आयंगर जयंती : जब टीबी था असाध्य रोग, तब जीवनदाता बना योग और 96 वर्ष तक रहे निरोग

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 14 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। 11 दिसंबर, 2014 को प्रथम बार संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में प्रतिवर्ष 21 जून को योग दिवस मनाने को मान्यता दी गई, परंतु योग का इतिहास प्राचीन-पुरातन है। योग भारतीय सनातन धर्म व अध्यात्म परम्परा का महत्वपूर्ण भाग है। योग केवल एक क्रिया नहीं, अपुति यह एक साधना है, जिसमें मन, तन और आत्मा तीनों एक हो जाते हैं। भगवद्गीता में भी योग का वर्णन किया गया है। एक श्लोक में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं, ‘योगः कर्मसु कौशलम्‌’ अर्थात कर्मों में कुशलता ही योग है। आज हम आपको योग के बारे में नहीं बताने जा रहे, अपुति आपको एक ऐसे महायोगी से अवगत कराने जा रहे हैं, जिन्होंने योग साधना से न केवल अपने समय के असाध्य रोग क्षय यानी टीबी (Tuberculosis) पर विजय प्राप्त की, अपितु वे 96 वर्ष तक जिए और आधिनुक योग के जनक भी कहलाए। इनका नाम है बेल्लुर कृष्णामचार सुंदरराजा आयंगर (Bellur Krishnamachar Sundararaja Iyengar) यानी बी. के. एस. आयंगर (B. K. S. Iyengar) । आज इस महान योग पुरुष की 101वीं जयंती है। आयंगर विश्व का योग से परिचय कराने वाले प्रसिद्ध भारतीय योग गुरु थे। उनकी उपलब्धियों के कारण ही उन्हें 2002 में ‘पद्मभूषण’ और 2014 में ‘पद्मविभूषण’ से सम्मानित भी किया गया था।

बी. के. एस. आयंगर का जन्म 14 दिसम्बर, 1918 को मैसूर (अब कर्नाटक) में कोलार के वेल्लूर में हुआ था। बाल्यकाल में बी. के. एस. आयंगर मलेरिया, टायफॉइड और क्षय (टीबी) जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित हो गए। बहुत उपचार कराने के पश्चात भी वे स्वस्थ्य नहीं हो पा रहे थे। इन्हीं बीमारियों के साथ उन्होंने अपने जीवन के 16 वर्ष बिताए। सारे उपचार विफल होने के पश्चात वर्ष 1934 में बी. के. एस. आयंगर श्री तिरुमलई कृष्णामचार्य (Sri Tirumalai Krishnamacharya) नामक योग गुरु की शरण में गए और उनसे योग सीखना शुरू किया। प्रतिदिन योग साधना करने से आयंगर के स्वास्थ्य में सुधार आने लगा और देखते ही देखते उनकी बीमीरियों ने दम तोड़ना आरंभ कर दिया। उनके गुरु के साथ उनके संबंध के दौरान एक परेशान रिश्ता था। शुरुआत में कृष्णमाचार्य ने बी. के. एस. आयंगर को बीमार किशोर और योग में सफल नहीं होने के लिए उपेक्षित किया। साथ ही उन्हें घर के कामों में लगा दिया, जिसके बाद से बी. के. एस. आयंगर ने कठोर आसन करना आरंभ किया और एक सफल योग साधक के रूप में सामने आए। इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। बी. के. एस. आयंगर ने योग को ही अपना करियर बना लिया और आगे चल कर एक योगाचार्य बने। योग को ही अपना कर्म बना चुके बी. के. एस. आयंगर ने लंदन, स्विट्ज़रलैंड, पेरिस और कई देशों की यात्रा कर योग का प्रचार-प्रसार किया। 96 वर्ष की आयु तक बी. के. एस. आयंगर ने जीवन भर योग के माध्यम से लोगों की सेवा की।

