CAA विरोध प्रदर्शन से आहत हैं विदा ले रहे आर्मी चीफ बिपिन रावत, ‘ठंड में डटे जवानों को देखिए’

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 26 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय सेना के अध्यक्ष पद से विदा ले रहे बिपिन रावत देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरुद्ध किए जा रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों से आहत हैं। रावत का कहना है कि भीड़ को एक सक्षम नेतृत्व की आवश्यकता होती है और नेतृत्व यानी लीडरशिप करना आसान कार्य नहीं है।

दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में INDAN ARMY CHIEF बिपिन रावत ने देश में सीएए को लेकर हो रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों की ओर इशारा करते हुए विशेषकर विश्वविद्यालयों (युनिवर्सिटीज़) और महाविद्यालयों (कॉलेजेज़) के विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शनों पर प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने साथ ही जवानों की प्रशंसा की, जो मुश्किल परिस्थितियों में देश की रक्षा में जुटे हुए हैं। रावत ने कहा कि लोग दिल्ली की ठंड से स्वयं को बचाने में जुटे हैं, परंतु सियाचिन के हमारे जवान -10 से -45 डिग्री तापमान के बीच सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं।

रावत ने एनआरसी और सीएए को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों पर कड़ी टिप्पणी की। यद्यपि उन्होंने किसी युनिवर्सिटी का नाम नहीं लिया, परंतु यह अवश्य कहा, ‘नेतृत्व क्षमता वह नहीं है, जो लोगों को अनुचित दिशा में लेकर जाती हो। आज हम सब बड़ी संख्या में युनिवर्सिटीज़ और कॉलेजों में छात्रों की अगुवाई में कई सहरों में भीड़ और लोगों को हिंसक प्रदर्शन करते देख रहे हैं। यह नेतृत्व क्षमता नहीं है। नेतृत्व करना एक कठिन कार्य है, क्योंकि जब आप आगे बढ़ते हैं, तो बड़ी संख्या में लोग आपका अनुकरण करते हैं। यह दिखने से साधारण लगता है, परंतु अत्यंत-अत्यंत कठिन कार्य है, क्योंकि आपके पीछे एक बहुत बड़ी भीड़ है।’

आर्मी चीफ ने सियाचिन की अत्यंत कठिन परिस्थितियों में सीमाओं की सुरक्षा में डटे जवानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हम लोग ठंड से बचने के प्रयास करते हैं। ऐसे में हमें उन जवानों की ओर भी देखना चाहिए, जो सियाचिन और दूसरी ऊँची पर्वतीय चोटियों पर -10 से -45 डिग्री तापमान के बीच भी राष्ट्र की रक्षा में डटे हुए हैं।

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