आतंकवाद पीड़ित अफग़ानिस्तान में बदलाव की बयार ला रहीं ‘बुक बस’ !

अहमदाबाद 25 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। बस को हम अक्सर यात्री परिवहन के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखते हैं और उसका उपयोग भी करते हैं, परंतु आतंकवाद की पीड़ा से ग्रस्त अफ़ग़ानिस्तान में दो बसें बदलाव की बयार बहा रही हैं। राजधानी क़ाबुल में इन दो बसों को देखा जा सकता है, जो बाज़ारों और स्कूल परिसरों में जाती हैं। इन बसों की विशेषता यह है कि इनमें एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचने की चाहत रखने वाले यात्रियों के स्थान पर पुस्तकें होती हैं। ये पुस्तकें अफग़ानिस्तान की नई पौध में नई बहार सींच रही है। क़ाबुल में बाज़ारों और स्कूल परिसरों में पहुँचने वाली इन दो बसों में प्रतिदिन 600 बच्चे आते हैं और बुक बस रूपी पुस्तकालय में विभिन्न पुस्तकें पढ़ते हैं।

सामान्य रूप से अफग़ानिस्तान से आए दिन आतंकवादी हमलों की ख़बरें सुर्खियाँ बँटोरती है, परंतु आज-कल इन दो बुक बसों ने लोगों का ध्यान खींचा है और इसका श्रेय जाता है ऑक्सफॉर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक करने वाली छात्रा फ्रेश्ता करीम को। 27 वर्षीय फ्रेश्ता को यह प्रेरणा अभावों से मिली। जी हाँ, फ्रेश्ता जब स्वंय स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई करती थीं, तब उन्हें कई बार पुस्तकों के अभाव झेलने पड़े। इसीलिए पढ़ाई पूरी होने के बाद फ्रेश्ता ने भावी विद्यार्थियों को इस तरह पुस्तकों का अभाव न झेलना पड़े, इस उद्देश्य से सबसे पहला काम चार्माग़्ज़ नामक संगठन बनाया।

फ्रेश्ता यह भली-भाँति जानती हैं कि यूनेस्कों के आँकड़ों के अनुसार साक्षरता दर के मामले में अफग़ानिस्तान की हालत दयनीय है। देश में हर 10 में से 3 वयस्क ही शिक्षा पूर्ण कर पाते हैं, जिसकी वज़ह है अधिकांश निजी स्कूलों में पुस्तकालय का न होना है। जहाँ पुस्तकालय हैं, वहाँ पुस्तकें नहीं हैं। फ्रेश्ता को बच्चों तक पुस्तकों को पहुँचाने का काम बसों से करने का तरीक़ा इसलिए सूझा, क्योंकि यह अपेक्षाकृत कम खर्चीला व श्रेष्ठतर है। फ्रेश्ता के संस्थान चार्माग्ज ने एक सरकारी कंपनी से दो बसें किराए पर लीं और इन बसों को पुस्तकालय में परिवर्तित कर दिया, जिनमें यात्रियों की भीड़ नहीं होती, अपितु ज्ञान की गंगा बहती है। चार्माग्ज को स्थानीय व्यवसायियों व समुदायों से दान मिलता है, जिससे बुक बस के लिए पुस्तकें ख़रीदी जाती हैं।

फ्रेश्ता के अनुसार चार्माग्ज तीसरी बस भी तैयार कर रहा है, जो मोबाइल सिनेमा की तरह कार्य करेगी। यद्यपि संस्थान की पुस्तकालय बसें ऐसे क्षेत्रों में नहीं ले जाई जातीं, जहाँ प्राणघातक धमाके आम बात हैं। सुरक्षित स्थानों पर इन बसों को खड़ा किया जाता है, ताकि बच्चे बस में आकर आराम से पढ़ सकें। इन बसों में बच्चे पढ़ते हैं, खेलते हैं, एक-दूसरे से सीखते हैं, उनमें पढ़ने की आदत बन रही है। अक्सर बच्चों का उत्साह फ्रेश्ता व उनके संस्थान को उत्साहित करता है।

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