क्या एक ‘नचनिया’ से डर गया है यह दिग्गज ‘समाजवादी’ नेता ?

लोकसभा चुनाव 2019 में सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट पूरे देश में हॉट सीट बन गई है। इसलिए नहीं कि यहाँ से बॉलीवुड अभिनेत्री, पूर्व सांसद और भाजपा नेता जया प्रदा चुनाव लड़ रही हैं, अपितु इसलिए, क्योंकि रामपुर से उत्तर प्रदेश का एक दिग्गज ‘समाजवादी’ चेहरा पहली बार लोकसभा चुनाव मैदान में उतरा है।

जी हाँ। हम बात कर रहे हैं आज़म खान की। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य और 9 बार से लगातार रामपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने जा रहे आज़म खान पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं, परंतु वे थोड़ा भयभीत और घबराए हुए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार में केबिनेट मंत्री जैसे ऊँचे पद पर और समाजवादी पार्टी (सपा-SP) के दिग्गज नेता आज़म खान का यह भय उनके चुनावी सभाओं में दिए जा रहे वक्तव्यों से साफ झलक रहा है। आख़िर आज़म खान उस जया प्रदा से क्यों डरे हुए हैं, जिन्हें वे कभी ‘नचनिया’ कह कर लगातार हल्के में आँकते थे ?

‘मेरा दुश्मन ताक़तवर’

जया प्रदा से मिल रही काँटे की टक्कर से आज़म खान की बौखलाहट उनके विवादास्पद वक्तव्यों से भी देखी जा सकती है। पहले बजरंग बली वाला विवादास्पद वक्तव्य दिया। अब आज़म खान ने एक चुनाव सभा में ये कहा, ‘मैं 18 घण्टे काम करता हूँ। रात को 3-4 बजे से पहले कभी सोता नहीं हूँ। मुझे जनता की दुआ और आपके साथ की ज़रूरत है, क्योंकि मेरा दुश्मन (जया प्रदा) काफी ताक़तवर है।’ आज़म के इस वक्तव्य का स्पष्ट अर्थ निकलता है कि उन्हें रामपुर में जया प्रदा के विरुद्ध जीत का भरोसा नहीं है। वे जया प्रदा से बुरी तरह घबराए हुए हैं।

आज़म के गुनाहों का कबूलनामा ?

आज़म खान ने लोगों से वोट मांगते समय ऐसी बातें कहीं, जिससे ये लगा कि वे अपने गुनाहों का कबूलनामा जनता के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। हालाँकि आज़म फिर एक बार परोक्ष रूप से जया प्रदा को ‘नचनिया’ कहने से भी नहीं चूके। आज़म ने कहा, ‘एक वक्त था, जब पूरी दुनिया पर आपका सिक्का था, आपकी अच्छाई का, आपकी नेकी का, मगर अब हमें सूदखोर कहा जाता है। इसलिए हमारा पड़ोसी हमारी इज्ज़त नहीं करता। मुझे झूठा कहा जाता है, मैंने नाचने वाला स्कूल नहीं खोला, शराब खाना नहीं खोला है। सत्ता पाने और सियासत के शिखर पर रहने के लिए लोगों ने बहुत सारे दिखावे किए हैं। अगर कोई कहता है उन्होंने (जया प्रदा ने) रामपुर में काम किया है, परंतु उन्होंने (जया प्रदा ने) सिर्फ मुझे ठिकाने लगाया है। मेरे विरुद्ध 450 मुकदमे दर्ज हैं। मुझ पर SIT जाँच चल रही है। मैंने कुछ नौकरियाँ दी थीं, उसमें कुछ नौकरियाँ अपने समाज के लोगों को भी दी थी। इसके कारण मेरे ऊपर जाँच चल रही है।’

रामपुर से भाजपा उम्मीदवार बनीं जया

दक्षिण भारतीय फिल्मों से अभिनय और राजनीति दोनों ही क्षेत्रों में कैरियर शुरू करने वालीं जया प्रदा ने जिस तरह फिल्मी कैरियर को बॉलीवुड तक विस्तार दिया, उसी तरह राजनीतिक कैरियर में भी उत्तर भारत से दिल्ली तक अपनी पहुँच बनाई। दक्षिण भारत के दिग्गज राजनेता एन. टी. रामाराव (एनटीआर) के साथ राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाली जया प्रदा ने हाल ही में भाजपा जॉइन की और रामपुर से चुनाव लड़ रही हैं।

अब आज़म खान के साथ आर-पार की लड़ाई ?

जया प्रदा रामपुर लोकसभा सीट से दो बार समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद रह चुकी हैं। सपा ने इस बार रामपुर से अपने दिग्गज नेता आज़म खान को चुनाव मैदान में उतारा है। आज़म अपने जीवन का पहला चुनाव लड़ रहे हैं, परंतु जया के चुना मैदान में आने से आज़म का लोकसभा पहुँचना संकट में पड़ गया है। लोकसभा चुनाव 2014 में यह सीट भाजपा ने सपा से छीनी थी। भाजपा के नेपाल सिंह ने आज़म के करीबी सपा उम्मीदवार नसीर खाँ को परास्त किया था। हालाँकि 2014 में सपा-बसपा के वोट बँट गए थे, जबकि इस बार आज़म को बसपा कोटे के वोट भी मिलेंगे, जिससे उनकी जीत आसान बन सकती थी, परंतु भाजपा ने जया प्रदा को उतार कर आज़म की जीत पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

जया-आज़म की पुरानी दुश्मनी

जया प्रदा और आज़म खान के बीच पुरानी दुश्मनी है। जब सपा में अमर सिंह का प्रभाव था, तब जया प्रदा का बोलबाला था। जया ने 2004 और 2009 में रामपुर से सपा सांसद के रूप में जीत हासिल की थी। 2009 में तो आज़म के विरोध के बावजूद मुलायम ने जया को ही रामपुर का टिकट दिया और जया ने यह सीट जीत कर दिखाई। आज़म व उनके समर्थक जया के लिए नचनिया और घुंघरू वाली जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते थे, जबकि जया आज़म को भैया कहती थीं। जब अमर सिंह ने सपा छोड़ी, तो जया ने भी सपा से किनारा कर लिया और 2014 में अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के टिकट पर चुनावी किस्मत आजमाई, परंतु उन्हें हार का सामना करना पड़ा।’

एनटीआर से मोदी तक जया का राजनीतिक सफर :

जया प्रदा ने अपना राजनीतिक कैरियर 1994 में अपने साथी अभिनेता एन. टी. रामाराव के साथ किया। एनटीआर ने जया का अपनी राजनीतिक पार्टी तेलुगु देशम् पार्टी (टीडीपी) में प्रवेश कराया। 1996 में जया आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के लिए मनोनीत की गईं। एनटीआर के निधन के बाद चंद्रबाबु नायडू के हाथों में टीडीपी की कमान आई और मतभेदों के चलते जया ने टीडीपी छोड़ सपा का दामन थामा। इस प्रकार एनटीआर से शुरुआत कर जया प्रदा ने चंद्रबाबु नायडू, मुलायम सिंह यादव, अजित सिंह के बाद अब नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के साथ मिल कर नए राजनीतिक सफर की शुरुआत की है।

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