जिस मिशन से कभी नहीं लौटी भारत की बेटी ‘कल्पना चावला’

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Kalpana Chawla

नई दिल्ली। भारत के केवल तीन शख्स अब तक अंतरिक्ष में कदम रख पाए हैं। दशकों पहले रूस की मदद से राकेश शर्मा अंतरिक्ष पहुंचे थे। सेटेलाइट कम्युनिकेशन के जरिए तत्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब पूछा कि भारत कैसा दिखता है तो उन्होंने कहा था कि “सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा”। बाकी दोनों अंतरिक्ष यात्री भारत की बेटियां हैं। एक कल्पना चावला (kalpana chawla) और दूसरी सुनीता विलियम्स।

1 फरवरी 2003 को हुआ था हादसा

आज से 15 साल पहले 1 फरवरी 2003 को अंतरिक्ष के इतिहास का मनहूस दिन माना जाता है। उस दिन Kalpana Chawla अपने 6 साथियों के साथ अंतरिक्ष से धरती पर लौट रही थीं। पूरी दुनिया बेसब्री से इस पल का इंतजार कर रही थी। धरती से महज 16 मिनट की दूरी पर अचानक से विमान का संपर्क NASA से टूट गया। जब तक कुछ पता चलता कि क्या हुआ है विमान का मलबा टेक्सास शहर में 160 किलोमीटर के एरिया में फैल गया। इस हादसे में सभी 7 अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई।

धरती से 2 लाख फीट की ऊंचाई पर हुआ हादसा

NASA का अंतरिक्ष यान कोलंबिया शटल STS-107 धरती से करीब 2 लाख फीट की ऊंचाई पर था। जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त विमान की स्पीड करीब 20 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा थी। अगर यह विमान केवल 16 मिनट के लिए किसी तरह बचा रह जाता तो सभी 7 अंतरिक्ष यात्री टेक्सास में लैंड कर चुके होते लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

19 नवंबर 1997 को पहली बार अंतरिक्ष के लिए गईं कल्पना चावला

मार्च 1995 में पहली बार Kalpana Chawla को अंतरिक्ष जाने के लिए चुना गया। वह अंतरिक्ष मिशन 19 नवंबर 1997 को शुरू हुआ। स्पेस शटल कोलंबिया STS-87 धरती से 1.04 करोड़ मील की दूरी तय करते हुए अंतरिक्ष पहुंचा। Kalpana Chawla समेत 7 अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए इस दौरान शटल ने धरती के 252 चक्कर लगाए।

दूसरे मिशन में अंतरिक्ष में गुजारे 16 दिन

2000 में Kalpana Chawla दूसरी बार अंतरिक्ष मिशन के लिए चुनी गईं। तकनीकि गड़बड़ियों की वजह से मिशन की शुरुआत में देरी हुई। आखिरकार 16 जनवरी 2003 को कल्पना चावला अपने 6 साथियों के साथ कोलंबिया STS-107 से अंतरिक्ष की दूसरी उड़ान भरी। दूसरे मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष में 16 दिन गुजारे। 3 फरवरी 2003 को सभी अंतरिक्ष यात्री वहां से धरती के लिए यात्रा शुरू की लेकिन यह यात्रा पूरी नहीं हो पाई। इस टीम के कमांडर रिक हसबैंड थे। इसके अलावा इजरायली वैज्ञानिक आइलन रैमन, विलियम मैकोल, लॉरेल क्लार्क, डेविड ब्राउन और माइकल एंडरसन शामिल थे।

इस हादसे को लेकर कहा गया कि धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते ही शटल की उष्मारोधी परतें फट गई और विमान के भीतर का तापमान बढ़ने की वजह से सभी अंतरिक्ष यात्री हादसे का शिकार हुए।

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