अपनी लाड़ली की तसवीर SOCIAL MEDIA पर SHARE करने से पहले एक बार यह खबर जरूर पढ़ें, कोई माता-पिता भूल से भी नहीं करे ऐसी भूल

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आज-कल सोशल मीडिया का जमाना है। यह एक ऐसा मीडिया है, जो लोगों की मदद तो करता है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट कितने खराब हो सकते हैं, यह आप आगे वर्णित होने वाली सत्य घटना से जान जाएँगे और आपके रौंगटे खड़े हो जाएँगे। इस सोशल मीडिया ने लोगों को इस कदर दीवाना और बेवकूफ भी बना दिया है कि लोग अपनी पर्सनल लाइफ भी सोशल मीडिया में शेयर करने से बाज़ नहीं आते, लेकिन जब नतीजा खराब आता है, तो दोष सरकार और पुलिस को देने लगते हैं।

हम जिस सत्य घटना का वर्णन करने जा रहे हैं, उसे पढ़ने के बाद हर बेटी का पिता
Facebook, Whatsapp, Instagram, Linkdin जैसे सोशल मीडिया पर अपनी बेटी की तसवीर शेयर कभी नहीं करेगा। यह खबर सोशल मीडिया पर निरंतर सक्रिय रहने वाले लोगों के लिए चेतावनी समान है।

हालाँकि सोशल मीडिया का यह भी एक सकारात्मक पहलू ही है कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग को दर्शाने वाली यह सत्य घटना भी सोशल मीडिया में ही वायरल हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस सत्य घटना में एक व्यक्ति एक पुलिस अधिकारी के हवाले से जानकारी दे रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई रौंगटे खड़े कर देने वाली यह सत्य घटना निम्नानुसार है, आप खुद ही पढ़िए और सोचिए :

‘‘मैं स्कूल में पैरेंट मीटिंग में गया था, वहां पर एक पुलिस अधिकारी भी आये थे। सभा भरी हुई थी। पुलिस अधिकारी ने पूछा कि आप में से कितने लोग फेसबुक का उपयोग करते हैं? लगभग सभी ने कहा कि वे हम उपयोग करते हैं। तब उन्होंने एक अभिभावक की और इशारा करते हुए पूछा कि आप के कितने फेसबुक फ्रेंड हैं? तब उस आदमी ने सीना ठोक कर कहा कि उसके पांच हजार फ्रेंड्स हैं। बाकी सभी लोग आश्चर्य से उसकी और देखने लगे। पुलिस ने उससे अगला प्रश्न किया कि आप उनमें से कितने लोगों को प्रत्यक्ष पहचानते हैं या उनसे मिले हैं? अब वह थोड़ा सकपकाया और बोला कि ज्यादा से ज्यादा 100-200 को। तब पुलिस अधिकारी ने कहा कि इतने सारे facebook friends हैं ओर परिचय 100-200 से ही है ? पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हमारे निरंतर निरीक्षण में यह पाया गया है कि हर पांच व्यक्तियों के पीछे एक criminal mind (आपराधिक दिमाग) होता है। आज के समय में घरवालों पर भी विश्वास करना कठिन हो गया है और हम बगैर सोचे-समझें किसी की भी friends request आसानी से accept कर लेते हैं। हमारे पुलिस स्टेशन में एक केस आया, जिसमे एक तीन साल की लड़की ग़ुम हो गई थी। बहुत जाँच-पड़ताल की गई. तब पता चला कि उस लड़की का स्कूल का पहला दिन था। उस लड़की के पिता ने बिटिया को बढ़िया से तैयार कर एक फोटो निकाला और fb पर पोस्ट कर लिखा…”MY cute baby to first day of school.” चार दिन वह लड़की स्कूल गयी और पाँचवे दिन वह स्कूल से वापस नही आई। जांच में पता चला कि एक आदमी fb का फोटो लेकर स्कूल में आया था और उसने कहा कि वह लड़की का चाचा है। घर पर प्रोब्लम हो गई है इसलिए वह उसे लेने आया हूँ। ऐसा बोल कर वह बच्ची को स्कूल से ले गया। सघन जाँच करने पर पता चला कि वह लड़की 24 घंटे के अंदर भारत के बाहर भेज दी गई। कारण यह क्रिमिनल लोग ऐसे होते हैं कि फोटो डाला कि यह अपनी फ़ास्ट चेन के द्वारा उसके डाक्यूमेंट तैयार करके रख लेते हैं और दिन तय कर घटना को अंजाम देते हैं और उठाकर ले जाते हैं। उसके बाद न कोई फोन, न कोई पैसो की डिमांड। अब बताओ इसमें गलती किसकी ? अपनी एक गलती का उस पिता को कितना दुःख हुआ होगा ? हम क्यों अपेक्षा करते है कि हमारी फोटो पर या बातों पर हमें likes मिलें और बाहर का कोई व्यक्ति हमारी प्रशंसा करे, वह भी अँगूठा बता कर या दो चार कमैंट्स के लिये। हमारे घर में हमारे प्रशंसकों की कमी है क्या ? क्यों हम अपने परिवार के लोगों की सुरक्षा से खेल रहे हैं ? जवाबदार हम हैं। हमारी आदतें पसंद-नापसंद इतने निचले स्तर पर पहुंच गई हैं कि अब उस पर नियंत्रण करना कठिन हो गया है। Facebook, whatsapp, insta पर की selfi, हम इधर जा रहे हैं उधर जा रहे हैं। यहां पहुंचे वहा पहुंचे। वह भी proper टाइम बताकर डालना यानी चोर-लुटरों को खुली दावत देने जैसा है। सावधान हो जाइए, स्वयं को संभालो बस। यही कहना है।’’

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