भाजपा के ‘IT योद्धाओं’ ने ऐसे घेरा ‘बंगाल की बाघिन’ को !

पश्चिम बंगाल में दीदी की दादागीरी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं की दबंगई किसी से छुपी नहीं है। विशेषकर भाजपा कार्यकर्ताओं पर टीएमसी कार्यकर्ताओं के हमले की खबरें आये दिन सामने आती हैं, जिससे भाजपा कार्यकर्ता अपनी पार्टी के लिये खुलकर काम करने में हिचकिचाते हैं, परंतु चुनाव के चाणक्य कहलाने वाले भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने इसका भी तोड़ निकाल ही लिया और ऐसे ‘आईटी योद्धाओं’ की फौज तैयार की, जिसने न सिर्फ यहाँ अपनी पार्टी के लिये इलेक्शन कैंपेन का मोर्चा संभाला बल्कि ‘बंगाल की बाघिन’ की उन्हीं के घर में घेराबंदी भी कर दी है।

कौन हैं भाजपा के ‘आईटी योद्धा’ ?

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के गढ़ और मोदी व शाह के गृह राज्य गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीटें और उत्तर प्रदेश की 80 में से 73 सीटें जीत कर अपनी पार्टी के लिये चुनावी चाणक्य बने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की चुनावी रैली के लिये उनका हैलीकॉप्टर नहीं उतरने देने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बैनर्जी को उन्हीं के घर में मात देने के लिये एक जबरदस्त चुनावी चक्रव्यूह रचा, जिसमें मोदी विरोधी भ्रमित महागठबंधन की सबसे मुखर नेता ममता बैनर्जी को फँसाने का पूरा इंतजाम किया गया है।

भाजपा ने प्रत्यक्ष जनसंपर्क नहीं कर पाने से पश्चिम बंगाल के प्रदेश भाजपा के IT सेल के कार्यकर्ताओं की 40 अलग-अलग टीमें बनाईं और इन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से जनसंपर्क करने के काम पर लगाया, जिसे इन टीमों ने बखूबी अंजाम भी दिया। पार्टी अध्यक्ष इन लोगों को ‘आईटी योद्धा’ कह कर ही पुकारते हैं। यह टीम सेलफोन और डीएसएलआर कैमरे से लैस है।

पहले कोलकाता में प्रदेश आईटी सेल में इन टीमों को ट्रेनिंग दी गई और 2014 में भाजपा में शामिल होकर ब्लॉक सचिव बने कूचबिहार लोकसक्षा क्षेत्र के गोपालपुर गांव में एक छोटी-सी फार्मेसी चलाने वाले और 5 साल की बेटी के पिता 36 साल के दीपक दास को इन टीमों का नेतृत्व सौंपा। दीपक दास 2015 में एंड्रॉइड फोन खरीदने के बाद से ही सोशल मीडिया में अपनी पार्टी के लिये कैंपेन चला रहे हैं। वह हावड़ा में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ एक सेशन में हिस्सा भी ले चुके हैं।

दीपक का कहना है कि उन्होंने शुरुआत में पार्टी और सरकार के बारे में लोगों से बात करने के लिये डोर टू डोर कैंपेन किया था, इसी दौरान उन्होंने हर परिवार से उनके फोन नंबर ले लिये थे। इसके अलावा अपनी पार्टी की सदस्यता के लिये चलाये गये कैंपेन में भी उन्हें लोगों के ढेर सारे फोन नंबर मिल गये थे।

दीपक दास का कहना है कि इस साल लोकसभा चुनाव में कैंपेन के लिये पार्टी ने उन्हें 10,000 रुपये का सेलफोन और पोर्टेबल चार्जर उपलब्ध कराया। दीपक के पास अपना भी एक सेलफोन है। पार्टी उनका चुनावी यात्रा का खर्च भी उठाती है। दीपक के 1,114 वॉट्सएप ग्रुप हैं। एक नंबर पर 229 वॉट्सएप ग्रुप हैं और दूसरे नंबर पर 885 वॉट्सएप ग्रुप हैं। हर ग्रुप में कम से कम 30 यानी कुल 33,420 और अधिकतम 250 यानी 2,78,500 लोग उनसे जुड़े हैं। हर दिन लोगों के ग्रुप छोड़ने और जुड़ने का सिलसिला चलता रहता है। इसलिये हर दिन यह आँकड़ा बदलता रहता है। दीपक 12वीं कक्षा तक पढ़े हैं। परिवार की आर्थिक तंगहाली के कारण वह आगे नहीं पढ़ पाये और उन्हें पढ़ाई छोड़ देनी पड़ी।

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