निर्मम ममता : मोदी विरोध की ‘सनक’ में भूल जाती हैं कि वे सबसे पहले ‘भारतीय’ हैं…

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 6 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। जब देश के 130 करोड़ लोग भारत और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चंद्रयान 2 मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना कर रहे थे, तब केवल और केवल तुच्छ राजनीति में आकंठ डूबे रहने वाले कई नेताओं को जहाँ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का देश और इसरो की इस सफलता को लेकर अति उत्साहित होना रास नहीं आ रहा था, वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) की तेज़तर्रार नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान 2 को भी राजनीति से जोड़ने का निर्लज्ज दुस्साहस कर दिया।

पश्चिम बंगाल में 19 महीने बाद यानी अप्रैल-2021 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, परंतु अभी पाँच महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव 2019 में टीएमसी के गढ़ में सेंध लगने से बुरी तरह बौखलाई ममता बनर्जी के मनो-मस्तिष्क पर पर मोदी विरोध की ऐसी सनक चढ़ी है कि वे न केवल केन्द्र सरकार के कानूनों, नियमों, योजनाओं को पश्चिम बंगाल में न लागू कर लगातार भारत के संघीय ढाँचे के साथ खुला विद्रोह कर रही हैं, अपितु तुच्छ राजनीति की धुन में आज उन्होंने यह विवादास्पद वक्तव्य भी दे ही डाला कि देश में छाई आर्थिक मंदी से ध्यान हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार चंद्रयान 2 का उपयोग कर रहे हैं। एक तरफ पूरी दुनिया की निगाहें चंद्रयान 2 पर थीं, तो दूसरी तरफ अपने नाम के विपरीत निर्मम राजनीति करते हुए ममता बनर्जी मोदी पर निशाना साध रही थीं।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि ममता बनर्जी ने मोदी विरोध की सनक में राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्र हित और देश प्रेम से जुड़े मुद्दों पर असंवेदनशील रवैया अपनाया है। इससे पहले भी जब पूरा देश जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के मोदी सरकार के साहसी निर्णय की प्रशंसा कर रहा था, तब भी ममता ने इसके लिए मोदी, गृह मंत्री अमित शाह या उनकी सरकार की प्रशंसा करना तो दूर, इस निर्णय का स्पष्ट समर्थन करने से भी ग़ुरेज़ किया था। भारत में राजनीतिक दल अक्सर ज़मीन पर अपने राजनीतिक लाभालाभ को देखते हुए किसी भी मुद्दे पर राय रखते हैं और वे इसके लिए स्वतंत्र भी हैं, परंतु इतिहास गवाह है कि जब-जब बात देश की सुरक्षा की आती है, तब सभी राजनीतिक दल दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर एक राष्ट्रवादी रुख अपनाते हैं। धारा 370 पर भी भले ही देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी ने विरोधी रवैया अपनाया, परंतु कई ऐसे राजनीतिक दलों ने संसद में मोदी सरकार के इस निर्णय का समर्थन किया, जो भारतीय जनता पार्टी और मोदी के धुर विरोधी माने जाते हैं, परंतु ममता को अकल नहीं आई।

ममता मोदी विरोध के अपने राजनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ाते हुए स्वयं के भारतीय होने पर गर्व करना भी मानों भूल गई हैं। यदि उन्हें एक भारतीय होने पर गर्व होता, तो वे चंद्रयान 2 को कभी भी राजनीति से जोड़ने का प्रयास न करतीं, परंतु ममता पर तो मोदी विरोध की सनक तो पिछले चार वर्षों से सवार है और यही कारण है कि वे राजनीतिक विद्वेष के चलते मोदी सरकार की अनेक योजनाओं को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं कर रहीं, जिसका नुकसान वहाँ की जनता को उठाना पड़ रहा है। अधिक दूर जाने की आवश्यकता नहीं है। गत 1 सितंबर से लागू हुए नए मोटर वाहन अधिनियम (MV ACT) को ही ले लीजिए। मोदी सरकार ने यह कानून सड़क पर लोगों की सुरक्षा के उद्देश्य से लागू किया है, परंतु ममता सरकार ने पश्चिम बंगाल में इसे लागू करने से मना कर दिया है।

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