गुजरात और केरल में HIGH ALERT : दक्षिण-पश्चिम भारत पर आतंकियों की नापाक नज़र

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 9 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। जब से भारत ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर प्रदेश का विशेष राज्य का दर्जा खत्म किया है, तब से ही पड़ोसी देश पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। हालाँकि भारतीय सेनाओं ने नापाक मंसूबों को विफल करने के लिये हर प्रकार की तैयारी पहले से कर रखी थी, इसलिये पड़ोसी देश में पले आतंकी जम्मू कश्मीर से घुसपैठ करने में कामयाब नहीं हो सके। इसलिये अब वे भारत में घुसपैठ करने के लिये नये-नये विकल्प तलाश रहे हैं। इसी बीच खुफिया एजेंसियों को गुप्त सूचना मिली कि आतंकियों ने गुजरात के समुद्री रास्ते से घुसपैठ की योजना बनाई है तो दूसरी तरफ यह जानकारी भी सामने आई थी कि श्रीलंका के रास्ते आतंकी दक्षिण भारत में घुसपैठ करने का प्रयास कर रहे हैं। अब यह आशंका इसलिये और बढ़ गई है कि गुजरात की कच्छ की खाड़ी में सर क्रीक क्षेत्र में कुछ संदिग्ध लावारिश नावें बरामद हुई हैं। इन नावों के मिलने के बाद गुप्तचर एजेंसियों के अलर्ट पर भारतीय सेना ने दक्षिण पश्चिमी राज्य विशेष कर गुजरात, महाराष्ट्र और केरल में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

गुजरात व केरल के सभी जिलों में HIGH ALERT

सेना की ओर से अलर्ट जारी होने के बाद गुजरात के मुख्य मंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और पूरे राज्य में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सरकार की ओर से सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं और सभी को पूरी सतर्कता बरतने के लिये कहा गया है।

केरल के पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहड़ा ने भी कहा है कि उन्होंने राज्य के सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को हाई अलर्ट जारी कर दिया है और उन्हें आतंकी हमले की आशंका के इनपुट भी भेज दिये हैं। उनसे विशेष कर भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने और सतर्कता बरतने के निर्देश दिये गये हैं।

उधर सेना की दक्षिण कमांड ने भी साउथ में आतंकी साजिश की आशंका को देखते हुए सोमवार शाम एक बड़ा अलर्ट जारीर किया है। सेना की दक्षिणी कमांड के जनरल ऑफीसर कमांडिंग (जीओसी-GOC) लेफ्टिनेंट जनरल एस. के. सैनी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि सेना की ओर से दक्षिण भारत के सभी राज्यों को अलर्ट भेजा गया है। नापाक साजिश की आशंका से निपटने के लिये सेना पूरी तरह से सतर्क है। सैनी के अनुसार कच्छ की खाड़ी में सर क्रीक इलाके के पास भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को कुछ संदिग्ध लावारिश नावें मिली हैं, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। गुप्तचर एजेंसियों की ओर से सेना को ऐसे इनपुट मिले हैं कि आतंकी दक्षिण-पश्चिमी राज्यों में हमला कर सकते हैं। ऐसे में आतंकियों की किसी भी साजिश को नाकाम करने के लिये सेना पूरी सतर्कता बरत रही है। सेना ने यह आशंका भी जताई है कि सर क्रीक इलाके में मिली नावों से आतंकी भारतीय इलाकों में घुसपैठ कर चुके हो सकते हैं। इसलिये सभी सम्बंधित राज्यों को भी अलर्ट कर दिया गया है।

जैश के अंडर वॉटर कमांडो की घुसपैठ की आई थी ख़बर

इससे पहले भारतीय गुप्तचर एजेंसियों को खबर मिली थी कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पानी के अंदर से आतंकी हमला करने के लिये कुछ कमांडो को तैयार किया है। इन कमांडो को दूर तक तैरने और पानी के अंदर से घुसपैठ करने के साथ-साथ पानी के अंदर से ही आतंकी हमला करने की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। गुप्तचर एजेंसियों को यह भी पता चला था कि ऐसे कुछ कमांडो कच्छ की खाड़ी में स्थित सर क्रिक क्षेत्र में हरामी नाला के रास्ते भारत में घुसपैठ कर सकते हैं। इसके बाद से ही गुजरात के समुद्री तट पर सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गईं थी और इन कमांडो की तलाश में जुट गई थी।

सर क्रीक और हरामी नाला क्या है ?

