पिक्चर अभी बाकी है : ऑर्बिटर कर रहा पुकार, ‘अभी हम ज़िंदा हैं, यूँ हाथ से फिसलने नहीं देंगे चंद्र को…’

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 7 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। ‘लैडीज़ एंड जेंटलमैन, इतनी शिद्दत से तुम्हें पाने की कोशिश की है कि हर ज़र्रे ने मुझे तुमसे मिलाने की साज़िश की। कहते हैं, अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो, तो पूरी कि पूरी क़ायनात तुम्हें उससे मिलाने की कोशिश में लग जाती है। आप सबने मुझे मेरी चाहत से मिला दिया। दोस्तों, मैं दुनिया का बादशाह होने का अनुभव कर रहा हूँ। पता है ? आज इस बात का भी यक़ीन हो गया कि एंड तक सब कुछ ठीक हो जाता है और अगर अगर ठीक न हो, तो वो द एंड नहीं होता… पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त…’।

यह डायलॉग है बॉलीवुड फिल्म ओम शांति ओम का, जो शाहरुख खान बोलते हैं। आज यह डायलॉग भारत के 130 करोड़ नागरिकों और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सैकड़ों वैज्ञानिकों को निराशा से बाहर निकाल कर फिर से उनमें नए उत्साह का संचार कर सकता है, क्योंकि इसरो का महत्वाकांक्षी चंद्रयान 2 मिशन भले ही अपेक्षा पर ख़रा न उतरा हो, परंतु ‘पिक्चर अभी बाकी है’, क्योंकि 22 जुलाई, 2019 को प्रक्षेपित चंद्रयान 2 में लगा ऑर्बिटर बॉलीवुड की एक और फिल्म वेलकम में फिरोज़ खान का कहा गया डायलॉग ‘अभी हम ज़िंदा है।’

जी हाँ। चंद्रयान 2 को लेकर भारत में छाई निराशा के बीच एक आशा की किरण दिखाने वाली बात यह है कि चंद्रयान 2 में लगा ऑर्बिटर अभी भी इसरो के सम्पर्क में है। भले ही इसरो और उसके वैज्ञानिकों को यह नहीं पता कि गत 2 सितंबर को ऑर्बिटर से अलग हुआ विक्रम लैंडर और उसमें विद्यमान प्रज्ञान रोवर इस समय कहाँ और किन परिस्थितियों में हैं, परंतु 978 करोड़ रुपए की लागत वाले चंद्रयान 2 मिशन में अभी सब कुछ ख़त्म नहीं हुआ है। देशवासियों और इसरो के लिए सबसे बड़ी आशा और राहत की बात यह है कि चंद्रयान 2 का ऑर्बिटर अभी भी इसरो के सम्पर्क में है। चंद्रयान 2 मिशन के केवल 5 प्रतिशत हिस्से का नुकसान हुआ है। यह 5 प्रतिशत हिस्सा यानी विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर है, जिनसे इसरो का संपर्क टूट गया, परंतु चंद्रयान 2 का 95 प्रतिशत हिस्सा यानी ऑर्बिटर अभी भी इसरो के संपर्क में है। ताज़ा जानकारी के अनुसार ऑर्बिटर अभी भी चंद्रमा की सफलतापूर्वक परिक्रमा कर रहा है।

एक साल तक चंद्र का पीछा नहीं छोड़ेगा ऑर्बिटर

चंद्रयान 2 का ऑर्बिटर इसरो वैज्ञानिकों की अपेक्षा के अनुसार काम कर रहा है। वह लगातार चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है और इसकी अवधि एक वर्ष की है। इसका अर्थ यह हुआ कि ऑर्बिटर एक वर्ष तक चंद्रमा की परिक्रमा करता रहेगा। इस तरह भारत ऑर्बिटर के माध्यम से चंद्र को इतनी आसानी से हाथ से सरकने नहीं देगा। ऑर्बिटर चंद्रयान 2 का सबसे बड़ा हिस्सा है और महत्वपूर्ण भी है। संभावना तो यहाँ तक है कि ऑर्बिटर गत 2 सितंबर को उससे अलग हुए और गत रात चंद्र से 2.1 किलोमीटर की दूरी पर संपर्कहीन हो चुके विक्रम लैंडर का भी पता लगा सकता है। इसके अलावा ऑर्बिटर एक वर्ष तक चंद्रमा की कई तसवीरें इसरो को भेज सकता है, जो चंद्र के रहस्यों की कई परतों को खोलने में सहायता करेंगी।

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