क्या CJI रंजन गोगोई ‘चमत्कार’ करके ही रिटायर होना चाहते हैं ?

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विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 26 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। क्या चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई कोई ‘चमत्कार’ करके सेवा निवृत्त होना चाहते हैं या कहें कि क्या वह नया इतिहास रच कर जाना चाहते हैं ? यह सवाल इसलिये उठ रहा है, क्योंकि वे 17 नवंबर-2019 को सेवा निवृत्त हो रहे हैं और सेवा निवृत्त होने से पहले गुरुवार को उन्होंने एक बड़ी बात कही। अभी देश के सर्वोच्च न्यायालय में देश के सबसे पुराने (लगभग 491 वर्ष पुराने) ऐतिहासिक मुकदमे की डे टू डे सुनवाई हो रही है। अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर शीर्ष अदालत में पिछले 32 दिनों से लगातार सुनवाई हो रही है। गुरुवार को सुनवाई का 32वाँ दिन है। इसी सुनवाई के दौरान सीजेआई गोगोई ने कहा कि इस मुकदमे की दलीलें 18 अक्टूबर तक पूरी कर लेनी चाहिये। अन्यथा फैसला टल सकता है। उनके कहने का निहितार्थ समझा जाये तो उनके कहने का तात्पर्य यह है कि उनके सेवा निवृत्त होने से पहले इस मामले का निपटारा हो जाना चाहिये। यदि ऐसा हुआ तो इस मामले को निपटाने वाले सीजेआई के रूप में उनका नाम इतिहास में दर्ज हो जाएगा। यद्यपि उनके कथनानुसार यदि 18 अक्टूबर तक मुकदमे की दलीलें पूरी हो जाती हैं, तो यह एक चमत्कार ही होगा। क्योंकि ऐसा होना असंभव सा लगता है और विशेष कर वकीलों के लिये ऐसा करना बड़ी चुनौती होगी।

क्या सीजेआई कर पाएँगे चमत्कार ?

चीफ जस्टिस गोगोई ने यह भी कहा कि यदि अदालत 4 सप्ताह में फैसला दे पाई, तो ये एक चमत्कार होगा, हालाँकि यह चमत्कार करना आसान नहीं होगा, क्योंकि यह चमत्कार करने के लिये वकीलों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि उन्हें कम से कम समय में अपनी बात या दलीलें अदालत के सामने रखनी होंगी। कम समय में दलीलें रखने के लिये उन्हें अच्छे से अच्छे तर्क रखने होंगे और वह भी इस तरह रखने होंगे कि कम शब्दों में अपना पक्ष पूरी तरह से अदालत को समझाया जा सके। ऐसा करना वकीलों के लिये किसी चुनौती से कम नहीं होगा। अभी अदालत में हिंदू-मुस्लिम पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें दी हैं, परंतु अभी इनका जवाब देना बाकी है, जो कि अक्सर दलीलों के बाद दिया जाता है। हालाँकि इसमें वकीलों के लिये एक विकल्प यह भी मौजूद है कि यदि वे नियमित समय में अपनी दलील पूरी नहीं कर पाते हैं तो वे अपना पक्ष लिखित रूप में अदालत के समक्ष सबमिट करवा सकते हैं।

चीफ जस्टिस के अनुसार चार सप्ताह में फैसला लिखना चमत्कार होगा, तो यह बात भी सही है। क्योंकि इस फैसले को लिखने के लिये समय की जरूरत है, चूँकि यह मामला काफी पुराना है और अक्सर देखा जाता है कि अदालती फैसले लिखित रूप में काफी बड़े होते हैं। उनमें तर्क, कहानियाँ, उदाहरण, पक्ष, विपक्ष सब कुछ शामिल होता है। ऐसे में नियमित समय में फैसला लिखना चमत्कार ही होगा।

जरूरी भी है चमत्कार करना!

बात केवल इतनी नहीं है कि, सीजेआई गोगोई चमत्कार करके या इतिहास रच कर रिटायर होना चाहते हैं। यह चमत्कार करना इसलिये भी जरूरी है, क्योंकि उनकी दूसरी दलील में भी दम है। उनका कहना है कि यदि 4 सप्ताह में फैसला नहीं दिया जा सका, तो फिर यह मामला टल सकता है। यह दलील भी सही है, क्योंकि उनके रिटायरमेंट के बाद नये चीफ जस्टिस चार्ज लेंगे। वो इस मामले से बिल्कुल अनभिज्ञ होंगे, चूँकि यह मामला बहुत संवेदनशील है, इसलिये वे अपनी अगुआई में नई संविधान पीठ का गठन करेंगे और मामले की फिर से सुनवाई शुरू करेंगे। ऐसे में फैसला लिखे जाने में काफी समय लग सकता है और फैसला टल सकता है। पहले ही सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लगभग 6 दशकों से चल रहा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जल्द से जल्द ‘चमत्कार हो’ यानी कि इस मामले का फैसला आये।

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