PHOTO-VIDEO : 27 साल का हुआ भारत का रक्षक RAF, जिससे थर-थर काँपते हैं उपद्रवी

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 30 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। आपने युद्ध के दौरान भारतीय सेनाओं के शौर्य की कहानियाँ तो बहुत सुनी होंगी, परंतु क्या आप जानते हैं कि देश के अंदर शांति भंग करने वाले उपद्रवियों में किसका खौफ समाया हुआ है ? भारत के इस रक्षक का नाम है द्रुत कार्य बल यानी रैपिड एक्शन फोर्स (RAF)। आरएएफ वास्तव में भारत की शांति दूत है, जो अशांत माहौल में शांति की स्थापना के लिये निकलती है। जैसे ही किसी जगह से अशांति की सूचना मिलती है, वहाँ सामान्य नागरिकों की सुरक्षा के लिये आरएएफ द्रुत गति से पहुँच जाती है और उसका नाम आते ही उपद्रवियों में खलबली मच जाती है और वे उसका सामना करना तो दूर, उसे आते देख कर ही मारे खौफ के थर-थर काँपने लगते हैं और मैदान छोड़ कर भाग जाते हैं।

RAF ने मनाया 27वाँ स्थापना दिवस

अहमदाबाद में आरएएफ ने सोमवार को अपनी स्थापना की 27वीं सालगिरह मनाई। इस अवसर पर शहर के मुख्यालय में समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें आरएएफ की अलग-अलग बटालियनों की परेड आयोजित हुई। समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में पधारे केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुली जीप में घूम कर परेड की सलामी ली। इसके बाद समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने भी आरएएफ की खासियतों का बखान किया। उन्होंने भी कहा कि आज ही के दिन 1992 में आरएएफ की स्थापना की गई थी। इतने कम समय में ही आरएएफ ने देश और दुनिया, दोनों मानकों में अपनी विश्वसनीयता कायम करके बहुत बड़ी सफलता अर्जित की है। उन्होंने यह भी कहा कि कई जगह उपद्रव और दंगे होने पर आरएएफ के पहुँचने की सूचना मात्र से ही दंगाइयों का बिखरना शुरू हो जाता है, यह आम जनता ने देखा है। कई जगह आरएएफ की उपस्थिति से दंगा ही शुरू नहीं हो पाता है।

अहमदाबाद में आरएएफ मुख्यालय में 27वीं वर्षगाँठ पर परेड करते जवान। (फोटो : युवाPRESS)
आरएएफ जवानों की परेड को सलामी देते हुए गृह मंत्री अमित शाह। (फोटो : युवाPRESS)
आरएएफ जवानों की परेड का निरीक्षण करते गृह मंत्री अमित शाह। (फोटो : युवाPRESS)
आरएएफ की 27वीं वर्षगाँठ परेड 2019 में उपस्थित युवाPRESS के मुख्य संपादक आई. के. शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी शिखा शर्मा। (फोटो : युवाPRESS)
आरएएफ की 27वीं वर्षगाँठ परेड 2019 में आरएएफ जवानों के साथ युवाPRESS के मुख्य संपादक आई. के. शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी शिखा शर्मा। (फोटो : युवाPRESS)
आरएएफ की 27वीं वर्षगाँठ परेड 2019 में आरएएफ जवानों के साथ युवाPRESS के मुख्य संपादक आई. के. शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी शिखा शर्मा। (फोटो : युवाPRESS)

अमित शाह ने कहा कि 1949 में केन्द्रीय आरक्षित पुलिस बल (CRPF) अस्तित्व में आया था और इसके जवानों ने देश के लिये अपने प्राणों की आहुति देने में कभी पीछेहट नहीं की। लद्दाख हॉटस्प्रिंग के दौरान हुई लड़ाई में सीआरपीएफ के 10 जवानों ने चीनी सैनिकों के स्वचालित हथियारों से लड़ाई लड़ी थी, जो सीआरपीएफ की बहादुरी का एक अदभुत उदाहरण है। इसी सीआरपीएफ से 10 बटालियनों को अलग करके 30 सितंबर 1992 में आरएएफ का गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि देश भर में पुलिस बल और अर्द्ध सैनिक पुलिस बलों के 34 हजार से ज्यादा जवानों ने देश की सुरक्षा के लिये सर्वोच्च बलिदान दिया है। आरएएफ की कुल 125 महिला कैडेट्स ने लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भाग लिया था। आरएएफ दंगों को तो नियंत्रित करता ही है, साथ ही कई स्थानों पर दंगा न हो, इसके लिये पहले से उपलब्ध रहता है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में भी आरएएफ द्रुत गति से काम पर लग जाता है। अमित शाह ने धारा 370 और अनुच्छेद 35ए का भी उल्लेख किया और कहा कि मोदी सरकार ने अपने 35 हजार जवानों को वास्तविक श्रद्धांजलि दी है, जिन्होंने कश्मीर में धारा 370 और अनुच्छेद 35ए के चलते शहादत दी। मोदी सरकार ने इन दोनों को हटा दिया है।

आडवाणी ने दिया था आरएएफ को अपना झंडा

आरएएफ के पास अपना अलग झंडा रखने का अधिकार है, जो शांति का प्रतीक है। 7 अक्टूबर-2003 को तत्कालीन उप प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने आरएएफ की 11 सालों की देश सेवा को सम्मानित करने के उपलक्ष्य में उसे यह झंडा प्रदान किया था। आरएएफ प्रति वर्ष विभिन्न देशों जैसे हैती, कोसोवो, लिबरा आदि में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिये संयुक्त रूप से पुरुष और महिला कैडेट्स को प्रशिक्षित करता है। इस विशेष फोर्स में 15 बटालियन हैं, जो सीआरपीएफ की बटालियन संख्या 99 से 108 हैं तथा 83, 91, 97, 114 और 119 हैं। इनकी अध्यक्षता महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी करते हैं। पहले बटालियनों की संख्या 10 थी, जिनमें 1-1-2018 से 5 और यूनिट्स शामिल किये गये हैं। इस फोर्स में सबसे छोटी इकाई को टीम कहा जाता है, जिसे एक निरीक्षक स्तर के अधिकारी कमांड करते हैं। इसके तीन हिस्से होते हैं – दंगा नियंत्रण तत्व, आँसू गैस तत्व और आग तत्व। यह सभी स्वतंत्र और असाधारण इकाई के रूप में काम करते हैं। आरएएफ की कंपनी में महिलाओं की टीम को भी शामिल किया गया है, जो विशेष कर महिला प्रदर्शनकारियों से निपटता है।

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