मौत के मुँह में ले जा रहा है मुँह का कैंसर : जान के दुश्मन बने तम्बाकू उत्पाद

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 7 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। 7 नवंबर को पूरे देश में ‘कैंसर जागरूकता दिवस’ मनाया जाता है। क्योंकि यह रोग भारत ही नहीं, अपितु पूरी दुनिया में महामारी का भयंकर रूप धारण करता जा रहा है। विविध सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के रिसर्च बताते हैं कि भारत में कैंसर तेजी से पाँव फैला रहा है। वैज्ञानिक इस रोग पर रोक लगाने के लिये शोध में जुटे हुए हैं, परंतु भारत जैसे विकासशील देश में गरीब और मध्यम वर्ग के लोग इसकी महँगी जाँच और उपचार कराने में आर्थिक रूप से असक्षम होने के कारण इस रोग को फैलने में मदद मिल रही है। इसके अलावा लोगों में जागरुकता का अभाव, आधुनिक जीवन शैली और अल्कोहॉल तथा तम्बाकू का सेवन इसे फैलाने में मदद कर रहे हैं।

क्या कहते हैं वैश्विक सर्वेक्षण ?

पिछले लगभग एक दशक के वैश्विक सर्वेक्षण बताते हैं कि अति शीघ्र कैंसर का रोग हृदय रोग को पीछे छोड़ कर सबसे बड़ा रोग बन जाएगा। यह रोग विशेष कर अमीर देशों में तेजी से फैल रहा है और इन देशों में इस रोग से मरने वालों का आँकड़ा भी अधिक है। अमीर देशों में आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खानपान, फास्टफूड, जंकफूड, मोटापा, अल्कोहॉल और तम्बाकू सेवन जैसे दूषण इस रोग को बढ़ने में मदद कर रहे हैं। हृदय रोग की अपेक्षा कैंसर विकसित देशों में दोगुनी मौतों का कारण बन रहा है। कनाडा स्थित क्यूबेक लावल यूनिवर्सिटी के गिल्स डेगनिस की रिपोर्ट के अनुसार 2017 में दुनिया भर में मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण कैंसर था। 2017 में लगभग 26 प्रतिशत मौतें खतरनाक रोग कैंसर के कारण हुईं। दूसरी तरफ रिपोर्ट का सकारात्मक पहलू यह सामने आया है कि हृदय से जुड़े रोगों के मामलों में मृत्यु में कमी आ रही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार 50 से 69 वर्ष की आयु की महिलाओं को नियमित रूप से समय-समय पर सिस्टेमेटिक मेमोग्राफी स्क्रीनिंग करानी चाहिये। समय पर रोग का पता चलने पर ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को 20 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार विश्व में हर साल लगभग 85 लाख लोगों की मृत्यु कैंसर के कारण हो रही है और 2020 तक यह आँकड़ा 1 करोड़ के पार हो जाने की संभावना है। क्योंकि हर साल कैंसर रोगियों की संख्या में लगभग 12 लाख लोगों का इजाफा हो रहा है।

भारत में कैंसर रोग की स्थिति ?

नेशनल हेल्थ प्रोफाइल ने वर्ष-2019 की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के आँकड़े चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में वर्ष 2017-18 में ओरल कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर जैसे कॉमन कैंसर के केसों में 324 प्रतिशत का उछाल आया है। यह आँकड़े राज्यों के नॉन कम्यूनिकेबल डिसीज़ (NCD) क्लिनिक से प्राप्त हुए हैं। वर्ष 2018 में 6.5 करोड़ लोग स्क्रीनिंग के लिये इन क्लिनिक में गये थे, इनमें से 1.6 लाख लोग कैंसर से प्रभावित पाये गये। यह आँकड़ा वर्ष 2017 में 3,9635 था। इस रिपोर्ट में भी पाया गया कि इस बीमारी के बढ़ने का कारण बदलती जीवनशैली, स्ट्रेस, खान पान, शराब का सेवन और तम्बाकू सेवन है। विशेष कर ओरल कैंसर का कारण तम्बाकू सेवन है। अल्कोहॉल के साथ तम्बाकू का सेवन करने से कैंसर होने का जोखिम बढ़ता है। इसके अलावा मोटापे के कारण भी कई प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ता है।

इंडियन कौंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च के अनुसार भारत में तंबाकू सेवन से होने वाला कैंसर और सर्वाइकल कैंसर महामारी की तरह फैल रहा है। अभी देश में कैंसर रोगियों की संख्या लगभग 25 लाख है। इनमें हर साल तंबाकू से जुड़े कैंसर रोगियों के लगभग 3 लाख नये मामले सामने आ रहे हैं, जबकि प्रति दिन देश में लगभग 2,000 लोग इस मुँह के कैंसर से मौत के मुँह में जा रहे हैं। देश में लगभग 10 प्रकार के कैंसर पाये जाते हैं, इनमें से 4 मुँह के होते हैं। देश में पहले हर एक लाख लोगों में से लगभग 10-20 मामले कैंसर के मिलते थे, अब यह संख्या बढ़कर प्रति लाख 30-40 हो गई है।

