मिशन शक्ति : नासा की आपत्ति में ईर्ष्या की दुर्गंध ! इसरो ने अहमदाबाद से नासा पर किया पलटवार, ‘निश्चिंत रहिए, हमारा मलबा नुकसान नहीं पहुँचाएगा’

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भारत की ओर से मिशन शक्ति के अंतर्गत एंटी सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण (A-SAT) करने के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एयरोनॉटिक्स एण्ड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) की तो जैसे नींद ही उड़ गई है। भारत के मिशन शक्ति को लेकर नासा दुनिया में ऐसा दुष्प्रचार कर रहा है कि भारत के इस परीक्षण से अंतरिक्ष की कक्षा में मलबे के लगभग 400 टुकड़े बिखर गये हैं, इन टुकड़ों के कारण अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के लिये खतरा पैदा हो गया है। मलबे के टुकड़े तेजी से ऊंचाई पर जा रहे हैं, जिससे भविष्य में मानव को अंतरिक्ष में भेजना मुश्किल हो जाएगा। भारतीय परीक्षण से इन टुकड़ों के अंतरिक्ष स्टेशन से टकराने की संभावना 44 प्रतिशत तक बढ़ गई है। नासा के अनुसार वह ऐसे 23,000 टारगेट पर नजर बनाये हुए है। जिनका आकार दस सेंटीमीटर से अधिक है। इनमें 10000 टुकड़े अंतरिक्ष मलबे के भी हैं। इनमें से 3000 टुकड़े चीन की ओर से 2007 में किये गये ऐसे ही प्रयोग के कारण फैले हैं।

हालांकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष के वरिष्ठ सलाहकार तपन मिश्रा ने नासा के इस बयान को विश्व में फैलाये जा रहे दुष्प्रचार की संज्ञा दी है। अहमदाबाद में तपन मिश्रा ने एक कार्यक्रम में कहा कि अमेरिका, रूस और चीन के साथ-साथ अब भारत के भी एंटी सैटेलाइट क्लब में शामिल हो जाने से नासा को भारत की यह अप्रत्याशित कामयाबी हजम नहीं हो रही है। इसलिये वह भारत के खिलाफ इस प्रकार का दुष्प्रचार कर रही है। जबकि वास्तविकता तो यह है कि अमेरिका, रूस और चीन की ओर से पूर्व में किये जा चुके प्रयोगों के कारण कहीं ज्यादा मलबा अंतरिक्ष में फैल चुका है, जिसे नासा भारत के सिर मढ़ना चाहती है।

तपन मिश्रा अहमदाबाद में स्पेस एप्लीकेशन सेन्टर (SAC) के पूर्व निदेशक भी हैं। इसरो वैज्ञानिक तपन मिश्रा गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (GNLU) में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर छात्रों से बात कर रहे थे। नासा की चेतावनी के बारे में एक छात्र द्वारा पूछे गये सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारतीय मलबा अगले डेढ़ से छह महीने के भीतर साफ हो जाएगा। ए-सैट परीक्षण के बाद 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर जो मलबा एकत्र हुआ है वह बिना ऊर्जा और गति के कारण आखिरकार नीचे गिरेगा और पृथ्वी के वातावरण में आते ही जलकर नष्ट हो जाएगा। मिश्रा ने कहा कि दुनिया को यह मालूम होना चाहिये कि चीन की ओर से 2007 में 800 किलोमीटर ऊंचाई पर किये गये परीक्षणों से लगभग 3000 टुकड़ों का मलबा अभी तक अंतरिक्ष की कक्षा में मौजूद है।
तपन मिश्रा ने कहा कि अंतरिक्ष में मलबा सैटेलाइट आदि की लॉन्चिंग से भी इकट्ठा होता है, जिसमें अमेरिका और चीन सबसे आगे हैं।

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