अरुण जेटली का निधन, भाजपा ने 18 दिनों के भीतर खोया दूसरा दिग्गज नेता

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 24 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया, वह 67 वर्ष के थे। अरुण जेटली ने दोपहर 12.07 बजे अंतिम साँस ली। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और गत 9 अगस्त को साँस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सायंस (एम्स-AIIMS) में भर्ती कराया गया था, जहाँ अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने आज सुबह ही अस्पताल पहुँचकर डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य के बारे में पृच्छा की थी। एक महीने के भीतर ही भाजपा के दो दिग्गज नेताओं के निधन से भाजपा में शोक की लहर है। इससे पहले गत 6 अगस्त को पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दिल का दौरा पड़ने से इसी अस्पताल में आकस्मिक निधन हो गया था। एम्स की ओर से प्रेस रिलीज़ जारी करके जेटली के निधन की घोषणा की गई।

अरुण जेटली का राजनीतिक सफर…

अरुण जेटली लगभग चार दशक से भी अधिक समय से राजनीति में सक्रिय थे। जेटली ने स्वास्थ्य कारणों से 2019 में नवगठित नरेन्द्र मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार कर दिया था। 28 दिसंबर-1952 को नई दिल्ली में जन्मे जेटली भाजपा के प्रमुख नेता और पेशे से वकील थे। उनके पिता का नाम किशन जेटली और माता का नाम रतन प्रभा जेटली था। उनके पिता भी वकील थे। नई दिल्ली के सेंट जेवियर्स स्कूल से 1957 से 69 के दौरान शिक्षा प्राप्त की और 1973 में श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स नई दिल्ली से कॉमर्स में स्नातक किया। उन्होंने 1977 में दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय में विधि की डिग्री प्राप्त की और छात्र के रूप में करियर के दौरान अकादमिक तथा पाठ्यक्रम के अतिरिक्त गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके विभिन्न सम्मान प्राप्त किये थे। वह 1974 में दिल्ली विश्व विद्यालय के छात्र संगठन के अध्यक्ष भी रहे। अरुण जेटली ने 24 मई 1982 को संगीता जेटली से शादी की, जिनसे दो संतानें पुत्र रोहन और पुत्री सोनाली हैं। अरुण जेटली 1991 से भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। वह 1999 के लोकसभा चुनाव से पहले की अवधि के दौरान भाजपा के प्रवक्ता बने। 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार सत्ता में आने के बाद उन्हें पहली बार 13 अक्टूबर-1999 को सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था। उन्हें विनिवेश राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भी नियुक्त किया गया था। उन्होंने 23 जुलाई-2000 को कानून, न्याय और कंपनी मामलों के केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में राम जेठमलानी के इस्तीफे के बाद इस मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सँभाला था। नवंबर-2000 में उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नत किया गया था और उन्हें कानून, न्याय तथा कंपनी मामलों के साथ-साथ जहाजरानी मंत्री बनाया गया था। भूतल परिवहन मंत्रालय के विभाजन के बाद वह नौवहन मंत्री बने। उन्होंने 1 जुलाई-2001 से केन्द्रीय मंत्री, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री के रूप में 1 जुलाई-2002 को नौवहन के कार्यालय को भाजपा तथा उसके राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में शामिल किया। उन्होंने जनवरी-2003 तक इस क्षमता में काम किया। 29 जनवरी-2003 को केन्द्रीय मंत्रिमंडल को वाणिज्य तथा उद्योग और कानून व न्याय मंत्री के रूप में फिर से चुना गया। 13 मई 2004 में भाजपा सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार सत्ता से बाहर हो गई तो उन्होंने भाजपा के महासचिव के रूप में सेवाएँ दी और वकील के पेशे को जारी रखा। 3 जून-2009 को एल. के. आडवाणी ने उन्हें राज्यसभा में विपक्ष का नेता बनाया। 16 जून 2009 को उन्होंने पार्टी के महासचिव से इस्तीफा दिया। वह पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति के सदस्य बने रहे। राज्यसभा में उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक की चर्चा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अन्ना हजारे के जन लोकपाल विधेयक का समर्थन किया। 1980 से पार्टी में होने के बावजूद उन्होंने 2014 तक कोई सीधा चुनाव नहीं लड़ा। 2014 में पहली बार पंजाब की अमृतसर सीट से भाजपा प्रत्याशी बने, परंतु कांग्रेस उम्मीदवार अमरिंदर सिंह से हार गये। इसके बाद गुजरात से राज्यसभा सांसद बने। मार्च-2018 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिये चुने गये थे। 2014 में मोदी सरकार में वित्त मंत्री बनाये गये थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट के माध्यम से जेटली के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

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