इन राज्यों में तेजी से बढ़ रहा कैंसर

कैंसर के मामले में गुजरात अव्वल है। गुजरात में वर्ष 2017 में कॉमन कैंसर के केस 3,939 थे, जो वर्ष 2018 में बढ़ कर 72,169 हो गये, अर्थात् एक वर्ष में ही राज्य में 68,230 नये केस बढ़ गये। गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में कैंसर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जुलाई में संसद में इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जिसके अनुसार 2016 से 2018 के दौरान सबसे अधिक कैंसर रोगी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में पाये गये और यूपी में 2016 में कैंसर रोगियों की संख्या 2.45 लाख से बढ़ कर 2018 में 2.70 लाख हो गई। इसी प्रकार महाराष्ट्र में 2016 में कैंसर से पीड़ित रोगियों की संख्या 1.32 लाख थी, जो 2018 में बढ़ कर 1.44 लाख हो गई। इसके बाद कर्णाटक, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के नाम आते हैं।

तंबाकू उत्पादों पर कब लगेगी लगाम ?

यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है कि गुटखा और खैनी जैसे तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वाले दुनिया के 65 प्रतिशत लोग भारत में बसते हैं। इसी कारण यहाँ मुँह के कैंसर के 90 प्रतिशत मामलों में तंबाकू उत्पादों का सेवन जिम्मेदार है। इसलिये देश में तंबाकू उपयोग पर नियंत्रण के लिये एक संपूर्ण नीति की आवश्यकता है। दुनिया में सिर्फ 6 देश तंबाकू उत्पादों की जाँच और विनियमन करते हैं, और केवल 41 देश उत्पादों पर सचित्र स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी देते हैं। धुआँ रहित तंबाकू से जुड़े नुकसान के बारे में जागरूकता का भी अभाव है। सिर्फ 16 देशों ने धुआँ रहित तंबाकू के विज्ञापनों, प्रचार और प्रायोजकों पर व्यापक रूप से प्रतिबंध लगाया है। धुआँ रहित तंबाकू उत्पादों का अर्थ है कि भारत में तंबाकू पान, खैनी, सूखा, जर्दा, तंबाकू के पत्ते, गुल, खर्रा, किवाम, मिसरी, मावा, दोहरा, नसवार, तपकीर, मैनपुरी और लाल मंजन के रूप में सेवन की जाती है। ये तंबाकू उत्पाद अत्यंत नशीले होते हैं और मुँह, गले के कैंसर के साथ-साथ हृदय रोग का कारण बनते हैं। इनमें उच्च स्तर के निकोटीन के साथ-साथ कैंसर पैदा करने वाले 30 रसायनों  सहित 3,000 से भी अधिक जहरीले रसायन होते हैं।

गुजरात को तंबाकू मुक्त बनाने की माँग करेगा ‘HIGH ON LIFE’

देश में कई राज्यों में गुटखा पर प्रतिबंध लगाया गया है, परंतु इसके बावजूद पान मसाला और जर्दा के रूप में गुटखा बिक रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि उसमें तंबाकू मिश्रित नहीं है, परंतु तंबाकू की पुड़िया अलग से बिक रही है। इस कारण तंबाकू सेवन का पैटर्न बदला है, परंतु तंबाकू के सेवन में कोई कमी नहीं आई है। सवाल यह उठता है कि इस प्रकार के प्रतिबंध का क्या अर्थ है। गुजरात में तंबाकू सेवन के नुकसानों के बारे में जागरूकता लाने के लिये सक्रिय एक संगठन ‘HIGH ON LIFE’ के संस्थापक सागर ब्रह्मभट्ट ने ‘युवाPRESS’ से बातचीत करते हुए कहा कि वे गुजरात को तंबाकू मुक्त राज्य बनाने के लिये राज्य सरकार को एक ज्ञापन देने वाले हैं, जिसमें राज्य को पूर्णतः तंबाकू मुक्त बनाने की माँग की जाएगी। ब्रह्मभट्ट ने ई-सिगरेट पर पाबंदी लगाने के लिये पीएम नरेन्द्र मोदी और केन्द्र सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह सराहनीय है कि सरकार भी लोगों में तंबाकू उत्पादों का सेवन नहीं करने के लिये जागरूकता लाने में विविध संगठनों का सहयोग कर रही है और उनकी संस्था स्कूल-कॉलेज स्तर पर तथा सामान्य लोगों में तंबाकू मुक्त स्वस्थ जीवन जीने के लिये जागरूकता लाने का काम कर रही है।

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