इस ‘ भूल’ ने कोफीन तक पहुँचा दिया ‘कॉफी किंग’ सिद्धार्थ को !

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 31 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। कर्नाटक पिछले कई दिनों से चर्चा में है। पहले एच. डी. कुमारस्वामी सरकार पर संकट से लेकर येदियुरप्पा सरकार के शपथ तक चले राजनीतिक ड्रामा ने कर्नाटक को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रखा। अभी यह राजनीतिक उठापटक शांत हुए चंद घण्टे ही बीते थे कि कॉफी किंग वी. जी. सिद्धार्थ के गुमशुदा होने की सनसनीखेज ख़बर के चलते कर्नाटक फिर एक बार सुर्खियों में आ गया। ख़ैर, कॉफी किंग का किस्सा भी चौबीस घण्टों के भीतर एक दु:खद समाचार के साथ समाप्त हो गया। वही हुआ, जिसका डर था। कॉफी किंग सिद्धार्थ सोमवार सायं 6.30 बजे जिस इरादे से नेत्रावदी नदी पर बने पुल पर अपनी कार से उतरे थे, वह इरादा उनका शव मिलने के साथ ही स्पष्ट भी हो गया।

कॉफी के क्षेत्र में भारत के एक सफलतम् व्यवसायी बनने के बाद पूरे देश में कॉफी किंग के रूप में विख्यात हुए वी. जी. सिद्धार्थ अब इस दुनिया में नहीं रहे। देश भर में कैफे कॉफी डे (CCD) चेन स्थापित करने वाले कॉफी डे एंटरप्राइज़ेज़ (CDE) के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक (CMD) वी. जी. सिद्धार्थ का शव नेत्रावदी नदी से आज सुह बरामद हो गया है। मंगलुरू पुलिस आयुक्त संदीप पाटिल के अनुसार होयगे बाज़ार के निकट मुलिहितलु द्वीप के पास से सिद्धार्थ का शव बरामद हुआ। सिद्धार्थ के अंतिम साथी यानी उनके ड्राइवर बसवराज पटेल ने पुलिस को जो सूचना दी थी, उससे जो अंदेशा पैदा हुआ था, वह सही सिद्ध हुआ है। वास्तव में कर्ज़ में डूबे सफल कॉफी व्यवसायी सिद्धार्थ ने आत्महत्या कर ली।

सिद्धार्थ का ‘कॉफी विद् आईटी’ अवतरण

कर्नाटक के चिकमंगलूर में कॉफी प्लांटर्स परिवार में जन्मे सिद्धार्थ देखते ही देखते भारत के सफल व्यवसायी बन गए, परंतु सफलता की उनकी इस कामना ने जब एक नया अवतार लिया, तो सिद्धार्थ ने अपने बिज़नेस में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र को जोड़ा। कॉफी किंग बनने के बाद सिद्धार्थ आईटी कंपनियों में दिलचस्पी लेने लगे। सिद्धार्थ को लगता था कि आईटी क्षेत्र में रातों-रात करोड़पति बना जा सकता है। सिद्धार्थ को शुरुआत में सफलता भी मिली, जब उन्होंने घायल INFOSYS को बचाया। बात 1993 की है, जब इन्फॉसिस ने IPO लॉञ्च किया। यह आईपीओ अनसबस्क्राइब्ड रह गया। तब सिद्धार्थ और इनाम सिक्योरिटीज़ के वल्लभ भणसाली ने ऑफर को अंडरराइट किया और उसे सफल बनाया। सिद्धार्थ के इन्फॉसिस के संस्थापक नंदन नीलेकणि से भी निकटस्थ संबंध बन गए। सिद्धार्थ नीलेकणि को अपना बड़ा भाई कहते थे। नीलेकणि ने कॉफी डे एंटरप्राइज़ेज़ के आईपीओ में निवेश किया था।

