CAA के विरुद्ध प्रदर्शन में हिंसा फैलाने वाले लोग थे PFI के सदस्य, अब इस संगठन पर लगेगा प्रतिबंध ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 31 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ देश भर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में हुई हिंसा के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली गई है। यह हिंसक लोग देश में सक्रिय ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)’ के सदस्य हैं। यह एक इस्लामिक संगठन है, जिस पर अब प्रतिबंध लगाने की दिशा में सक्रिय प्रयास शुरू कर दिये गये हैं। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने प्रदेश के गृह विभाग से इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। उत्तर प्रदेश का गृह विभाग इस सिफारिश को केन्द्र सरकार के पास भेजेगा।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित राज्य के विभिन्न शहरों में हुई हिंसा में शामिल लोगों के विरुद्ध एकत्र किये गये प्रमाणों के बाद प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह के मुख्यालय की ओर से गृह विभाग को सूबे में हुई हिंसक घटनाओं की रिपोर्ट भेजी गई है, जिसमें हिंसक घटनाओं के पीछे ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ नामक संगठन के लोगों की सक्रिय भूमिका होने का खुलासा किया गया है। इतना ही नहीं, इस संगठन के अधिकांश सदस्यों में देश के प्रतिबंधित संगठन ‘स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI)’ के सदस्य शामिल होने का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे राज्य में फैले इस संगठन के लोगों के पास से आपत्तिजनक साहित्य और सामग्री भी बरामद की गई है। इसके अलावा प्रदेश में हिंसा के मामले में गिरफ्तार किये गये कई लोगों के संबंध इस पीएफआई से होने की बात सामने आई है।

यूपी के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शनों में संलिप्त था PFI

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसक घटनाएँ होने से सूबे की योगी सरकार ने सख्ती से काम लेकर हिंसा पर रोक लगाई थी और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करके उन्हीं से सार्वजनिक और निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई करने की पहल की है। इसके अलावा सूबे की पुलिस से हिंसक घटनाओं की एक विस्तृत जाँच रिपोर्ट तैयार करने के लिये भी कहा था। इसलिये डीजीपी ने सभी घटनाओं की बारीकी से जाँच करके एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया कि देश के कई हिस्सों में सक्रिय इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े लोग इस हिंसा में शामिल पाये गये। इतना ही नहीं, प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन सिमी के अधिकांश लोग भी इस संगठन से जुड़े होने का खुलासा हुआ था। रिपोर्ट में पुलिस ने यह भी दावा किया है कि 19 दिसंबर-2019 गुरुवार को लखनऊ में हुई हिंसा का मास्टर माइंड भी यही संगठन है। इसके बाद डीजीपी ने अपनी रिपोर्ट में इस पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। प्रदेश के गृह विभाग ने इस रिपोर्ट के आधार पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय से इस संगठन पर देश भर में प्रतिबंध लगाने की सिफारिश करने की तैयारी की है।

केरल में हुई थी PFI की स्थापना, अब दिल्ली है मुख्यालय

उल्लेखनीय है कि मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) की रिपोर्ट के अनुसार भी पीएफआई से जुड़े लोगों ने हिंसक घटनाओं से पहले उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बैठक की थी। इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में सीएए के विरुद्ध हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा में भी कई जगहों पर इस संगठन के कार्यकर्ता शामिल रहे हैं। यह संगठन दिल्ली, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, केरल, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में सक्रिय है। यह संगठन 2006 में केरल में स्थापित हुआ था। पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के हक़ में आवाज़ उठाने के लिये और उनकी परेशानियों को सरकार तक पहुँचाने के उद्देश्य से नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) के मुख्य संगठन के रूप में इस संगठन की स्थापना की गई थी, परंतु यह इस संगठन का केवल दिखावटी मुखौटा है। हिंसक घटनाओं में इस संगठन की सक्रियता से सिद्ध हुआ है कि यह संगठन एक कट्टरपंथी संगठन है, जो अल्पसंख्यक समुदाय को शासन के विरुद्ध भड़काकर हिंसक घटनाओं को अंजाम देता है। इस संगठन ने 2006 में ही दिल्ली के रामलीला मैदान में नेशनल पॉलिटिकल कॉन्फ्रेंस करके पूरे देश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, जिसके परिणाम स्वरूप अब देश के 23 राज्यों में इस संगठन की पहुँच हो चुकी है। अब इस संगठन का मुख्यालय दिल्ली में है। पिछले दो सालों में इस संगठन ने उत्तर प्रदेश में काफी तेजी से पाँव फैलाये हैं और पिछले दिनों शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, वाराणसी, आज़मगढ़ और सीतापुर आदि क्षेत्रों में हुई हिंसक घटनाओं में इस संगठन के कार्यकर्ता सक्रिय रहे हैं।

