अटल का आर्तनाद : ‘एक दिन पूरे भारत में हमारी सरकार होगी और देश कांग्रेस पर हँस रहा होगा…’

Written by

22 वर्ष पूर्व 1 VOTE से सरकार गिरने पर तार-तार हुई अटलजी की आत्मा को अब मिली होगी तृप्ति

आज भाजपा का एनडीए के साथ देश के 36 में से 30 राज्यों तक बोलबाला, 1 से 64 सीटों पर कब्जा

अटलजी पर हँसने का पाप करने वाली कांग्रेस पार्टी को 14 राज्यों में 0 सीट

21 राज्यों में सीटों को दहाई अंक पर नहीं ले जा सकी ऐतिहासिक कांग्रेस पार्टी

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 25 मई, 2019। ‘‘आज हमारी सरकार मात्र 1 वोट से गिर गई है। हमारे कम सदस्य होने पर कांग्रेस हम पर हँस रही है, लेकिन मेरी बात कांग्रेस कतई न भूले। एक दिन ऐसा आएगा, जब पूरे भारत में हमारी सरकार होगी और पूरा देश कांग्रेस पर हँस रहा होगा।’’

यह अटल का आर्तनाद था। आज से ठीक 22 वर्ष 1 महीना और 8 दिन पहले यानी 17 अप्रैल, 1997 को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का उत्तर देते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जो कहा था, वह आज शत प्रतिशत सत्य हो गया है।

https://twitter.com/Deshmera_/status/1132189706697863168?s=20

आज पूरे देश पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) छायी हुई है। देश की जनता ने अटल के आर्तनाद को काफी हद तक 2014 में ही सत्य सिद्ध कर दिया था, जब कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई थी। उसके बाद से लेकर आज तक देश के 17 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग-NDA) की सरकारें हैं और अब लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा के भीष्म और संस्थापक अटल बिहारी वाजपेयी की 22 साल पहले तार-तार हुई आत्मा को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पूर्णत: तृप्त कर दिया है, क्योंकि भाजपा ने न केवल इस चुनाव में 2014 से अधिक बड़ी सफलता हासिल की है, अपितु 17 अप्रैल, 1997 को सदन में भाजपा-एनडीए और वाजपेयी पर हँसने वाले कांग्रेस सहित तमाम भाजपा-एनडीए विरोधियों की चौतरफा जगहँसाई हो रही है।

मोदी सरकार की स्वीकार्यता बढ़ी, कमलयुक्त हुए 30 राज्य

लोकसभा चुनाव 2019 में न केवल भाजपा-एनडीए को 2014 के मुकाबले अधिक सीटें और मत प्राप्त हुए, अपितु पाँच वर्ष से कार्यरत् मोदी सरकार की स्वीकार्यता का दायरा भी बढ़ा। लोकसभा चुनाव 2019 में देश के 36 में से 27 राज्यों में भाजपा ने सीधी और धारदार उपस्थिति के साथ कमल खिलाया, वहीं 3 राज्यों में एनडीए उम्मीदवारों को जिता कर जनता ने मोदी सरकार पर मुहर लगाई। आइए नज़र डालते हैं कि भाजपा और एनडीए को किन-किन राज्यों में कितनी सीटें मिलीं ?

अरुणाचल प्रदेश (2) – दोनों सीटों पर भाजपा की जीत।

असम (14) – भाजपा ने 9 सीटें जीतीं, जबकि एनडीए में शामिल असम गण परिषद् (अगप-AGP) को कोई सीट नहीं मिली।

बिहार (40) – भाजपा ने 17 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी जेडीयू को 16, एलजेपी को 6 सीटें देकर जनता ने मोदी पर मुहर लगाई।

चंदीगढ़ (1) – भाजपा ने एकमात्र सीट पर कब्जा किया।

छत्तीसगढ़ (11) – भाजपा ने 9 सीटें जीतीं।

दीव-दमण (1) – एकमात्र सीट भाजपा के खाते में आई।

गोवा (2) – भाजपा ने 1 सीट जीत कर उपस्थिति दर्ज कराई।

गुजरात (26) – भाजपा ने 2014 की तरह क्लीन स्विप करते हुए सभी 26 सीटें जीतीं।

हरियाणा (10) – भाजपा ने सभी 10 सीटों पर कब्जा किया।

हिमाचल प्रदेश (4) – सभी चार सीटों पर भाजपा की जीत।

जम्मू-कश्मीर (6) – मोदी सरकार की कश्मीर नीति को जम्मू का मिला समर्थन और भाजपा ने 3 सीटें जीतीं।

