खड़ा किया था। उस अराजनीतिक आंदोलन में दिखाई दिए चेहरे आज बिखर गए हैं। कोई राज्यपाल बन गया, कोई मुख्यमंत्री बन गया, तो किसी ने फिर से अपना कवि धर्म संभाल लिया, परंतु इस आंदोलन के जनक अण्णा हज़ारे आज के हालात से अत्यंत दुःखी हैं और उनके दुःख का कारण वह सपूत है, जो उनके उस आंदोलन की सबसे बड़ी उपजा था।

जी हाँ। हम बात कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल की, जो अण्णा आंदोलन में भ्रष्टाचार और तत्कालीन कांग्रेस सरकार के विरुद्ध सबसे मुखर चेहरा बन कर उभरे थे। अण्णा को अपने इस आंदोलनकारी सपूत से बहुत आशाएँ थीं, परंतु आज वो सारी आशाएँ धूमिल हो चुकी हैं। अण्णा का यह सपूत आज कपूत बन चुका है। यह बात हम नहीं कह रहे, अपितु यह स्वयं अण्णा हज़ारे के हृदय से निकला भाव है।

एक मीडिया से बातचीत में अण्णा हज़ारे ने आंदोलन के बाद आम आदमी पार्टी (आआपा-AAP) बना कर राजनीति में आने और आते ही छा जाने वाले अरविंद केजरीवाल की करतूतों पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की। आंदोलन से लेकर राजनीति में प्रवेश, पार्टी बनाने से लेकर दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने और फिर उस कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के प्रयास करने वाले केजरीवाल की इन करतूतों से अण्णा को गहरा आघात लगा है।

हज़ारे ने 2011 के आंदोलन में अपने प्रमुख सहयोगी रहे केजरीवाल के बारे में कई रहस्योद्घाटन किए। हज़ारे के अनुसार, ‘अरविंद ने मुझे बताया था कि राजनीति में जाने के बाद पक्ष बनाऊँगा, बंगला नहीं लूँगा, गाड़ी नहीं लूँगा। आज देखो, बंगला भी लिया और तनख्वाह भी सब पार्टी से ज्यादा ले रहा है।’ उल्लेखनीय है कि देश के सभी राज्यों में दिल्ली के मुख्यमंत्री की सैलरी तेलंगाना के बाद दूसरे नंबर पर आती है। सबसे अधिक सैलरी 4,10,000 रुपए तेलंगाना के मुख्यमंत्री की है, जबकि दूसरे नंबर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री की सैलरी 3,90,000 रुपए है।

राजनीति में आने के बाद केजरीवाल का पूरा चेहरा ही बदल गया। जिस कांग्रेस के विरुद्ध हज़ारे ने आंदोलन खड़ा किया और केजरीवाल प्रमुख चेहरा बन कर उभरे, उसी कांग्रेस के साथ गठबंधन करने की केजरीवाल ने जो कोशिश की, उससे भी अण्णा हज़ारे दुःखी हैं। हज़ारे कहते हैं, ‘अरविंद उसी भ्रष्टाचारी कांग्रेस के साथ गठबंधन की बात कर रहे हैं, इसलिए दुःखी हूँ। मुझे आशा थी कि अरविंद की पार्टी सत्ता में आई है, तो देश में एक मिसाल कायम की जाएगी। AAP ने भी कांग्रेस के विरोध में आदोलन किया, आरोप लगाया, दोष तिया और उन्हीं के साथ हाथ मिलाना कहाँ तक सही है ? यह कैसी राजनीति है ? मेरे सपने मिट्टी में मिल गए। AAP और अन्य पार्टी में क्या फर्क़ रहा अब। जिन्होंने बलिदान दिया, उन्हें अरविंद भूल गए। अरविंद अब सत्ता और पैसों में लिप्त हो गए हैं।’

Article Categories:
News

Leave a Reply

Shares