कॉफी डे में कई आईटी कंपनियों का जन्म

सिद्धार्थ भारत के प्रारंभिक वेंचर कैपिटल इन्वेस्टर्स में शामिल हैं। उन्होंने ग्लोबल टेक्नोलॉजी वेंचर्स के साथ मिल कर ऐसे फाउंडर्स पर दांव लगाया, जिन्होंने आईटी कंपनियाँ खड़ी कीं। 1999 में सिद्धार्थ ने आईवेगा कॉर्प, क्षेम टेक्नोलॉजी और माइंडट्री में निवेश किया। बाद में आईवेगा 50 लाख डॉलर में बिकी, तो एमफैसिस ने क्षेम को 2.1 करोड़ डॉलर में खरीदा। आईवेगा ब्रिगेड रोड पर कॉफी डे में ही शुरू हुई थी, क्योंकि वहाँ इंटरनेट था। आईवेगा के फाउंडर गिरि देवानर की दिलचस्पी युवा इंटरनेट यूज़र्स में थी। सिद्धार्थ ने आईवेगा में 10 करोड़ रुपए लगाए थे।

माइंड्री बन गई आत्मघाती

सिद्धार्थ के लिए माइंडट्री में निवेश आत्मघाती साबित हुआ। यद्यपि सिद्धार्थ का आईटी क्षेत्र में माइंडट्री में निवेश सबसे बड़ा दाँव था। इसका प्रमाण यह है कि दो दशक बाद जब उन्होंने 20.31 प्रतिशत स्टेक बेचा, तो उन्हें 2850 करोड़ रुपए से अधिक का मुनाफा हासिल हुआ। सिद्धार्थ को देश में पहला साइबर कैफे ब्रिगेड रोड वाले कैफे कॉफी डे आउटलेट में खोलने का श्रेय दिया जाता है। यही मॉडल बाद में इंटरनेट के प्रसार में काफी सहायक साबित हुआ। सिद्धार्थ ने आत्महत्या से पूर्व सीसीडी स्टाफ को जो अंतिम पत्र लिखा है, उससे यह सिद्ध होता है कि माइंडट्री उनके लिए जानलेवा साबित हुई। दरअसल कॉफी के व्यवसाय में सफलतापूर्वक काम कर रहे वी. जी. सिद्धार्थ के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंपनी माइंडट्री सिरदर्द बन गई थी। सिद्धार्थ की माइंडट्री में सबसे बड़ी हिस्सेदारी थी, जिसे गत फरवरी-मार्च में लार्सन एण्ड टुब्रो (L&T) ने टेकओवर करने का प्रयास शुरू किया था। सिद्धार्थ ने जून में ही माइंडट्री में अपनी पूरी हिस्सेदारी एलएण्डटी को 3,000 करोड़ रुपए में बेच दी थी। इससे पहले वे 21 प्रतिशत होल्डिंग के साथ माइंडट्री के सबसे बड़े शेयर होल्डर थे। सिद्धार्थ के पत्र में और भी कई बातें हैं, परंतु विशेष रूप से माइंडट्री डील का भी जिक्र है और यह डील ही सिद्धार्थ को हताशा की ओर ले गई। जो पत्र सामने आया है, उसमें सिद्धार्थ ने माइंडट्री को लेकर लिखा है, ‘पूर्व आईटी डीजी ने माइंडट्री की डील रोकने के लिए दो बार हमारे शेयर अटैच किए थे। बाद में कॉफी डे के शेयर भी अटैच कर दिए थे। यह ग़लत था, जिसकी वजह से हमारे सामने नकदी का संकट आ गया।’ सिद्धार्थ ने पत्र में पू्व आईटी डीजी पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा है, ‘एक पूर्व आईटी डीजी द्वारा हमारे शेयर्स दो बार अटैच किए जाने से माइंडट्री के साथ हमारी डील ब्लॉक हो गई और फिर कॉफी डे के शेयर्स की जगह ले ली, जबकि संशोधित रिटर्न्स हमारी ओर से फाइल किए जा चुके थे। यह अनुचित था। इसी कारण पैसों की कमी हो गई थी।’

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