केरल में उठ चुकी है प्रतिबंध की माँग

यह संगठन कर्नाटक में कर्नाटक फोरम फोर डिग्निटी, तमिलनाडु में मनिथा नीति पासराई, गोवा में सिटीजंस फोरम, राजस्थान में कम्युनिटी सोशल एंड एजुकेशनल सोसाइटी, आंध्र प्रदेश में एसोसिएशन ऑफ सोशल जस्टिस समेत विविध संगठनों के साथ मिल कर अपनी गतिविधियों को विविध राज्यों में फैलाता है। इसकी अन्य शाखाएँ भी चलती हैं, जिनमें महिलाओं के लिये नेशनल वीमेंस फ्रंट और विद्यार्थियों-युवाओं के लिये कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया आदि शामिल हैं। इस संगठन के गठन के बाद से ही इस पर समाज विरोधी और देश विरोधी गतिविधियों के आरोप लगने लगे थे। 2012 में केरल सरकार ने एक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट से कहा था कि पीएफआई की गतिविधियाँ देश की सुरक्षा के लिये हानिकारक हैं। 2018 में केरल में इस संगठन को लेकर जबरदस्त हंगामा मचा था और इसे प्रतिबंधित करने की माँग उठी थी। एर्नाकुलम् में एफएफआई से जुड़े एक छात्र की क्रूरतापूर्ण हत्या के बाद यह माँग उठी थी। हालाँकि राज्य सरकार ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था।

झारखंड में प्रतिबंधित है पीएफआई

दूसरी ओर झारखंड में राज्य सरकार ने इसी साल इस संगठन को प्रतिबंधित कर दिया है। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में इस संगठन की संलिप्तता को देखते हुए राज्य सरकार ने यह कदम उठाया। यह संगठन ईराक और सीरिया में सक्रिय आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक एंड सीरिया (ISIS)’ से प्रभावित बताया जाता है और राज्य के गृह विभाग के कथनानुसार इस संगठन के कई सदस्य सीरिया जैसे देशों में काम भी कर रहे हैं। यह संगठन देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहा है।

पकड़े गये आरोपियों ने स्वीकारी, हिंसा में PFI की थी भूमिका

19 दिसंबर की हिंसा में यूपी पुलिस ने शामली से 28 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से 14 लोग पीएफआई से जुड़े पाये गये थे। लखनऊ से इस संगठन के तीन सदस्यों की गिरफ्तारी की गई। पश्चिमी यूपी में हिंसक प्रदर्शन में हिंसा का मास्टर माइंड वसीम गिरफ्तार किया गया। उसके साथ संगठन के कोषाध्यक्ष अशफाक और दो अन्य सदस्य नदीम तथा मोहम्मद शादाब भी गिरफ्तार किये गये हैं। गिरफ्तार सदस्यों में से नदीम और अशफाक ने माना कि 19 दिसंबर की हिंसा को भड़काने में इसी संगठन के सदस्यों की भूमिका रही। इसके लिये उन्होंने बैठक करके रणनीति बनाई थी। इसका प्रचार सोशल मीडिया के माध्यम से भी किया गया था। रॉबिन और शोएब ने भीड़ को उकसाने का काम किया था। नदीम और अशफाक ने वॉट्सएप पर कट्टरपंथी साहित्य प्रचारित किया था और सीएए का विरोध करने के लिये अपील की थी। यूपी पुलिस के दावे के अनुसार इस संगठन के कुछ लोग केरल भी गये थे, जहाँ कुछ संदिग्ध लोगों से मुलाकात करके हिंसा फैलाने की साजिश रची गई थी।

इनसे पहले असम में मुज़ीम और अमिनुल को हिंसक प्रदर्शन की साजिश रचने और दिसपुर सचिवालय पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। असम पुलिस का भी मानना है कि पीएफआई जैसे संगठनों ने ही असम में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया था।

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