आज तय होगी अयोध्या विवाद की सुनवाई की तारीखः सुप्रीम कोर्ट

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Ayodhya Ram Mandir vivaad

नई दिल्लीः अयोध्या में चल रहे राम मंदिर की विवाद (Ayodhya Ram Mandir vivaad) को लेकर आज फिर एक बार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। Supreme Court इस विवाद पर लगातार सुनवाई की तिथि तय कर सकती है। उधर, News Agency ने बताया कि इस केस के Parties का कहना है कि अब Supreme Court से ही उम्मीद है, कि इस मामले को और नहीं टाला जाना चाहिए तथा जल्द से जल्द निर्णय कर देनी चाहिए। हांलांकि इस मामले कि सुनवाई पिछली बार 1 February को हुई थी। तब वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और गीता सहित 20 Religious पुस्तकों से इस्तेमाल किए तथ्यों का अंग्रेजी में Translation न होने की वजह से सुनवाई की तिथि को आगे बढाना पडा था।

सुनवाई के दौरान पिटीशनर के वकील ने कहा था कि अयोध्या विवाद लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। जिस पर Chief Justice ने कहा था कि ऐसी दलीलें मुझे पसंद नहीं, यह सिर्फ भूमि विवाद (Ayodhya Ram Mandir vivaad) है। हालांकि दोनों पक्षों ने न्यूज मीडिया को बताया है कि अनुवाद के दस्तावेज के लेन देन का काम पूरा हो चुका है, और इसकी सुनवाई दोपहर दो बजे शुरु होगी।

Sunni Central Waqf Board के लिए किताबों का अनुवाद

गोरतलब यह है कि इससे पिछली सुनवाई में Sunni Central Waqf Board ने उन किताबों का अनुवाद मांग लिया था। जिनके अंश हिन्दू पक्ष अपनी दलीलों के दौरान पढ़ेगा। इस मांग के चलते चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर की बेंच ने सुनवाई टाल दी थी।

इस परिस्थिति में आशंका की जा रही है कि आज की सुनवाई में या तो बहस की प्रतीकात्मक शुरुआत होगी या नियमित सुनवाई की तिथि तय होगी। इस मामले को सुन रहे चीफ जस्टिस श्री दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को सेवा निवृत्त हो जाएंगे। इस परिस्थिति में Supreme Court अगर लगातार सुनवाई शुरू करता है तो मामले का निर्णय सितंबर के आखिर तक आने का उम्मीद है।

अयोध्या राम मंदिर विवाद (Ayodhya Ram Mandir vivaad) से जुड़ी धार्मिक भावना

दरअसल अयोध्या मामले (Ayodhya Ram Mandir vivaad)) से जुड़ी Religious भावनाओं की ओर नजर रखते हुए Supreme Court ने कहा था कि ये मामला एक जमीनी विवाद है, हम इसे उसी तरह से देखेंगे। इस टिप्पणी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने सारे पक्षों के वकीलों को ये मेसेज दिया था, कि वो Supreme Court में तथ्यों के आधार पर पूछ ताछ करें। अयोध्या का यह मामला 7 सालों से लंबित है।

बहरहाल 30 सितंबर 2010 को इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया था, कि विवादित जगह पर मस्जिद से पहले हिन्दू मंदिर होने की कही थी। मगर जमीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाडा तथा सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बांटने का आदेश दे दिया था। फिल्हाल इस मामले की सुनवाई आज Supreme Court में दोपहर दो बजे से शुरु होगी।

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