सिल्चर : केमिस्ट्री से करिश्मा, अब ज्योग्राफी से फ्यूचर सँवारेंगे डॉ. राजदीप रॉय

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* पहली बार लोकसभा पहुँचे डॉ. राजदीप रॉय से yuapress.com की EXCLUSIVE बातचीत

* महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुष्मिता का अंकगणित बिगाड़ कर जीतने वाले रॉय बदलेंगे सिल्चर का कल्चर

* मोदी सरकार ने 5 वर्षों में बहुत कुछ किया और 5 वर्षों में बहुत कुछ किया जाएगा सिल्चर के लिए

विशेष बातचीत : कन्हैया कोष्टी (सम्पादक, yuvapress.com)

अहमदाबाद, 31 मई, 2019। लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रचंड विजय हासिल की, जिसमें असम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भाजपा को असम की 14 में से 9 सीटों पर जीत मिली है, परंतु असम में जायंट किलर के रूप में उभरे हैं डॉ. राजदीप रॉय। इसलिए, क्योंकि रॉय ने सिल्चर लोकसभा सीट से महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव को हराया है।

वर्षों तक सुष्मिता के पिता और दिग्गज कांग्रेस नेता संतोष देव का गढ़ रही सिल्चर सीट पर लोकसभा चुनाव 2014 में सुुष्मिता ने पहली बार चुनाव लड़ा था और मोदी लहर के बावजूद वे भाजपा से यह सीट छीनने में सफल रही थीं, परंतु लोकसभा चुनाव 2019 में मोदी सुनामी और रॉय के रुआब के आगे सुष्मिता के पाँव उखड़ गए। यहाँ तक कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा तक सुष्मिता का सहारा न बन सके। राजदीप ने कड़ी मेहनत करते हुए सिल्चर के लोगों के साथ अपनी केमिस्ट्री बैठाई और करिश्मा कर दिखाया और सुष्मिता के अंकगणित को फेल कर दिया। अब राजदीप सिल्चर की ज्योग्राफी बदल कर फ्यूचर सँवारने का काम करने वाले हैं।

चुनावों में भव्य जीत के बाद ही भाजपा के सभी सांसदों की तरह राजदीप रॉय भी पिछले दिनों भाजपा और एनडीए संसदीय दल की बैठक और शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए असम से दिल्ली पहुँचे। इसी दौरान युवाप्रेस.कॉम ने डॉ. राजदीप रॉय से सिल्चर, असम और समग्र पूर्वोत्तर के लिए मोदी सरकार और एक सांसद के रूप में उनके प्लान तथा योजनाओं के बारे में बातचीत की। इस बातचीत में डॉ. राजदीप रॉय ने मोदी सरकार की ओर से पिछले पाँच वर्षों में किए गए कार्यों और आने वाले पाँच वर्षों के दौरान किए जाने वाले कार्यों का पूरा खाका बताया।

डॉ. राजदीप रॉय ने कहा, ‘लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिये उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में दो प्रकार की स्ट्रेटजी पर काम किया। एक तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाँच वर्ष के दौरान देश की जनता के हित में जो काम किये, उनके आधार पर जनता से वोट माँगे और यह हमारे लिये पॉजिटिव सिद्ध हुआ, क्योंकि बराक वैली में कांग्रेस के कार्यकाल में दो चार काम नहीं हुए थे। 18 साल से एक काम ब्लॉक होके पड़ा था, ब्रोडग्रेज कंवर्जन का प्रोजेक्ट था। डिब्रूगढ़ से बराक वैली में प्रवेश करने वाला ब्रोडगेज़ कंन्वर्जन प्रोजेक्ट था जो 1996 से शुरू हुआ था, परंतु 2014 तक इस प्रोजेक्ट में कोई काम नहीं हुआ टनल वगैरह हो गया था, ट्रेक का प्रोब्लेम चल रहा था। लुंब्डिंग से डिब्रूगढ़ यानी बराक वैली में प्रवेश के लिये ब्रोडगेज रेलवे लाइन बिछाने के लिये देवेगौड़ा के समय में शिलान्यास हुआ था। इसके आधार पर 2014 के इलेक्शन में पीएम मोदी सिल्चर गये थे, तब उन्होंने कहा था कि आप हमें वोट दीजिये, एक साल के भीतर हम ट्रेन को बराक वैली में लेकर आएँगे। तब से करीब चार-पाँच साल पहले सिविल कंस्ट्रक्शन के लिये सिल्चर से गोहाटी कोई ट्रेन नहीं जाती थी। ऑल्टरनेटिवली वहाँ पर एक ट्रांसपोर्ट लॉबी है, वो ट्रांसपोर्ट लॉबी ओवरटाइम काम करती थी, मतलब वह लॉबी ट्रेन को लाने के पक्ष में नहीं थी। उनका धंधा चल रहा था उनको नुकसान हो जाता। उसी के कारण यह सब मतलब जन मन में बहुत आक्रोश था। हमने सिल्चर को राजधानी से मिला दिया। अब अगरतला से राजधानी दिल्ली ट्रेन सप्ताह में दो बार जाती है। और आने वाले दिनों में इम्फाल से राजधानी आनेवाली ट्रेन बराक वैली होकर आएगी। आइजॉल से राजधानी दिल्ली जाने वाली ट्रेन भी बराक वैली होकर जाएगी। बराक वैली में तीन जिले हैं कछार, करीमगंज और हलाकांडी। तीनों जिलों में तीन स्टेशन हैं अलग-अलग। सिल्चर बराक वैली का सबसे बड़ा शहर है। जो नॉर्थ-ईस्ट का दो नंबर का शहर है गोहाटी के बाद। सिल्चर का इंफ्रास्ट्रक्चर, ह्यूमन रिसोर्स है, पॉप्युलेशन है वह नॉर्थ ईस्ट के जो सारे कैपिटल हैं, इम्फाल, शिलोंग, ईटानगर, अगरतला और कोहिमा सातों स्टेट कैपिटल से सिल्चर काफी बड़ा है। सिल्चर में सेंट्रल यूनिवर्सिटी है। मेडिकल कॉलेज है। एनआईटी है। पढ़ाई के लिये बहुत अच्छा है। नहीं, यह सारी सुविधाएं पहले से थी। 40 साल से हैं। इसके बावजूद जितना डेवलपमेंट होना चाहिये था, उतना नहीं हुआ। इसके कारण सिल्चर में बेरोजगारी की बहुत समस्या है। इस वजह से यहाँ पढ़ाई करने के बाद यहाँ के लड़के देश भर में फैले हुए हैं। उनके बूढ़े मां-बाप सिल्चर में रहते हैं। बराक वैली में रहते हैं। पढ़ाई करके लड़के-लड़कियों को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता आदि जगहों पर जाना पड़ता है। पहली बात यह है कि ट्रेन आने का श्रेय मोदी को गया। इस बार के इलेक्शन में इसका हमें सबसे बड़ा फायदा मिला और हमें लोगों के वोट मिले। मोदी ने उन्हें 3 साल में ट्रेन दी, जिसका प्रोजेक्ट पिछले 18 साल से लटका हुआ था और यह डिमांड तो लगभग 50 साल से हो रही थी।’

