बच्चे-बच्चे से लेकर संविधान विशेषज्ञ तक : पूरा देश मानता है कि कश्मीर की भारत से अभिन्नता के लिए ये धाराएँ हैं बाधाएँ, परंतु…

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जम्मू-कश्मीर से जुड़ी धारा 370 और 35ए के विरुद्ध अब देश का मूड तेजी से बदल रहा है। पूरे देश में इन दोनों धाराओं को संविधान से हटाने की मांग प्रबल हो रही है। लोगों की भावनाओं को समझते हुए ही लोकसभा चुनाव-2019 में भाजपा ने अपना जो घोषणा पत्र जारी किया है, उसमें इन दोनों धाराओं को खत्म करने का वादा भी किया गया है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज एन. संतोष हेगड़े की ओर से आया एक बड़ा बयान भी यही इंगित करता है कि अब वह समय आ गया है जब इन धाराओं को संविधान से हटा दिया जाये।

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर एन. संतोष हेगड़े का बयान उन राजनेताओं और राजनीतिक दलों के गाल पर करारा तमाचा है जो इन दोनों धाराओं की आड़ में कश्मीर की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं और इन धाराओं को खत्म करने का प्रयास किये जाने पर जम्मू-कश्मीर को भारत से आजाद करने की धमकी देते हैं। जम्मू-कश्मीर में पुराना समय वापस लाने की बात करते हैं और अलग प्रधानमंत्री का पद फिर से इजाद करने की बरगलाने वाली बातें करते हैं। हेगड़े का यह बयान कांग्रेस को भी करारा झटका है, जिसने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इन दोनों धाराओं को बरकरार रखने की बात तो कही, परंतु इन दोनों ही धाराओं को हटाने का विरोध करने वाले राजनीतिक दल नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) से चुनावी गठबंधन भी किया है।

आपको बता दें कि वर्ष 1948 में जब जम्मू-कश्मीर के राजा हरी सिंह ने भारत में विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किये थे तब उनकी प्रजा को पूर्ण स्वायत्तता का आश्वासन देने के लिये संविधान में धारा 370 को जोड़ा गया था। जबकि धारा 35ए यह सुनिश्चित करती है कि जम्मू-कश्मीर से बाहर का अर्थात् भारत के अन्य राज्य का कोई नागरिक जम्मू-कश्मीर में जमीन, मकान आदि सम्पत्ति नहीं खरीद सकता है। इस धारा के कारण सबसे अधिक परेशानी जम्मू-कश्मीर की महिलाओं को होती है, क्योंकि इस धारा के तहत उन्हें जम्मू-कश्मीर से बाहर अर्थात् भारत के किसी अन्य राज्य के नागरिक से विवाह करने का अधिकार नहीं है और यदि वह ऐसा करती हैं तो अपने माता-पिता की सम्पत्ति से बेदखल हो जाती हैं। इस धारा का एक जो भारतीय संविधान के विपरीत पहलू है वह सबसे ज्यादा पेचीदा है। इस धारा के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर की महिला पाकिस्तानी नागरिक से शादी करती है तो वह अपने माता-पिता की सम्पत्ति से बेदखल नहीं होती है।

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज एन. संतोष हेगड़े ने एक न्यूज एजेंसी को दिये साक्षात्कार में भी स्पष्ट कहा कि अब अनुच्छेद 35ए और 370 को खत्म कर देना चाहिये, क्योंकि यह धाराएं अन्य राज्यों के अधिकारों के विपरीत हैं। इन धाराओं से जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिलता है। इन धाराओं से उस काल के अनुसार वहां की प्रजा को आश्वासन देने के लिये इन धाराओं को भारतीय संविधान में शामिल किया गया था, परंतु इनके शब्द ऐसे लगते हैं, जैसे कि जिन पृष्ठभूमि में आश्वासन दिये गये हैं, वह स्थाई हैं। इसके बाद से देश में जो घटनाएं हुईं, वह दर्शाती हैं कि अब इन धाराओं को बरकरार रखना संभव नहीं है, क्योंकि यदि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तो इसे अन्य राज्यों से अलग दर्जा नहीं दिया जा सकता।

देश के पूर्व सॉलिसिटर जनरल एन. संतोष हेगड़े के अनुसार वर्तमान परिप्रेक्ष्य में दोनों ही धाराएं देश के लिये समस्या पैदा कर रही हैं, इसलिये इन धाराओं को अब जारी रखना संभव नहीं है और वर्तमान स्थिति में यह आवश्यक हो गया है कि इन दोनों धाराओं को खत्म कर दिया जाये। क्योंकि जम्मू-कश्मीर के लोगों की स्वायत्तता भी अन्य राज्यों के बराबर ही होनी चाहिये। कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त एन. संतोष हेगड़े ने कहा कि उनके मतानुसार जम्मू-कश्मीर को भारत से जुड़े 70 साल का लंबा समय बीत चुका है और इन अनुच्छेदों का जो उद्देश्य था वह पूरा हो चुका है। इसलिये अब यह नहीं कहा जा सकता है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग नहीं है। यह दोनों ही अनुच्छेद अब भारत और जम्मू-कश्मीर के लिये अप्रासंगिक हो गये हैं, इसलिये इनका अब संविधान में कोई स्थान नहीं रह गया है।

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