VIDEO : देखिए राहुल का एक ग़ैरज़िम्मेदाराना बयान कैसे बन बया पाकिस्तान का हथियार ?

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* पाकिस्तान ने UN को लिखे पत्र में राहुल के बयान का दिया हवाला

* राहुल की अपरिपक्वता से फिर फँसी कांग्रेस कर रही खोखला बचाव

* ‘पाक परस्त’ बयानों की आंधी के बाद कांग्रेस अब दे रही मोदी का साथ

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 28 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। कांग्रेस के शीर्ष नेता और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी राजनीतिक अपरिपक्वता से कई बार न केवल पार्टी का नुकसान करते रहे हैं, अपितु देश से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी दलगत राजनीति करते हुए बिना-सोचे समझे बयान देकर ‘सरकार का विरोध’ और ‘राष्ट्र का विरोध’ के बीच की पतली भेदरेखा भूल जाते हैं। ऐसा ही कुछ राहुल गांधी ने गत 10 अगस्त, 2019 को किया था, जिससे देश की सरकार नहीं, अपितु देश की प्रतिष्ठा को धक्का पहुँचा है।

दरअसल जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के मोदी सरकार के फ़ैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की उठापटकों में मिली विफलता से बौखलाए पाकिस्तान ने अब एक नया शिगूफा छेड़ा है। यद्यपि भारत या मोदी सरकार पाकिस्तान के किसी भी प्रोपेगैंडा को हर मोर्चे पर विफल करने को तैयार और मुस्तैद हैं, परंतु पाकिस्तान ने जो नया शिगूफा छेड़ा है, उससे भारत की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक पार्टी कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी फँस गए हैं। पाकिस्तान ने कश्मीर पर चौतरफा मिली मात के बाद अब कश्मीरियों के साथ हिंसा को मुद्दा बनाते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में पाकिस्तान ने भारत के विरुद्ध आरोप लगाया है कि कश्मीर में हिंसा और मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है। पत्र में पाकिस्तान ने कहा कि कश्मीर में हालात सामान्य होने के भारत के दावे झूठे हैं। यह पत्र भारत के लिहाज़ से इतना महत्वपूर्ण और गंभीर न होता, यदि इस पत्र में राहुल गांधी के नाम का उल्लेख न होता। पाकिस्तान ने इस पत्र में राहुल गांधी के एक बयान का हवाला दिया है। पत्र में कहा गया है कि भारतीय नेता राहुल गांधी ने भी माना है, ‘कश्मीर में लोग मर रहे हैं और वहाँ हालात सामान्य नहीं हैं।’

कांग्रेस ने पाकिस्तानी दावे को झूठा बताया

राहुल गांधी 5 अगस्त से लगातार मोदी सरकार के विरुद्ध कश्मीर मुद्दे पर मोर्चा खोले बैठे थे, परंतु बुधवार सुबह अचानक उन्होंने 2 TWEET कर स्पष्ट किया कि कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा है और पाकिस्तान वहाँ हिंसा फैला रहा है। पहले तो राहुल के इस तरह के ट्वीट करने की बात समझ में नहीं आ रही थी, परंतु अब जबकि पाकिस्तान ने यूएन में राहुल के बयान को आधार बना कर भारत की शिकायत की, तो यह बात साफ हो गई है कि राहुल डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ जैसे ही यह पता चला कि पाकिस्तान ने राहुल के बयान को यूएन में भारत के विरुद्ध हथियार बनाया, कांग्रेस हरकत में आ गई। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आनन-फानन पर ट्विटर पर मोर्चा संभाला और ट्वीट किया, ‘पूरे विश्व में किसी को संदेह नहीं था, न है और न होना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का आंतरिक मामला है। भारत की शैतानी से यह सच नहीं बदलेगा। पाकिस्तान ने राहुल गांधी के नाम का ग़लत इस्तेमाल किया, ताकि वह अपने झूठ को सही ठहरा सके।’

