अयोध्या विवादः आखिर लोग क्या चाहते हैं ?

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Babri Masjid

25 साल पहले आज ही के दिन अयोध्या में बाबरी विध्वंस की घटना घटी थी। इतना समय बीत जाने के बावजूद आज तक बाबरी मस्जिद विवाद वहीं का वहीं है। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में है। बाबरी मस्जिद विवाद पर दोनों ही पक्ष अपनी अपनी दलील दे रहे हैं, लेकिन देश के लोग खासकर अयोध्या के लोग इस विवाद पर क्या सोचते हैं, इस पर कोई बात नहीं करता ? बता दें कि राम जन्मभूमि विवाद के कारण अयोध्या की छवि को काफी नुकसान हुआ है, लेकिन ये बात शायद कम ही लोग जानते होंगे कि अयोध्या पारंपरिक रुप से सांप्रदायिक सौहार्द की धरती है।

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पूरी दुनिया की नजरें जहां अयोध्या विवाद पर लगी हैं, वहीं अयोध्या के लोग इस पूरे विवाद से दुखी नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विवाद राजनैतिक पार्टियों का बनाया हुआ है, जिसे राजनैतिक फायदे के लिए लगातार उछाला जा रहा है। जबकि हकीकत में अयोध्या के स्थानीय लोगों के साथ ही देश की बड़ी आबादी अब इस विवाद का हल चाहती है, चाहे वो किसी भी रुप में हो।

अयोध्या में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की पुरानी परंपरा रही है, यहां के लोग एक दूसरे के धार्मिक, सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। बता दें कि विवादित ढांचे पर विराजमान रामलला की मूर्तियों के कपड़े एक मुस्लिम दर्जी द्वारा सिले जाते रहे हैं। वहीं हिंदू समुदाय, मस्जिदों के निर्माण में अपना सहयोग देता रहा है। लोगों का कहना है कि 1992 में दंगा-फसाद बाहरी लोगों द्वारा किया गया था, उसमें स्थानीय लोगों की कोई भूमिका नहीं थी। अयोध्या के मुस्लिमों का कहना है कि “बाबरी मस्जिद का तोड़ा जाना गलत था, लेकिन विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण को लेकर उन्हें कोई परेशानी नहीं है। उन्हें तो बस मस्जिद के निर्माण के लिए थोड़ी सी जगह की जरुरत है।”

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कब क्या हुआ

  • कुछ हिंदूवादी नेताओं का कहना है कि अयोध्या विवाद की शुरुआत 1528 में हुई, जब कथित तौर पर मुगल शासक बाबर ने मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण कराया।
  • कहा जाता है कि साल 1853 में पहली बार अयोध्या में सांप्रदायिक हिंसा हुई।
  • साल 1859 में ब्रिटिश सरकार ने विवादित जगह पर दीवार बनाकर हिंदू और मुसलमानों के पूजा स्थलों को अलग-अलग कर दिया।
  • साल 1949 में कुछ हिंदूवादियों द्वारा विवादित स्थल पर भगवान राम की मूर्ति स्थापित कर दी गई। जिसके बाद मामला कोर्ट में पहुंच गया।
  • साल 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने के लिए एक कमेटी का गठन किया।
  • 1986 में मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया। वहीं 1989 में विश्व हिंदू परिषद ने मस्जिद के नजदीक की जमीन पर मंदिर की नींव रख दी।

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  • 6 दिसंबर 1992 को विहिप, शिवसेना और भाजपा नेताओं की अगुवाई में सैंकड़ों लोगों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद ढांचे को गिरा दिया।
  • जनवरी 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने शत्रुघ्न सिंह को विशेष प्रतिनिधि नियुक्त कर हिंदू-मुस्लिमों से बात करने की जिम्मेदारी सौंपी।
  • मार्च 2002 में गुजरात के गोधरा में अयोध्या से लौट रहे कारसेवकों को ट्रेन की बोगी में जलाकर मार डाला गया। इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क गए, जिसमें हजारों लोग मारे गए।
  • साल 2003 में हुए पुरातत्विक विभाग के सर्वे में विवादित स्थल पर मंदिर के होने के प्रमाण मिले।
  • जुलाई 2005 में अयोध्या में विवादित स्थल के पास आतंकी हमला हुआ। इस हमले में 5 लोग मारे गए।

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  • 17 साल के लंबे अंतराल के बाद साल 2009 में लिब्रहान कमीशन ने बाबरी मस्जिद गिराए की घटना पर रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में भाजपा को जिम्मेदार ठहराया गया।
  • सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल का एक तिहाई हिस्सा हिंदुओं, एक तिहाई हिस्सा मुसलमानों और एक तिहाई हिस्सा निर्मोही अखाड़े को देने का आदेश दिया। वहीं कोर्ट ने मुख्य विवादित हिस्सा हिंदुओं को देने की बात कही।
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसके बाद साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को निलंबित कर दिया। फिलहाल इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
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