मरुधरा में जलधारा ! ऊपर रेत की चादर और नीचे बह रही है निर्मल नहर : जानिए कहाँ हुआ यह चमत्कार ?

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अहमदाबाद, 29 जून 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम) । दुनिया में अनेक विचित्रताएं मौजूद हैं, जिन्हें देखकर लोग अनायास ही कह उठते हैं अद्भुत, अविश्वसनीय, आश्चर्यचकित करने वाला। ऐसी ही एक अचंभित कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी दंग रह गये हैं और रिसर्च में लगे हुए हैं कि आखिरकार इस चमत्कारिक घटना के पीछे रहस्य क्या है ?

रेतीली जमीन के नीचे सिर्फ तेल नहीं, मिलता है पानी भी

हम बात कर रहे हैं ईरान की, वही ईरान जिसकी जमीन में तेल भरा पड़ा है और जो दुनिया भर को कच्चा तेल बेचता है, जिसकी इस कमाई पर ही अमेरिका बिगड़ा हुआ है और उसकी यह कमाई बंद करने के लिये भारत समेत विश्व के विभिन्न देशों पर ईरान से तेल नहीं खरीदने का दबाव बना रहा है। दरअसल ईरान ने भी परमाणु परीक्षण करके खुद परमाणु शक्ति घोषित कर दिया। यही कारण है कि अमेरिका और ईरान में ठनी हुई है। खैर, हम यहाँ कुछ और विषय पर बात कर रहे हैं। ईरान की रेतीली जमीन के नीचे तेल तो मिलता ही है, अब यह भी पता चला है कि रेगिस्तान में 100 फीट नीचे मीठे पानी की नहरें बह रही हैं। ईरान में इन नहरों को कनात यानी चैनल कहा जाता है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी इन नहरों को देखकर दंग रह गये हैं। कई वर्षों तक तो यह भी पता नहीं चला कि आखिरकार यह पानी आता कहाँ से है और इस पानी का स्रोत कहाँ है ? गहराई से अध्ययन करने पर खुलासा हुआ कि दूर पहाड़ों की रिवर वैली से यह नहरें निकल रही हैं, जो जमीन के अंदर ही स्वच्छ पानी का बड़ा स्रोत बनी हुई हैं। ईरान के सैकड़ों गाँव पीने के पानी के लिये इन्हीं नहरों पर निर्भर हैं।

3,000 वर्ष पुरानी नहरों की इंजीनियरिंग से आधुनिक इंजीनियर हैरान

रिपोर्ट के अनुसार रेगिस्तान में 100 फीट नीचे मौजूद स्वच्छ पानी की यह नहरें 3,000 वर्ष पुरानी हैं। कहा जा रहा है कि इन नहरों को लौह युग में बनाया गया होगा, परंतु आज भी यह नहरें इंजीनियरिंग की दृष्टि से आधुनिक इंजीनियरों के लिये चमत्कार बनी हुई हैं। जल स्रोत से लेकर लंबी नहरें खोदना, उनकी ढलान इस तरह से तैयार करना कि सदियों तक उनमें पानी बहता रहे, परंतु इतनी तेजी से भी न बहे कि नहरों को नुकसान पहुँचाए, यह सब प्राचीन इंजीनियरिंग का कमाल है, जिसका आधुनिक इंजीनियर अध्ययन करने में जुटे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि इन ईरानी कनात की देखरेख करने वालों को ईरानी भाषा में मिराब कहा जाता है। 102 वर्ष की शतकीय आयु के गुलामरेजा नबीपुर इन कनातों की रखवाली करने वाले पुराने मिराबों में से एक हैं। उन्हें ईरान सरकार ने नेशनल लिविंग ट्रेज़र का दर्जा दिया है। इन कनातों को हर साल मेंटेनंस की जरूरत पड़ती है। पहले यह काम जन-भागीदारी से किया जाता था, परंतु 1960 और 70 के दशक से इस काम में स्थानीय लोगों की दिलचस्पी कम होने लगी। क्योंकि विकास के साथ वह अब पहले की तरह कनात पर निर्भर नहीं रहे।

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