झारखंड (14) – भाजपा ने 11 तथा सहयोगी ऑल झारखंड छात्र संघ दल (आजसू) ने 1 सीट जीती।

कर्नाटक (28) – भाजपा ने 25 सीटों पर धमाकेदार जीत हासिल की।

केरल (20) – कोई मजबूत अस्तित्व न होने के बावजूद भाजपा ने 1 सीट के साथ राज्य में कमल खिलाया।

मध्य प्रदेश (29) – भाजपा ने 28 सीटें जीतीं।

महाराष्ट्र (48) – भाजपा ने 23 और सहयोगी शिवसेना ने 18 सीटों पर कब्जा किया।

मणिपुर (2) – भाजपा ने 1 और सहयोगी एनपीएफ ने 1 सीट जीती।

मेघालय (2) – भाजपा का खाता न खुल सका, परंतु सहयोगी एनपीपी ने मोदी सरकार को 1 सीट की भेंट दी।

मिज़ोरम (1) – भाजपा का खाता न खुल सका, परंतु सहयोगी एमएनएफ ने मोदी सरकार को 1 सीट की भेंट दी।

नगालैण्ड (1) – भाजपा की सहयोगी एनडीपी ने एकमात्र सीट जीत कर मोदी सरकार को भेंट दी।

दिल्ली (7) – भाजपा ने 2014 की तरह सभी 7 सीटों पर कब्जा किया।

ओडिशा (21) – भाजपा ने 2014 के मुकाबले अभूतपूर्व बड़ी सफलता हासिल करते हुए 8 सीटें जीतीं और राज्य विधानसभा में 25 सीटें जीत कर मुख्य विपक्षी दल बनी।

पंजाब (13) – भाजपा ने 2 और सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने 2 सीटें जीतीं।

राजस्थान (25) – भाजपा ने 24 और सहयोगी आरएलपी ने 1 सीट जीती।

तमिलनाडु (38) – भाजपा खाता न खोल सकी, परंतु सहयोगी एआईएडीएमके ने जयललिता की अनुपस्थिति के चलते राज्य में सत्ता विरोधी लहर के बीच 1 सीट जीती।

तेलंगाना (17) – भाजपा ने अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए 4 सीटें जीतीं।

त्रिपुरा (2) – दोनों सीटों पर भाजपा ने कब्जा किया।

उत्तर प्रदेश (80) – भाजपा ने तमाम महागठबंधनों और बड़े चेहरों को परास्त करते हुए अकेले 62 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी अपना दल को मोदी के नाम पर 2 सीटें मिलीं।

उत्तराखंड (5) – सभी पाँचों सीटों पर भाजपा का कब्जा।

पश्चिम बंगाल (42) – भाजपा ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 18 सीटें जीतीं और सत्तारूढ़ टीएमसी तथा ममता बैनर्जी की चूलें हिला दीं।

14 राज्यों में शून्य पर सिमटी कांग्रेस, केरल ने रखी लाज

अटलजी की सरकार के 1 वोट से गिरने पर हँसने का पाप करने वाली कांग्रेस को 2014 की 44 के मुकाबले भले 2019 में 52 सीटें मिली हों, परंतु यदि केरल की 15 सीटें हटा दें, तो कांग्रेस की कुल सीटें 37 ही रह जाएँगी। इस चुनाव में कांग्रेस 14 राज्यों में खाता तक नहीं खोल सकी। इनमें दादरा नगर हवेली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लक्षद्वीप, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैण्ड, दिल्ली, सिक्किम, राजस्थान, त्रिपुरा और उत्तराखंड शामिल हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि कांग्रेस ने 22 राज्यों में उपस्थिति तो दर्ज कराई, परंतु केरल के अलावा 21 राज्यों में दहाई के अंक को नहीं छू सकी। इन 21 राज्यों में पंजाब में कांग्रेस को सर्वाधिक 8 सीटें हासिल हुईं। शेष 20 राज्यों में 1 से लेकर 5 सीटों के बीच सिमट गई।

Article Categories:
News

Leave a Reply

Shares