99 करोड़ 90 लाख हिन्दुओं की ‘आत्मा’ झकझोर रहा एक सामान्य कैब ड्राइवर : VIDEO

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आलेख : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 15 जून, 2019। दिन भर सड़क पर कैब चला कर दो जून की रोज़ी-रोटी कमाने वाले एक सामान्य भारतीय से आप क्या आशा-अपेक्षा-आकांक्षा रख सकते हैं ? क्या एक निर्धन कैब ड्राइवर हमारे महान वैदिक, प्राचीन और आधुनिक भारत को कोई दिशा दिखा सकता है ? क्या हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि विविधताओं और सैकड़ों भाषाओं-बोलियों से अटे भारत को जिस भाषा के माध्यम से एकसूत्र में पिरोने का सपना भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर यानी बाबासाहब अंबेडकर ने संजोया था, उसे पूरा करने का महान उत्तरदायित्व कोई सड़क चलता कैब ड्राइवर उठा सकता है ?

आपको भी लग रहा होगा कि वैदिक भारत से लेकर वर्तमान भारत की हजारों वर्षों की पौराणिक-ऐतिहासिक यात्रा में कई महापुरुषों ने जन्म लिया और उन्होंने कई ऐसे कार्य किए, जो भारत के निर्माण की नींव में छोटे से लेकर बड़े पत्थर के रूप में काम आए, परंतु एक कैब ड्राइवर भला ऐसा क्या कर सकता है कि कोई उसे महापुरुष की संज्ञा दे सके ?

आपके प्रश्न का उत्तर दिए देते हैं। यह कैब ड्राइवर वैसे तो मामूली कैब ड्राइवर है, परंतु उसकी विशेषता यह है कि वह अपनी बोली के ज़रिए भारत सहित पूरे विश्व में बसने वाले लगभग 108 करोड़ हिन्दुओं में से 99 करोड़ 90 लाख हिन्दुओं की आत्मा को झकझोरने का काम रहा है। इस कैब ड्राइवर का नाम है मल्लपम्, जो भारत के दक्षिणी राज्य कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में सड़क कैब चलाता है। धर्म से हिन्दू मल्लपम् की विशेषता यह है कि वह केवल संस्कृत भाषा में ही बात करता है। मल्लपम् की विशेषता के साथ यह महानता और साहसिकता भी है कि वह उस दक्षिण भारत में संस्कृत भाषा में बात करता है, जहाँ भाषा को लेकर प्रांतीय अस्मिता का ज़ुनून है। दक्षिण भारत में हर राज्य के लोग बोली के रूप में प्राथमिकता अपने राज्य की भाषा यानी मातृभाषा को देते हैं। उसके बाद अंग्रेजी और उसके बाद हिन्दी। संस्कृत भाषा तो इन राज्यों के लोगों की सूची में ही नहीं है।

मल्लपम् के बारे में आगे और बताने से पहले यह जान लेना आवश्यक है कि संस्कृत देववाणी है। पौराणिक-प्राचीन भारत में सभी श्रुतियों, सभी ग्रंथों की भाषा संस्कृत है, तो जैन और बौद्ध धर्म के ग्रंथ भी इसी भाषा में रचे गए हैं। कुल मिला कर एक समय संस्कृत सनातन धर्म की भाषा थी। वह सनातन धर्म, जिसका न कोई आदि है और न ही कोई अंत है। आज इस सनातन धर्म को हिन्दू धर्म के रूप में जाना जाता है, तो इस हिसाब से हिन्दुओं की मूल भाषा संस्कृत है, परंतु आपको जान कर आश्चर्य होगा कि वर्तमान विश्व में केवल भारत और नेपाल में ही संस्कृत भाषी हैं और उनकी संख्या भी केवल 10 लाख 4 हजार 935 है।

अनादिकालीन भाषा और भारत की आत्मा समान संस्कृत जहाँ एक ओर विलुप्तता की ओर अग्रसर है, वहीं मल्लपम् भारत सहित पूरे विश्व में रहने वाले 108 करोड़ हिन्दुओं में से 99 करोड़ 90 लाख हिन्दुओं की आत्मा को झकझोर रहे हैं कि हमारी संस्कृत को बचा लीजिए और संस्कृति को भी बचा लीजिए। मल्लपम् का संस्कृत भाषा में बात करने वाला वीडियो भी सोशल मीडिया पर जम कर वायरल हो रहा है।

आइए आप भी सुनिए कैब ड्राइवर मल्लपम् का पैसेंजर से संस्कृत में बात करता VIDEO :

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