VIDEO : सूरत में मुस्लिम बच्चों ने हनुमान चालीसा में भाग लेकर दिया सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 21 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। सूरत के अडाजण क्षेत्र में हजीरा रोड पर आरटीओ-पाल पाटिया के पास स्थित अन्नपूर्णा माताजी के मंदिर परिसर में मंगलवार का कालाष्टमी यानी काल भैरव (भगवान शिव का एक स्वरूप) की जन्म जयंती पर भक्ति-भावना का अनूठा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट और दक्षिण गुजरात समस्त ब्राह्मण समाज के नेतृत्व में हनुमान चालीसा के सवा लाख जाप का आयोजन किया गया था। अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के उपलक्ष्य में विश्व शांति की मनोकामना के साथ यह आयोजन किया गया था।

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि 3 हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति में महिलाओं, युवाओं और वृद्धजनों के साथ-साथ स्कूली बच्चों ने भी भाग लिया, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम बच्चे भी शामिल थे। इन मुस्लिम बच्चों ने सामाजिक एकता और भाईचारे की भावना को प्रचारित करते हुए कहा कि वह सुनते आये हैं कि विभिन्न समुदाय के लोग मस्ज़िदों और मज़ारों पर जाकर भी दुआ माँगते हैं। इसलिये वे भी सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के शुभाशय से इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए हैं।

‘अश्वात्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः।।’

अर्थात् सतयुग के एक और त्रेतायुग व द्वापर युग के तीन-तीन महापात्र चिरंजीवी यानी अमर हैं और इस कलियुग में भी सूक्ष्म रूप में विद्यमान हैं, जो कलियुग के अंत में होने वाले भगवान के कल्कि अवतार के समय पुनः अपने पूर्ण रूप में प्रकट होंगे। ये महापात्र हैं सतयुग के महाराजा बलि, जिनके लिये भगवान ने वामन अवतार लिया था। रामायण के तीन महापात्र हैं भगवान शिव के रौद्रावतार और भगवान राम के सबसे प्रिय सेवक और भक्त पवनपुत्र हनुमानजी, लंकापति विभीषण और भगवान के ब्राह्मण अवतार भगवान परशुराम। जबकि द्वापरयुग के तीन महापात्र महर्षि द्रौणाचार्य के सुपुत्र अश्वात्थामा, महर्षि वेद व्यासजी और महाभारत युद्ध के पश्चात् जीवित बचे कौरवों के कुलगुरु कृपाचार्य शामिल हैं। इस श्लोक का जिक्र यहाँ करने का प्रयोजन यह है कि सूरत में आयोजित इस कार्यक्रम में जुटे लोगों के मन में भी कहीं न कहीं यह आस्था थी कि वे चिरंजीवी भगवान हनुमानजी की भक्ति कर रहे हैं, जो साक्षात् हैं। उल्लेखनीय है कि जब भगवान राम ने धरती पर उनकी लीला और भूमिका समाप्त होने के बाद सरयू नदी में जलसमाधि ली थी, तब उन्होंने अपने भक्त हनुमानजी को भी साथ चलने के लिये कहा था, परंतु हनुमानजी ने उनसे पूछा कि क्या आपके वैकुंठ लोक में मेरे आराध्य भगवान राम के नाम का संकीर्तन होगा, तो भगवान ने कहा कि वहाँ राम को कोई नहीं जानता, वहाँ सर्वत्र व्यापक मैं ही अपने मूल स्वरूप में बिराजमान रहता हूँ, तो हनुमानजी ने भगवान के साथ जाने से इनकार करते हुए विनम्रता से कहा था कि जहाँ राम नहीं, वहाँ हनुमान का क्या काम ? तब भगवान राम ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें धरती पर रहने की आज्ञा दी थी। हनुमानजी ने उनसे वरदान लिया था कि जब तक धरती पर राम का नाम लिया जाएगा, तब तक वह धरती पर साक्षात् रूप में रहेंगे और हर उस जगह उपस्थित भी रहेंगे, जहाँ भगवान राम की पूजा, सम्मान और संकीर्तन होगा। इसलिये तब से ही हनुमानजी धरती पर विचरण करते हैं और जहाँ भी भगवान राम के नाम का जाप या संकीर्तन होता है, वहाँ वे उपस्थित रहते हैं। इसी प्रचलन के कारण हर उस स्थान पर जहाँ रामकथा या सुंदरकांड का पाठ किया जाता है, वहाँ पर एक आसन हनुमानजी को अवश्य दिया जाता है।

इस अनूठे कार्यक्रम में 3,200 से अधिक लोगों ने भाग लेकर भगवान के प्रति अपनी भक्ति-भावना और समर्पण दर्शाया। इस कार्यक्रम में हनुमान चालीसा के सवा लाख पाठ का निर्धारित लक्ष्य लगभग 4 घण्टे में पूरा किया गया। 4 घण्टे के दौरान प्रत्येक व्यक्ति ने कम से कम 51 बार हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस प्रकार 3200 लोगों ने सवा लाख के स्थान पर डेढ़ लाख से भी अधिक पाठ किये। भक्ति-भाव में डूबे लोगों ने युवाPRESS से बातचीत के दौरान कहा कि सूरत समेत समस्त दक्षिण गुजरात में कदाचित इस प्रकार का भव्य आयोजन पहली बार हुआ है, जिसमें सूरतवासियों ने भी खूब बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। लोगों ने भगवान से सभी के लिये आजीवन सुख, शांति, समृद्धि और विश्व शांति की प्रार्थना की।

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