आयंगर योग के सूत्रपाती

‘आयंगर योग’ भारत के प्रसिद्ध योग गुरु बी. के. एस. आयंगर द्वारा आविष्कृत योग का ही एक प्रकार है। कई अनुसंधानों के बाद इस योग के तरीकों का आविष्कार किया है, जो अष्टांग योग के 8 योग अभ्यास पर आधारित है। इस साधना में आसन के विकास के माध्यम से भौतिक शरीर के संरचनात्मक संरेखण पर ध्यान दिया जाता है। आसन की इस प्रणाली में स्वास्थ्य की भलाई के लिए तन, मन और आत्मा को एक किया जाता है। आधुनिक जीवन के तनाव को राहत देने के लिए आयंगर योग एक शक्तिशाली उपकरण माना जाता है। आयंगर योग में 200 योगासन और 14 प्राणायम हैं, जो क्रमानुसार सरल से जटिलतर होते जाते हैं। आयंगर योग तीन प्रमुख तत्वों द्वारा योग की अन्य शैलियों से अलग है, तकनीक, क्रम और समय। उन्होंने ‘योगा प्रैक्टिसेज़’, ‘फिलोसोफी लाइट ऑन योग’, ‘लाइट ऑन प्राणायाम’, ‘लाइट ऑन द योग सूत्र ऑफ़ पतंजलि’, ‘लाइट ऑफ़ लाइफ़’ आदि शीर्षक से कई पुस्तकों की रचाना भी की है।

3 अक्टूबर बीकेएस आयंगर दिवस घोषित

सैन फ्रांसिस्को बोर्ड ऑफ सुपरवाइज़र्स (San Francisco Board of Supervisors) ने 3 अक्टूबर, 2005 को बीकेएस आयंगर दिवस (B.K.S. Iyengar Day) के रूप में घोषित किया गया है। पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय (University of Pittsburgh) के मानवविज्ञानी जोसेफ एस. अल्टर ने कहा था, ‘आयंगर ने योग के वैश्विक प्रसार पर अब तक का सबसे गहरा प्रभाव डाला है।’ जून 2011 में चीन पोस्ट की बीज़िंग शाखा से उनके सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया गया था। उस समय चीन के 57 शहरों में आयंगर योग के 30 हजार से अधिक छात्र थे। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी (Oxford Dictionary) ने “आयंगर योग” को “आयंगर” के संक्षिप्त रूप में परिभाषित किया गया है जिसका अर्थ है “एक प्रकार का हठ योग, जो पट्टियों, लकड़ी के ब्लॉक और अन्य वस्तुओं का उपयोग करके शरीर के सही संरेखण पर ध्यान केंद्रित करना है।

क्यों अन्य योगों से अलग है आयंगर योग ?

दूसरे योग की तुलना में आयंगर योग को करने के लिए अधिक कुशलता की आवश्कता होती है। इन आसनों को करने के लिए शरीर में ज्यादा लचीलेपन और स्वस्थता की आवश्यकता होती है। दूसरे आसनों की तुलना में इन आसनों को देर तक करने पर ही शरीर को पूरी तरह से लाभ मिल सकता है। दूसरे योग में आसनों का अभ्यास शुरू करते ही व्यक्ति प्राणायाम भी करने लगते हैं, परंतु आयंगर योग में यह संभव नहीं है, जब तक व्यक्ति आसनों की पद्धतियों को अच्छी तरह से सीख न ले, तब तक वह प्राणायम को नहीं कर सकता है, क्योंकि प्राणायाम करने के लिए मन और साँसों पर नियंत्रण होने के साथ देर तक बैठने की भी आवश्कता होती है। योग को सही तरीके से करने के लिए बी. के. एस. आयंगर ने कुछ सहायक चीज़ों जैसे- ब्लॉक, बेल्ट, रस्सी, लकड़ी की कुछ चीजों को बनाया था, जो आयंगर योग को दूसरे योग से अलग करता है। आयंगर योग में सही तरह से आसनों को करने पर जोर दिया जाता है, जिससे शरीर के हर अंग को इससे लाभ मिल सके। योग के अलग-अलग प्रकार के आसनों का क्रम भी अलग-अलग ही होता है। हर आसन के क्रम का शरीर के अंग के साथ संबंध होता है, इसलिए आसनों को निर्दिष्ट क्रम से ही करना आवश्कता होता है, अन्यथा शरीर पर इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है।

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