370 पर मोदी-शाह को बधाई, संत तुलसीदास को नमन और सुषमा को श्रद्धांजलि के बाद ख़ामोश हो गए जेटली !

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* जेटली ने मोदी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से 24 घण्टे पहले लिखा था पत्र

* मंत्री नहीं बनने के बावजूद 7 अगस्त तक सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे जेटली

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 24 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। प्रखर वक्ता, अर्थशास्त्री, भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली 26 मई, 2014 से 29 मई, 2019 तक वित्त मंत्री थे, परंतु उन्होंने भाजपा को दोबारा बहुमत मिलने से पहले ही अपने बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए स्पष्ट कर दिया था कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नए मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं होंगे।

नरेन्द्र मोदी ने 30 मई, 2019 को दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ मंत्रियों ने भी शपथ ली, परंतु उन मंत्रियों में अरुण जेटली नहीं थे। जेटली ने मोदी सरकार 2 के शपथ ग्रहण समारोह से चौबीस घण्टे पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र की प्रति जेटली ने ट्विटर पर भी पोस्ट की थी। जेटली ने पत्र पोस्ट करते हुए किए गए अपने ट्वीट में लिखा था, ‘आज मैंने आदरणीय प्रधानमंत्री को पत्र लिखा, जिसकी प्रति मैं यहाँ रिलीज़ कर रहा हूँ।’ इस पत्र में जेटली ने अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए मोदी से आग्रह किया था कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल न किया जाए।

अरुण जेटली मोदी सरकार 2 का हिस्सा नहीं थे, परंतु 30 मई, 2019 को मोदी सरकार के शपथ लेने के बाद से वे लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय थे। मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनते ही जेटली ने 30 मई, 2019 को ही ट्वीट कर उन्हें बधाई दी थी और आशा व्यक्त की थी कि मोदी के नेतृत्व में देश नई ऊँचाइयों की तरफ बढ़ेगा।

सरकार या मंत्रिमंडल से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े न होने के बावजूद अरुण जेटली समय-समय पर मोदी विरोधियों को निशाना बनाते थे। कभी वे फेसबुक पर लम्बे-लम्बे ब्लॉग लिख कर कांग्रेस की आलोचना करते थे, तो कभी ट्विटर पर ट्वीट कर मोदी सरकार की नीतियों का समर्थन करते थे, मोदी सरकार के कामकाज की प्रशंसा करते थे।

गुजरात और रूपाणी को नहीं भूले जेटली

अरुण जेटली वर्तमान में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य थे। 3 अप्रैल, 2018 को ही वे राज्यसभा के लिए चुने गए थे, परंतु इससे पूर्व जेटली गुजरात से 18 वर्षों तक राज्यसभा सदस्य रहे। गुजरात ने उन्हें 3 अप्रैल, 2000 को पहली बार राज्यसभा भेजा। इसके बाद वे लगातार तीन बार गुजरात से राज्यसभा सांसद चुने गए और 2 अप्रैल, 2018 तक गुजरात से ही राज्यसभा सदस्य रहे। यही कारण है कि जेटली न केवल गुजरात के मतदाता रहे, अपितु वे गुजरात को कभी नहीं भूले। इसका उदाहरण यह था कि जेटली ने गत 2 अगस्त को गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को उनके जन्म दिवस पर ट्वीट करके बधाई दी थी।

370 पर झूम उठे जेटली, किए थे 20 ट्वीट

अरुण जेटली छात्र काल से ही जनसंघ और एबीवीपी से जुड़े हुए थे। लिहाजा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 का हटना उनके लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण था, जितना कि भाजपा के अन्य नेताओं के लिए। जब 5 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के मोदी सरकार के निर्णय की घोषणा की, तो जेटली खुशी से झूम उठे और उन्होंने दो दिनों में धारा 370 पर ताबड़तोड़ 20 ट्वीट किए। उन्होंने 5 अगस्त को धारा 370 पर कुल 10 ट्वीट किए। 5 अगस्त के अंतिम ट्वीट में जेटली ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इतिहास रच दिया। जो स्पष्टता और समर्पण उन्होंने दिखाया, उसने आज सिद्ध कर दिया कि मोदी है तो मुमकिन है। पूरे राष्ट्र को बधाई।’

जेटली अगले दिन 6 अगस्त को भी ट्विटर पर धारा 370 हटने की खुशी ज़ाहिर करने से नहीं चूके। उन्होंने 6 अगस्त को भी 10 ट्वीट किए, जिसमें जहाँ एक तरफ मोदी-शाह पर प्रशंसा के फूल बरसाए, वहीं कांग्रेस की बखिया उधेड़ डाली। इसमें एक ट्वीट में जेटली ने लिखा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने नई कश्मीर नीति के जरिए असंभव को संभव कर दिखाया। आज मैंने अपने ब्लॉग में इस निर्णय के प्रभावों और अतीत में कश्मीर समस्या सुलझाने में मिली विफलताओं का विश्लेषण किया है।’

तुलसीदास को नमन और सुषमा को अंतिम श्रद्धांजलि

अरुण जेटली ने 7 अगस्त को 2 ट्वीट किए थे। जेटली ने 7 अगस्त को ही सुबह 10.33 बजे किए गए अपने पहले ट्वीट में महान संत तुलसीदास को नमन किया था। 7 अगस्त को तुलसीदास जयंती थी।

अरुण जेटली ने सोचा नहीं होगा कि इसके बाद वह जो ट्वीट करेंगे, वह उनके जीवन का अंतिम ट्वीट बन जाएगा। दरअसल भाजपा की दिग्गज नेता और जेटली के साथ वर्षों तक काम करने वालीं सुषमा स्वराज का 7 अगस्त को निधन हो गया। जेटली ने स्वराज के निधन पर दोपहर 12.11 बजे उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट किया था, ‘सुषमाजी का असामयिक निधन पीड़ादायक और अपूरणीय क्षति है। वर्तमान युग में वे मोस्ट आउटस्टैण्डिंग राजनेता थीं। उन्होंने हर पद पर उत्कृष्ट काम किया। उन्होंने पार्टी, एनडीए सरकार और विपक्ष में रह कर वरिष्ठ पदों पर काम किया। उनके निधन से हुई क्षति को भरा नहीं जा सकता।’

और सदा के लिए ख़ामोश हो गए जेटली

7 अगस्त, 2019 को दोपहर 12.11 बजे सुषमा स्वराज को ट्विटर पर श्रद्धांजलि देने के बाद जेटली ने कोई ट्वीट नहीं किया। 9 अगस्त को अचानक उन्हें साँस लेने में तकलीफ हुई। उन्हें तत्काल दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIMS) में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की बड़ी टीम ने जेटली को बचाने के लिए काफी प्रयास किए, परंतु 15 दिनों के बाद अंतत: जेटली ने आज दम तोड़ दिया। इसके साथ ही जेटली सदा के लिए ख़ामोश हो गए।

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