मिलिए कलियुग के दानवीर कर्ण से : दान किये 52,750 करोड़ रुपये

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 9 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। दान और त्याग ही जीवन के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। माता के गर्भ दान करने से मनुष्य सहित सभी जीवों का जन्म होता है और शरीर के त्याग के साथ जीवन का अंत होता है। सभी धर्मों में दान और त्याग की महिमा का वर्णन मिलता है। सनातन संस्कृति में सत्यवादी राजा हरिशचंद्र के दान, दैत्यराज बलि और द्वापर युग में अंगराज कर्ण के नाम महान दानवीरों में लिये जाते हैं। कलियुग में भी बड़े-बड़े दानवीर हुए हैं। भारत के उज्जवल इतिहास में भामाशाह जैसे दानवीरों का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। जहाँ तक आधुनिक दानवीरों का सवाल है तो इस श्रेणी में भी अनेक दानवीरों के नाम गिनाये जा सकते हैं, जिन्होंने रक्तदान से लेकर चक्षुदान, गुर्दा दान, शरीर दान से लेकर जीवन दान तक दिये हैं, परंतु हम उस दानवीर की बात कर रहे हैं, जिनकी गिनती देश के सबसे धनी व्यक्तियों में होती है और जिन्होंने अब सबसे बड़ी संपत्ति दान की श्रेणी में अपना नाम सम्मिलित कर दिया है। यह कलियुग के महान दानवीर हैं मुंबई में गुजराती मुस्लिम परिवार में जन्मे धनकुबेर अज़ीम प्रेमजी। उन्होंने परोपकारी कार्यों के लिये अपनी 52,750 करोड़ रुपये की संपत्ति दान करने की घोषणा की है।

देश के दूसरे नंबर के धनकुबेर हैं अज़ीम प्रेमजी

अज़ीम हासिम प्रेमजी विप्रो कंपनी के अध्यक्ष हैं। वे भारत के जाने-माने बिज़नेस टायकून हैं और कई साल तक लगातार वे देश के नंबर वन बिज़नेसमैन की पॉज़ीशन पर भी रहे हैं। अभी वे नंबर दो के पायदान पर हैं। बहुत कम लोग ही जानते हैं कि उनकी पहचान भी एक दानवीर की है। इसके लिये उनके द्वारा अज़ीम प्रेमजी फाउण्डेशन चलाया जाता है, जो परोपकारी काम करता है। इस फाउण्डेशन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उन्होंने अपनी कंपनी विप्रो लिमिटेड के 34 प्रतिशत शेयर सामाजिक कार्यों के लिये दान करने की घोषणा की है। इन शेयर्स की कीमत लगभग 52,750 करोड़ रुपये है। इसी के साथ अज़ीम प्रेमजी द्वारा किये जाने वाले सामाजिक कार्यों की कुल अक्षय निधि बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गई है। इसमें विप्रो लिमिटेड की 67 प्रतिशत आर्थिक भागीदारी भी शामिल है। फाउण्डेशन के बयान के अनुसार उनके शेयर्स से होने वाले सारे लाभ को परोपकारी गतिविधियों में उपयोग किया जाएगा। ये 34 प्रतिशत शेयर्स अन्य संस्थाओं के हैं, जिन पर अज़ीम प्रेमजी का नियंत्रण है। अज़ीम प्रेमजी ने विप्रो के 67 प्रतिशत शेयर से होने वाली आय को चैरिटेबल फाउण्डेशन को दान करने की प्रतिबद्धता दर्शाई है। विप्रो कंपनी में प्रेमजी के परिवार व अन्य कंपनियों की हिस्सेदारी 74.30 प्रतिशत है।

कॉर्पोरेट रॉबिनहुड कहलाते हैं प्रेमजी

अज़ीम प्रेमजी की इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया में उनकी खूब प्रशंसा हो रही है। लोगों ने उन्हें कॉर्पोरेट रॉबिनहुड की उपाधि भी दी है। हालाँकि यह पहली बार नहीं है, जब अज़ीम प्रेमजी ने बड़ी राशि दान करने की घोषणा की है। उनके फाउण्डेशन की ओर से समय-समय पर जरूरतमंदों की मदद की जाती है। उनके फाउण्डेशन की ओर से एक यूनिवर्सिटी का संचालन भी किया जाता है। वे देश के पिछड़े इलाकों में शिक्षा के प्रसार का काम करने के लिये जाने जाते हैं। यह फाउण्डेशन कई राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी काम करता है। अभी अज़ीम प्रेमजी फाउण्डेशन की ओर से कर्नाटक, उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पुड्डुचेरी, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और उत्तर-पूर्वी इलाकों में शैक्षिक कार्य संचालित किये जाते हैं।

परोपकारी अरबपतियों की घटी संख्या

परोपकारी अरबपति लोगों की सूची जारी करने वाली एक एजेंसी बेन एंड कंपनी द्वारा पिछले सप्ताह एक रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें बताया गया है कि पिछले 5 वर्ष में प्रेमजी को छोड़ कर 10 करोड़ रुपये से अधिक पैसे दान करने वालों की संख्या में 4 प्रतिशत की गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार इस बीच 35 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति रखने वालों की संख्या में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

लग्ज़री होटल की जगह कंपनी गेस्ट हाउस में ठहरते हैं प्रेमजी

ज्ञात हो कि भारत के सबसे बड़े दानवीर अज़ीम प्रेमजी के बारे में कई दिलचस्प बातें भी प्रचलित हैं। वे अत्यंत शालीन स्वभाव के हैं और अक्सर फ्लाइट की इकॉनॉमी क्लास में ही यात्रा करते हैं। इतना ही नहीं, वे लग्ज़री फाइव स्टार होटलों में भी नहीं ठहरते हैं। उनकी जगह कंपनी के साधारण गेस्ट हाउस में ठहरना पसंद करते हैं। वे 1999 से लेकर 2005 तक देश के लगातार सबसे बड़े धनकुबेर रह चुके हैं। वे अनौपचारिक रूप से भारतीय आईटी उद्योग के बादशाह कहलाते हैं। 2010 में उन्हें एशिया वीक की ओर से दुनिया के 20 सबसे शक्तिशाली पुरुषों में चुना गया था। उन्हें दो बार टाइम मैगज़ीन की ओर से 100 सबसे अधिक प्रभावशाली लोगों में भी सूचीबद्ध किया गया है। एक बार 2004 में और दूसरी बार 2011 में। वे वर्तमान में नवंबर 2017 तक 19.5 अरब अमेरिकी डॉलर के अनुमानित शुद्ध मूल्य के साथ देश के दूसरे सबसे धनी व्यक्ति हैं। वे 2013 में दी गिविंग प्लेज पर हस्ताक्षर करके अपनी संपत्ति का कम से कम आधा हिस्सा देने पर सहमत हुए। प्रेमजी ने अपना फाउण्डेशन 2.2 बिलियन डॉलर दान के साथ शुरू किया था, जो देश में शिक्षा पर केन्द्रित है।

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