अब सवाल यह उठता है कि कच्छ की खाड़ी में सर क्रिक और हरामी नाला क्या हैं ? जिसे पाकिस्तानी आतंकी घुसपैठ का नया विकल्प बनाने की फिराक़ में हैं ? इसका जवाब यह है कि अरब सागर में स्थित कच्छ की खाड़ी में 96 किलोमीटर लंबा दलदली इलाका सर क्रीक कहलाता है और इसी इलाके में 22 किलोमीटर लंबा समुद्री क्षेत्र ‘हरामी नाला’ कहलाता है। चूँकि इस क्षेत्र में समुद्री पानी का स्तर घटता-बढ़ता रहता है, इसलिये यह हरामी नाला नामक इलाका तस्करों और घुसपैठियों के लिये आसान टारगेट बन जाता है। इन्हीं हरकतों की वजह से गुजराती प्रजा ने इस 22 कि.मी. लंबे इलाके को ‘हरामी नाला’ नाम दिया हुआ है।

क्यों सर क्रीक पर भारत-पाकिस्तान के बीच है विवाद ?

सर क्रीक इलाका पश्चिम में पाकिस्तान के सिंध प्रदेश की सीमा से जुड़ा है, जबकि पूर्व में भारत के गुजरात प्रदेश में स्थित कच्छ जिले से जुड़ा है। भारत और पाकिस्तान के बीच इसी सर क्रीक इलाके की सीमा का विवाद है, परंतु यह विवाद चर्चा में बहुत कम आता है। दरअसल, यह विवाद कच्छ के रेगिस्तान में स्थित 96 किलोमीटर लंबे मुहाने को लेकर है, जो गुजरात को पाकिस्तान के सिंध प्रांत से अलग करता है। अंग्रेज शासन के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी के सेनापति चार्ल्स नैपियर ने 1842 में सिंध प्रांत को जीतने के बाद उसका प्रशासनिक संचालन मुंबई राज्य को सौंप दिया था। इसके साथ ही अंग्रेज हुकूमत ने सिंध और मुंबई प्रांत के बीच सीमा रेखा भी खींची थी। यह रेखा कच्छ के बीच से गुजरती थी। इसमें पूरी खाड़ी सिंध प्रांत में दिखाई गई थी। अर्थात् कच्छ के मूल प्रदेश से इस खाड़ी को अलग करके सिंध में जोड़ दिया गया था। दूसरी तरफ दिल्ली स्थित अंग्रेज सरकार ने अपने अधिकृत नक्शे में सिंध और कच्छ के बीच की सीमा रेखा को कच्छ के रण तक खींचने के बाद खाड़ी प्रदेश के पास रोक दिया था। स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान ने खाड़ी प्रदेश पर हक जताया। इसके जवाब में भारत का प्रस्ताव था कि कच्छ के रेगिस्तान से लेकर खाड़ी के मुख तक की एक सीधी रेखा को सीमा रेखा मान लिया जाए, परंतु पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया। इस कारण सर क्रीक का लगभग 650 वर्ग किलोमीटर हिस्सा विवादित क्षेत्र बना हुआ है। इस क्षेत्र से पाकिस्तानी रेंजरों द्वारा भारतीय मछुआरों का अपहरण करके ले जाने की खबरें अक्सर आती रहती हैं।

गुजरात की ज़मीनी और समुद्री सीमा है संवेदनशील

2008 में जब मुंबई पर 26/11 का आत्मघाती आतंकी हमला हुआ था, तब भी लश्करे-तैयबा के आतंकी हरामी नाला के रास्ते ही गुजरात की समुद्री सीमा में घुसे थे और पोरबंदर के मछुआरों की हत्या करके उनकी कुबेर नामक बोट लेकर मुंबई गये थे। इसी कारण इस क्षेत्र को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।

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