राम रहिम को सजा सुनाने वाले जज ने ‘अपना घर’ यौन शोषण मामले सजा सुनई

jagdeep singh - Apna Ghar sexual abuse case

युवाप्रेस न्यूज, पंचकूला (हरियाणा) :- 27 अप्रैल 2018 को सीबीआई की एक विशेष अदालत में जज ने ‘अपना घर ’यौन शोषण मामले सजा का ऐलान किया। सजा के तौर पर जज ने इस मामले में तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। बाता दें कि ‘अपना घर ’एक अनाथालय है जिसकी संचालिका जसवंती देवी थी यह सरकारी खर्च से चलता है। ऐसा बताया जा रहा है कि यहां पर रहने वाली लड़कियों के साथ यौन शोषण होता था और उनसे बंधुआ मजदूरी कराई जाती थी तथा उनको शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न भी दिया जाता था। इस मामले में संचालिका जसवंती देवी, उनके दामाद जय भगवान और वाहन चालक सतीश दोषी पाये गये जिसके लिए उनहें उम्रकैद की सजा दी गई। ‘अपना घर’ यौन शोषण मामले (Apna Ghar sexual abuse case) में सजा का ऐलान करने वाले जज वही है जिन्होने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम 25 अगस्त 2017 के दिन 20 साल की कारावास की सजा सुनाई थी।

Apna Ghar sexual abuse case में पंचकूला की अदालत ने 18 अप्रैल को नौ लोगों को दोषी करार दिया था। ‘अपना घर’अनाथालय को हरियाणा सरकार ने 2012 को बंद कर दिया था इस घर में वे लोग रहते थें जिनके पास घर’आश्रय नहीं होता था तथा मानसिक रूप से कमजोर होते थे। इनमें अधिकतर लड़कियां थी।

सरकारी धन से चलने वाले आश्रय गृह की संचालिका जसवंती देवी , उसके दामाद जय भगवान और वाहन चालक सतीश को उम्रकैद की सजा सुनायी गयी। इसके साथ ही जसवंती के दो कर्मचारियों, वीणा, शीला और सुषमा को रिहायी दी गई क्योंकि वे इस मामले में पहले ही सजा काट चुकी है। इसके अलाना दो अन्य लोगों को परिवीक्षा पर रिहा किया गया। पंचकूला की अदालत ने 18 अप्रैल को मामले में नौ लोगों को दोषी करार दिया था और आज सजा सुनायी। जब इस केस का मामला प्रकाश में आया था तो हरियाणा सरकार ने 2012 में ‘अपना घर’ अनाथालय को बंद कर दिया था। आश्रय गृह में वंचित एवं मानसिक रूप से अशक्त लोग रहते थे जिनमें से अधिकतर लड़कियां थीं।

क्या है ‘अपना घर’ यौन शोषण मामला (Apna Ghar Sexual Abuse Case):-

‘अपना घर’ यौन शोषण मामले के अंतर्गत 2012 में “अपना घर” नामक अनाथालय में कुछ लड़कियों रहती थी और इस अनाथालय की संचालिका जसवंती थी। मई 2012 में एक छापे के दौरान राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस अनाथालय से लगभग 100 बच्चों को बचाया। सूत्रों से पता चला है कि यहां रहने वाले बच्चों तथा लड़कियों के साथ यौन शोषण जैसी घृणित कार्य को अंजाम दिया जा रहा था। जिसके बाद 10 मई 2012 को पुलिस ने एफआईआर दर्ज और 12 जुलाई 2012 को यह केस सीबीआई को सौंप दिया गया। इसके बाद सीबीआई ने 7 लोगों पर नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया। इसके बाद वर्ष 2013 में एक अतिरिक्त आरोप पत्र तीन और लोगों पर लगाया गया। इन आरोपियों पर सीबीआई ने मानव तस्करी का भी आरोप लगया। इसके अलावा सीबीआई ने आरोपियों पर जबरन मजदूरी करने, दुष्कर्म व आपराधिक साजिश करने का आरोप लगाया।

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