‘राहुल’ नाम तो सुना ही होगा : यह नाम है मेहनत और कामयाबी का

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 28 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। शाहरुख खान और काजोल अभिनीत फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनियां ले जाएँगे (DDLJ)’ इन दोनों की ही नहीं, अपितु निर्माता निर्देशक यश चौपड़ा और बॉलीवुड (BOLLYWOOD) की भी सफलतम फिल्मों में से एक है, जिसके कई डायलोग सुपरहिट हुए, जिनमें से एक ‘राहुल, नाम तो सुना ही होगा’ भी एक है। हालाँकि हम इस फिल्म या इसके अभिनेता और डायलोग की बात नहीं कर रहे हैं। हम बात करेंगे राहुल पटेल (RAHUL PATEL) की, जो कड़ी मेहनत के दम पर सफलता के शीर्ष पर पहुँचने वाले कुछ गिने-चुने लोगों में शुमार हैं। राहुल पटेल आजकल बॉलीवुड, टेलीवुड और गुजराती फिल्म इंडस्ट्री यानी ढोलीवुड (DHOLLYWOOD) में एक जाना-पहचाना नाम है। राहुल पटेल एक गुजराती लेखक हैं, जो साधारण हीरा घिसने वाले परिवार से ताल्लुक रखते हैं और खुद एक किराना की दुकान में काम करते थे, परंतु मेहनत ही सफलता की कुंजी है, यह राहुल पटेल ने साबित किया और सफलता के शिखर तक पहुँच कर अन्य युवाओं के लिये भी प्रेरणा स्रोत बन गये।

कॉलेज के नाटक में निभाई भूमिका ने दिलाई सफलता

राहुल की सफलता की कहानी संघर्षपूर्ण रही है। उनके पिता हीरे के कारखाने में काम करते थे और उनकी माता शिक्षिका थीं। राहुल भी अपने परिवार की आर्थिक मदद करने के लिये एक किराना की दुकान में एकाउंटेंट (ACCOUNTANT) के रूप में काम करते थे। 19 साल की उम्र में अनायास राहुल का एन्टरटेनमेंट (ENTERTAINMENT) की दुनिया में पदार्पण हो गया। जब वे कॉलेज में थे, तब उन्होंने इन्टर कॉलेज नाट्य प्रतियोगिता में भाग लिया और एक नाटक में बहुत छोटी-सी भूमिका निभाई। इस नाटक को श्रेष्ठ नाट्य का पुरस्कार मिला और इसी के साथ रंगमंच से राहुल पटेल का रिश्ता जुड़ गया। उनकी किस्मत ने जोर दिया और इस नाटक में काम करने के दो सप्ताह के भीतर ही राहुल को एक कॉमर्शियल नाटक (COMMERCIAL DRAMA) में काम मिल गया। इसके बाद राहुल ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एकाउंटेंट के रूप में काम करते हुए शॉर्ट स्टोरीज़ (SHORT STORIES) लिखने लगे। शुरुआत में 1999 में उन्हें फिरोज़ भगत के साथ ब्लाइंड गेम (BLIND GAME) नामक नाटक में काम मिला। उस समय टेलीविज़न (TELEVISION) पर बालाजी टेलीफिल्म्स (BALAJI TELEFILMS) के अलग-अलग धारावाहिकों का बोलबाला था। गुजराती नाटक इंडस्ट्री के दो निर्देशक राजेश जोशी और विपुल मेहता भी बालाजी टेलीफिल्म की ‘कोशिश : एक आशा’ और ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में काम कर रहे थे। राहुल भी उनके साथ असिस्टेंट के तौर पर जुड़ गये। इसके बाद उन्होंने दो वर्ष तक बालाजी टेलीफिल्म्स के लिये काम किया।

ऐसे चल पड़ी राहुल पटेल की कलम

इसके बाद राहुल पटेल ने नॉन फिक्शन शो लिखने की शुरुआत की। इसके बाद से राहुल पटेल की कलम लगातार चल रही है। उन्होंने अल्ट बालाजी (ALT BALAJI) की वेब सीरीज़ (WEB SERIES) ‘दी वर्डिक्ट : स्टेट वर्सिस नाणावटी’ लिखी है। इससे पहले 2008 में ‘एक्सीडेंट ऑन अ हिल रोड’ की रोचक कहानी भी राहुल की ही देन है। 2017 में नेशनल अवॉर्ड विजेता एनिमेशन फिल्म ‘महायोद्धा राम’ के संवाद भी राहुल पटेल ने लिखे हैं। उनकी लिखी दो मूवीज़ ‘सोलिड पटेल’ और ‘वेडिंग पुलाव’ शीघ्र ही प्रदर्शित होने वाली हैं। एक अन्य फिल्म ‘ले ले मेरी जान’ की प्राइमरी शूटिंग भी पूरी हो चुकी है।

दिग्गज भी सराहते हैं राहुल का काम

घर-घर में लोकप्रिय बिग बॉस के प्रथम सीज़न में भी राहुल पटेल की कलम चल चुकी है, जबकि सलमान खान के ‘दस का दम’ में भी राहुल पटेल की कलम का ही जादू चला था। राहुल पटेल ‘सावधान इण्डिया’, ‘दी ग्रेट इण्डियन कॉमेडी शो’, ‘गुमराह’, ‘संजोग से बनी संगिनी’, ‘काली : एक अग्नि परीक्षा’, ‘इमोशनल अत्याचार’, ‘येय इट्स फ्राइडे’ सहित कई जाने माने टेलीविज़न शो के लिये वे स्क्रीन राइटर के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा ‘प्यार तूने क्या किया’, प्यार मेज़िक श…, ‘पुलिस फैक्टरी’, ‘पुलिस फाइल्स’, ‘घर की बात है’, ‘स्टील मूविंग स्टील शेकिंग’, ‘रणवीर’, ‘विनय और कौन’, ‘ऐसी की तैसी’ सहित कई सीरीज़ और टीवी शो के लिये कलमकारी दिखाई है। उन्होंने ‘स्टार परिवार’, ‘बिग एन्टरटेनमेंट अवॉर्ड्स’, आइटा अवॉर्ड्स तथा एयरटेल अवॉर्ड्स के लिये भी स्क्रीन राइटर का काम किया है। दो गुजराती नाटक ‘डायाभाई दोढ डाह्या’ तथा ‘सात तरी एकवीस’ का तीसरा सीज़न भी शामिल है। संक्षिप्त कहें तो बॉलीवुड, टेलीवुड, ढोलीवुड और वेब इंडस्ट्री में राहुल पटेल एक गूँजता नाम है, जिनके काम को बड़े-बड़े दिग्गजों ने भी सराहा है।

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