इन बहादुरों को करो सलाम : मरते-मरते भी जो तोहफे में दे गये ज़िंदगी

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 19 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। जब व्यक्ति स्वयं मृत्यु के आमुख में होता है, तब स्वयं के अलावा किसी और के बारे में सोचना आसान नहीं होता है। उस समय व्यक्ति खुद की जान बचाने की ही सोचता है, परंतु ऐसे समय भी जो दूसरों की जान की परवाह करते हैं, उन्हीं को बहादुरी का टैग दिया जाता है। बहादुरी का एक नया मामला सामने आया है पंजाब के लुधियाना में। यहाँ एक स्कूल वैन के ड्राइवर ने मरते-मरते भी 15 घरों के चिरागों को यानी कि बच्चों की अमूल्य ज़िंदगी को बचा लिया। अब इस ड्राइवर की सूझ-बूझ की न सिर्फ प्रशंसा हो रही है, बल्कि हर कोई उसकी बहादुरी को नमन करते हुए उसकी आत्मा की शांति के लिये प्रार्थना कर रहा है।

घटना पंजाब के लुधियाना की है, जहाँ रयान इंटरनेशनल स्कूल की वैन चलाने वाले दुगरी निवासी जसपाल सिंह प्रति दिन की तरह बुधवार को भी वैन लेकर स्कूली बच्चों को लेने के लिये निकले थे। जसपाल सिंह वैन में 15 बच्चों को बैठा चुके थे और वैन को लेकर स्कूल जाने के लिये निकल चुके थे। इसी बीच जब उनकी वैन मोहन दाई अस्पताल के पास पहुँची, तो उनके सीने में तेज दर्द होने लगा। हालाँकि जसपाल सिंह ने ऐसे नाजुक मौके पर अपनी जान की परवाह किये बिना उनकी वैन में सवार 15 बच्चों की चिंता की और सबसे पहले वैन की गति धीमी करके उसे सड़क के किनारे ले लिया। इससे पहले कि जसपाल सिंह ब्रेक लगाकर वैन को रोक पाते, वह बेहोश हो गये। चूंकि वे वैन को रोकने के लिये उसकी गति बिल्कुल धीमी कर चुके थे, इसलिये वैन सड़क के किनारे एक मिट्टी के ढेर में जाकर फँस गई और रुक गई। वैन के ड्राइवर को बेहोश देख कर बच्चों ने शोर मचाया, जिससे आसपास के लोग एकत्र हो गये। वह तुरंत वैन के चालक को नज़दीकी निजी अस्पताल ले गये। हालांकि वहाँ डॉक्टरों ने जाँच करने के बाद जसपाल सिंह को मृत घोषित कर दिया।

जसपाल सिंह की मृत्यु की ख़बर सुन कर एकत्र हुए लोग शोक में डूब गये। हालाँकि लोगों ने जसपाल सिंह की बहादुरी को लेकर उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की और बच्चों के परिवारजनों ने जसपाल सिंह को शत-शत नमन किया। उन्होंने कहा कि जसपाल सिंह ने खुद की जान जा रही होने के बावजूद उनके बच्चों की ज़िंदगी की चिंता की और सूझ-बूझ के साथ वैन को सड़क के किनारे लेकर उसकी गति धीमी कर दी, जिससे वैन रुक गई और एक बड़ा हादसा होने से बच गया। उनके नौनिहालों की ज़िंदगी बचाकर जसपाल सिंह ने सचमुच बहुत बहादुरी का काम किया। लोगों ने जसपाल सिंह की आत्मा की शांति के लिये प्रार्थना भी की। जो भी इस घटना के बारे में सुन रहा है, वह जसपाल सिंह की प्रशंसा कर रहा है।

ट्रक ड्राइवर ने भी दिया था बहादुरी का परिचय

पंजाब में एक साल पहले डेराबस्सी में भी ऐसी ही घटना घटित हुई थी, तब एक ट्रक ड्राइवर ने अपनी बहादुरी और सूझ-बूझ का परिचय देते हुए बड़े हादसे को टाल दिया था। उत्तर प्रदेश के मूल निवासी और डेराबस्सी में रौनी मोहल्ला के रहने वाला ट्रक ड्राइवर रंतौर जब डेराबस्सी में कॉलेज रोड से ट्रक लेकर गुजर रहा था, तब उसे भी दिल का दौरा पड़ा था। उस समय रंतौर ने भी ट्रक को एक दुकान में घुसने से रोक लिया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया था। रंतौर ट्रक लेकर दंद्रला की तरफ जा रहा था, लेकिन दिल का दौरा पड़ते ही उसने ब्रेक लगा कर ट्रक को रोक दिया था। इससे ट्रक अनियंत्रित होकर राहगीरों को चपेट में लेने और बेकाबू होकर सड़क के किनारे स्थित दुकानों में घुसने से बच गया था। इस प्रकार रंतौर ने भी बड़ा हादसा होने से रोक लिया था। रंतौर को भी स्थानीय लोगों ने मुँह से झाग निकलता देख कर सिविल अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसे भी मृत घोषित किया गया था। यह हादसा पिछले साल अक्टूबर-2018 में हुआ था।

मरते-मरते भी 300 लोगों को बचाया था एक फायर फाइटर ने

जब व्यक्ति स्वयं मृत्यु के आमुख में होता है, तब स्वयं के अलावा किसी और के बारे में सोचना आसान नहीं होता है। उस समय व्यक्ति खुद की जान बचाने की ही सोचता है, परंतु ऐसे समय भी जो दूसरों की जान की परवाह करते हैं, उन्हीं को बहादुरी का टैग दिया जाता है। जब ऐसी बहादुरी की बात हो और दुबई के फायर फाइटर का जिक्र न हो, ऐसा कैसे हो सकता है ?

घटना 8 अगस्त 2016 की है, जब दुबई हवाई अड्डे पर अमीरात एयरलाइंस की फ्लाइट की क्रैश लैंडिंग हुई थी। इस हादसे में विमान तो आग में जल कर नष्ट हो गया, परंतु यह हादसा तब और भीषण हो सकता था, जो उसमें सवार 300 यात्रियों को बचा न लिया जाता। विमान में लगी आग को बुझाने के लिये फायर फाइटर कोशिशों में लगे हुए थे, परंतु आग इतनी भीषण थी कि उसे बुझाना लगभग असंभव था। इसलिये एक फायर फाइटर 27 वर्षीय जसिम बलौशी ने खुद की जान की परवाह किये बिना विमान में सवार 300 यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की। इस प्रयास में जसिम खुद आग की लपटों की चपेट में आ गया और उसकी मृत्यु हो गई, परंतु मृत्यु के आगोश में जाते-जाते भी यह बहादुर फायर फाइटर सैकड़ों लोगों को जीवन दान दे गया था।

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