क्या राम लला के ‘तंबूवास’ की समाप्ति का COUNTDOWN आरंभ हो गया ?

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* अयोध्या में दीपावली से पहले ही मनाई जाएगी दीपावली ?

* क्या है उच्चतम् न्यायालय के नए निर्णय के निहितार्थ ?

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 2 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। 100 करोड़ हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक भगवान राम का अपने जन्म स्थल अयोध्या में 1992 से चल रहा 38 वर्ष का तंबूवास क्या अब समाप्त होने जा रहा है ? भगवान राम के तंबूवास की समाप्ति की उल्टी गिनती शुरू हो गई है ? क्या वर्ष 2019 ही अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण की करोड़ों हिन्दुओं की परिकल्पना को साकार करने वाला वर्ष सिद्ध होगा ?

इन सभी प्रश्नों के उत्तर भारत के उच्चतम् न्यायालय (SC) के आज के निर्णय में छिपे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर बनवाने के पक्षधर लोगों की यह मांग मान ली है कि अयोध्या राम जन्म भूमि विवाद पर प्रतिदिन सुनवाई की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने निर्णय में स्पष्ट कर दिया कि 6 अगस्त से अयोध्या मामले पर प्रतिदिन सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पाँच माह पहले अयोध्या मामले में एक मध्यस्थता पैनल का गठन किया था, जिसमें एससी के पूर्व जज कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू शामिल थी। इस पैनल ने 1155 दिनों की कोशिश के बाद अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आगामी 6 अगस्त से अयोध्या केस की रोजाना सुनवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि अयोध्या केस की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के पाँच जजों की संविधान पीठ कर रही है। इनमें मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई, न्यायाधीश एस. ए. बोबडे, डी. वाय. चंद्रचूड, अशोक भूषण और एस. अब्दुल नज़ीर शामिल हैं। शुक्रवार को जब मध्यस्थता पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हिन्दू और मुस्लिम पक्ष इस विवाद का समाधान अदालत से बाहर निकालने में सफल नहीं रहे, तब सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि अब 6 अगस्त से अयोध्या मामले की प्रतिदिन सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से कहा कि वह अनुवाद सहित सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार कर ले, जिससे दैनिक सुनवाई में कोई बाधा न आए।

अयोध्या में मनाई जाएगी भव्य दीपावली ?

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से यह तो स्पष्ट हो गया है कि अयोध्या केस पर अब शीघ्र ही कोई निर्णय आएगा। यद्यपि अब भी यह कोई नहीं बता सकता कि निर्णय कब आएगा, परंतु एक बात से अनुमान लगाया जा सकता है कि अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय 17 नवम्बर, 2019 से पहले आ सकता है, क्योंकि यही वह दिन है, जब सीजेआई रंजन गोगोई सेवानिवृत्त हो जाएँगे। माना जाता है कि सीजेआई सेवानिवृत्ति से पहले इस केस का निपटारा करना चाहेंगे। इस वर्ष दीपावली 27 अक्टूबर रविवार को है। ऐसे में यदि दीपावली से पहले अयोध्या केस पर हिन्दुओं के पक्ष में फ़ैसला आता है, तो अयोध्या में इस बार भगवान राम के तंबूवास के पूर्ण होने पर भव्य दीपावली मनना निश्चित है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला हिन्दुओं के पक्ष में आने की संभावना इसलिए भी अधिक है, क्योंकि इलाहाबाद हाई कोर्ट (ALLAHABAD HIGH COURT) पुरातत्व विभाग के प्रमाणों को आधार बना कर पहले ही यह मान चुका है कि जहाँ 6 दिसम्बर, 1992 से पहले बाबरी मस्जिद का ढांचा था, वहाँ कभी भगवान राम का मंदिर था। इसीलिए 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अयोध्या मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस एस यू खान और जस्टिस डी वी शर्मा की बेंच ने फैसले में 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बाँटने का फ़ैसला सुनाया था, जिसमें जहाँ राम लला विराजमान हैं, वह हिस्सा हिंदू महासभा को देने, दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़े को और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का आदेश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट का तेज रुख जगाता है आशा

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या केस की दैनिक सुनवाई को लेकर जो कार्यक्रम निर्धारित किया है, उससे लगता है कि एससी इस केस को जल्द से जल्द निपटाना चाहता है। वैसे रोजाना सुनवाई को लेकर लोगों के मन में भ्रम पैदा हो गया है कि सोमवार से शुक्रवार तक सुनवाई होगी, परंतु ऐसा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ अयोध्या केस की सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को ही सुनवाई करेगी। शेष दिनों में वह अन्य मामले देखेगी। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब तक दलीलें पूरी न हो जाएँ, तब तक सप्ताह में तीन दिन सुनवाई जारी रहेगी। मुस्लिम पक्षों की ओर से सुनवाई में देरी के प्रयास किए गए, परंतु सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे ख़ारिज कर दिया, जिसके बाद उनके वकील राजीव धवन ने कहा कि वे मुस्लिम पक्षकारों का पक्ष रखने के लिए 20 दिन का समय लेंगे। तेज सुनवाई से स्पष्ट है कि अयोध्या केस पर 100 दिनों के भीतर फैसला आने की उम्मीद है और काफी हद तक संभावना यह है कि सीजेआई रंजन गोगाई की सेवानिवृत्ति तारीख 17 नवम्बर से पहले ही कोई फ़ैसला आ जाए।

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