उन्होंने कहा, ‘एक और जो हमें फायदा हुआ कि सिल्चर से गोहाटी शिलोंग जाने का रास्ता, अगरतला जाने का रास्ता इंफाल और आइजॉल चारों पड़ोसी स्टेट कैपिटल जाने का रास्ता फोरलेन हो गया, जो मोदी के आने के बाद हुआ। नितिन गड़करी ने और एक काम किया है। हमारे यहाँ जो नदी है, यहाँ दो बडी नदी हैं, एक तो ब्रह्मपुत्र और दूसरी बराक नदी, बराक वैली बराक नदी के नाम पर ही पड़ा है। बराक नदी को नेशनल वॉटरवेस्ट प्रोजेक्ट नंबर 16 घोषित किया है। आने वाले दिनों में बराक नदी में छोटे-बड़े कोट होंगे। इसलिये हम मानते हैं कि पीएम मोदी के फेवर में पॉजीटिव वोटिंग हुई है। दूसरा जो मुद्दा है कि सुस्मिता देव का जो पाँच साल का कार्यकाल था उसमें वे नेशनल पॉलिटिक्स में बिजी रहीं। जिसके कारण सिल्चर की जो जनता है सिल्चर में सात विधानसभा क्षेत्र हैं उनके जो लोग थे या पार्टी वर्कर्स थे उनके साथ उनका कोई कनेक्शन नहीं था। इन क्षेत्रों में वह दो-तीन बार जाने के बाद गई नहीं। और सबसे बडा जो मुद्दा है कि इनका जो सांसद फंड था, लगभग 25 करोड़ का उसमें से लगभग 7.39 करोड़ रुपये वापस चला गया, जिसका कोई उपयोग नहीं हो पाया। तो मेरा चुनाव प्रचार अभियान इन दो मुद्दों पर ही केन्द्रित रहा। एक तो मोदी ने जो काम किया है। और तीसरी बात यह है कि हमारे स्टेट की जो सरकार है, सर्वानंद सोनवाल की सरकार जो 2016 में आई।’

रॉय ने कहा, ‘हमारे यहां की जो पॉलिटिक्स है वह दो नदियों पर बेज्ड है। ब्रह्मपुत्र नदी के आसपास असमी लोग ज्यादा रहते हैं, बंगाली भी हैं, सिंधी हैं, मगर कम हैं। और बराक नदी के आसपास एक भी असमी नहीं मिलता है। वहां सारे के सारे बंगाली हैं। उनकी आधिकारिक भाषा भी बंगाली है। वहां का सारा आधिकारिक काम बंगाली भाषा में ही होता है। मतलब एक स्टेट में दो भाषाएँ हैं। भारत का जब विभाजन हुआ, उस समय बंगाली डोमिनेटेड एरिया को इंडिया में रखा, और पुराना सिलेट वाला एरिया है, आज का जो बांग्लादेश है, वह भी इंडिया में रहना चाहिये था। अगर ऐसा होता तो आज के समय में भी असम का जो मुख्यमंत्री होता वह बंगाली होता। हमारा जो ऑरिजिनल डिस्ट्रिक्ट है, उसे काटकर साढ़े तीन थाना और कछार एरिया को इंडिया में ले आए और सिलेट जो एक्च्युअली बड़ा एरिया है वह बांग्लादेश में चला गया।’

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