BIG BREAKING : हर ‘मुसीबती M’ पर भारी पड़ रहा मोदी का ‘मारक M’ !

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* अड़ियल चीन को मात देकर ‘M’asood Azhar को वैश्विक आतंकी घोषित कराया

* सरकार की कड़ी नीति के आगे लाचार हुए Nirav ‘M’odi और Vijay ‘M’allya

* अब भारत के दबाव में झुका एंटीगुआ, ‘M’ehul Choksi की नागरिकता निरस्त

* देश में भी राजनीतिक विरोधियों ‘M’amta और ‘M’ayawati को मात

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 25 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अंग्रेजी अक्षर M का मानो चोली-दामन का साथ है। प्रधानमंत्री के उपनाम मोदी में जहाँ एम है, वहीं देश में मौजूद मोदी के राजनीतिक विरोधियों के नाम-उपनामों में भी एम की प्रमुखता है, तो विदेशी मोर्चे पर भारत और मोदी सरकार के लिए मुसीबत बने एम अक्षरधारियों के लिए भी मोदी का मारक एम भारी साबित हो रहा है।

आज इस एम अंग्रेजी अक्षर की चर्चा इसलिए की जा रही है, क्योंकि अभी-अभी जो अद्यतन समाचार आया है, उसके मुताबिक एंटीगुआ सरकार ने मेहुल चोकसी को दी गई अपने देश की नागरिकता निरस्त करने का निर्णय किया है। मेहुल चोकसी पंजाब नेशनल बैंक घोटाले (PNB SCAM) का आरोपी है और भारत से फरार है। मेहुल चोकसी ने एंटीगुआ की धन देकर खरीदी जा सकने वाली नागरिकता खरीदने में सफलता पाई थी, परंतु मंगलवार को एंटीगुआ के प्रधानममंत्री गैस्टन ब्राउन ने कहा कि उनका देश शीघ्र ही मेहुल चोकसी की नागरिकता निरस्त करने जा रहा है। मेहुल चोकसी को पहले यहां की नागरिकता मिली हुई थी. लेकिन अब इसे रद्द किया जा रहा है और भारत प्रत्यर्पित किया जा रहा है। ब्राउन ने कहा, ‘हम किसी भी ऐसे व्यक्ति को अपने देश में नहीं रखेंगे, जिसपर किसी भी तरह के आरोप लगे हों। अब एंटिगुआ में मेहुल चोकसी पर किसी तरह का कानूनी रास्ता नहीं बचा है, जिससे वह बच निकले, इसलिए उसकी भारत वापसी लगभग तय है। अभी मेहुल चोकसी से जुड़ा पूरा मामला कोर्ट में है। इसलिए हमें पूरी प्रक्रिया का पालन करना होगा। मैंने इसको लेकर भारत सरकार को पूरी जानकारी दे दी है। यद्यपि मेहुल चोकसी को सभी कानूनी प्रक्रिया पूरा करने का समय दिया जाएगा। जब उसके पास कोई भी कानून ऑप्शन नहीं बचेगा, तो उसे भारत प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा। यहाँ उल्लेखनीय बात यह है कि 13 हजार करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले के दो आरोपियों नीरव मोदी और मेहुल चोकसी में से नीरव जहाँ लंदन-ब्रिटेन भाग गया था, वहीं मेहुल एंटीगुआ जा छिपा था। मोदी सरकार के भारे दबाव के चलते एंटीगुआ सरकार अब मेहुल चोकसी की नागरिकता निरस्त करने पर सहमत हुई है। सूत्रों का कहना है कि एंटीगुआ में सारी वैधानिक प्रक्रियाएँ समाप्त होने के बाद प्रत्यर्पण की कार्रवाई शुरू की जाएगी और शीघ्रातिशीघ्र मेहुल चोकसी को भारत लाया जा सकता है।

संकटरूपी हर M पर मोदी नीति भारी

मेहुल चोकसी कोई पहला भगौड़ा नहीं है, जिस पर शिकंजा कसा गया हो। जिस तरह मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद देश छोड़ कर भागने वाले आर्थिक अपराधियों का ताँता लगा, उसी तरह मोदी सरकार ने भगौड़ों पर शिकंजा भी कसा। यद्यपि ध्यान देने वाली बात यह है कि आर्थिक-घरेलू और विदेशी मोर्चे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को परेशानी में डालने वाले ज्यादातर लोगों के नाम-उपनाम में अंग्रेजी अक्षर M शामिल है। अब मेहुल चोकसी को ही ले लीजिए, जिसके नाम का पहला अक्षर ही एम से शुरू होता है। मोदी सरकार के भारी दबाव के आगे एंटीगुआ सरकार मेहुल की नागरिकता निरस्त करने जा रही है। इससे पहले भी मोदी ने उन्हें चुनौती देने वाले एम अक्षरधारी नाम-उपनाम वाले हर व्यक्ति को हर मैदान पर मात दी।

लोकसभा चुनाव 2019 में जहाँ मोदी के विरुद्ध सबसे बड़ी चुनौती बन कर उभरने वालीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी-TMC) अध्यक्ष ममता बनर्जी तथा उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व बहुजन समाज पार्टी (बसपा-बीएसपी-BSP) सुप्रीमो मायावती के नाम भी एम अक्षर से ही शुरू होते हैं और चुनावों में दोनों ही महिला नेताओं का हश्र क्या हुआ, यह किसी से छिपा नहीं है। चुनाव परिणाम से ठीक पहले पीएम मोदी और उनकी घातक कूटनीति ने उस अड़ियल चीन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में झुका दिया, जो वर्षों से मौलाना मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित होने से रोक रहा था। मसूद का नाम भी एम से ही शुरू होता है। इमोदी सरकार के लिए आर्थिक मोर्चे पर चुनौती बने हुए भगौड़े आरोपियों में मेहुल चोकसी के अलावा नीरव मोदी और विजय माल्या भी मोदी सरकार की घातक कूटनीति के कारण बुरे दिनों से गुज़र रहे हैं। एम अक्षरधारी उपनाम वाला नीरव मोदी लंदन की जेल में है, तो विजय माल्या मोदी सरकार के कड़े रवैये के आगे गिड़गिड़ाने पर विवश है। रही बात ललित मोदी की, तो पीएम मोदी का मारक एम इस ललित मोदी के एम धारी उपनाम पर भी भारी ही पड़ेगा।

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