कांग्रेस के दावे की पोल खोल रहा राहुल का बयान

कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर मोदी सरकार के साथ खड़े होने में कांग्रेस को 23 दिन लग गए। यदि कांग्रेस ने पहले से ही कश्मीर मुद्दे पर अनर्गल बयानबाजी कर रहे नेताओं पर लगाम कसी होती, तो कांग्रेस और भारत को आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। कांग्रेस आज यह दावा कर रही है कि पाकिस्तान ने राहुल के नाम का ग़लत इस्तेमाल किया है, परंतु हमारी पड़ताल में कांग्रेस के दावे के झूठ की पोल खुल गई, क्योंकि पाकिस्तान ने राहुल के जिस बयान को अपना हथियार बनाया है, वह बयान राहुल ने वास्तव में दिया था। गत 10 अगस्त को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक से बाहर राहुल गांधी ने यह बयान दिया था कि कश्मीर में लोग मर रहे हैं।

कांग्रेस ने कश्मीरी नेताओं से अलग स्टैण्ड क्यों नहीं लिया ?

पाकिस्तान ने अपने पत्र में जम्मू-कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला के बयानों का भी हवाला दिया है। पाकिस्तान ने पत्र में पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (PDP) नेता महबूबा और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) नेता उमर के हवाले से लिखा गया है कि इन नेताओं ने धारा 370 हटाने को कश्मीर के लिए काला दिन करार दिया है। दोनों नेताओं सहित करीब 2300 लोगों को कश्मीर में नज़बरबंद किया गया है।

यहाँ प्रश्न यह उठता है कि जिस कांग्रेस पार्टी ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया, जिस कांग्रेस पार्टी के नेताओं की राष्ट्र भक्ति पर संदेह नहीं किया जा सकता, उस पार्टी के वर्तमान शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, ग़ुलाम नबी आज़ाद, अधीर रंजन चौधरी आदि ने ऐसे बयान क्यों दिए, जो मोदी सरकार का विरोध करते-करते देश विरोधी और पाकिस्तान परस्त बन गए ? कांग्रेस पार्टी ने एक ज़िम्मेदार विपक्षी दल के रूप में कश्मीरी नेताओं से अलग स्टैण्ड क्यों नहीं लिया ? यदि कांग्रेस ने पहले से ही धारा 370 पर मोदी सरकार और देश तथा जनभावनाओं का साथ दिया होता, तो राहुल गांधी 10 अगस्त को एक बड़े ग़ैरज़िम्मेदाराना बयान देने से बच जाते और पाकिस्तान उस बयान को यूएन में भारत के विरुद्ध शस्त्र के रूप में उपयोग नहीं कर पाता, परंतु यह देश का दुर्भाग्य है कि कांग्रेस जैसी ऐतिहासिक पार्टी ने राष्ट्रीय मुद्दों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर सोचने की कोशिश करने में देर कर दी।

खट्टर का ‘उत्साह’ भी बना पाकिस्तान का हथियार

पाकिस्तानी मानवाधिकार मंत्री शिरीन मज़री ने कहा, ‘भारत के मुख्यधारा के राजनेताओं जैसे कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने स्वीकार किया था कि जम्मू-कश्मीर में लोग मर रहे हैं. वहां (कश्मीर) बहुत गलत हो रहा है।’ शिरीन मजारी ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बयान का भी जिक्र किया, जिसमें खट्टर ने कश्मीरी लड़कियों से शादी करने से जुड़ा बयान दिया था। पाकिस्तान का यह पत्र भारत के उन तमाम बड़े नेताओं और भारत में मुट्ठी भर कश्मीरी हितों की बात करने वाले पाकिस्तान परस्त शहला राशिद जैसे लोगों के लिए भी सबक है, जो सरकार का विरोध करते-करते राष्ट्र विरोधी बयान देने की चूक कर बैठते हैं।

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