CHANDRAYAAN-2 : यहाँ जानिए अमेरिका और रूस को कितने प्रयासों के बाद मिली थी कामयाबी ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 7 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। विज्ञान का काम ही है प्रयोग करना। जीवन का मूल मंत्र भी है प्रयास करते रहना। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चंद्रयान-2 कार्यक्रम में कोई वैज्ञानिक कमी नहीं थी, बस सॉफ्ट लैंडिंग कराते समय कोई तकनीकी खराबी पैदा हो गई, जिसके चलते चंद्रयान से संपर्क विच्छेद हो गया। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि चंद्रयान-2 के साथ चांद की सतह से मात्र 2.1 किलोमीटर की दूरी पर क्या हुआ ? अभी भी चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद के चक्कर लगा रहा है और वह चंद्रयान-2 जिसे लैंडर विक्रम नाम दिया गया था, उसकी तस्वीरें और डेटा धरती पर भेजेगा। इसके बाद ही स्थिति साफ होगी कि चंद्रयान चंद्रमा की सतह पर लैंड क्यों नहीं हो सका ? इस बीच आपको बता दें कि चांद को छूना आसान नहीं है और रूस तथा अमेरिका जैसे देशों को भी कई प्रयास करने के बाद उसकी सतह पर उतरने में सफलता मिली थी। इसलिये भारतीय वैज्ञानिकों के पास भी निराश या हताश होने की कोई वजह नहीं है और वह एक बार फिर उसी जोशोखरोश से मिशन मून पर आगे बढ़ेंगे।

चांद पर पहुँचने के लिये अब तक हुई 110 कोशिशें

भारतीय इसरो के चंद्रयान-2 मिशन सहित दुनिया के विभिन्न देशों की ओर से अभी तक 110 बार चांद की धरती पर उतरने की कोशिशें हो चुकी हैं, परंतु इनमें से 42 प्रयास नाकाम हुए और 68 प्रयास सफल रहे। आँकड़ों के अनुसार चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिये 38 बार प्रयास हुए। इनमें से 52 प्रतिशत प्रयास ही सफल हुए। भारत से पहले दुनिया के 6 देशों या अंतरिक्ष एजेंसियों ने अपने यान चांद पर भेजे, परंतु इनमें से आधे यानी मात्र 3 देशों को ही सफलता मिल पाई। यह तीन देश हैं, अमेरिका, रूस और चीन।

सबसे पहला प्रयास हुआ था 1958 में

चंद्रमा तक पहुँचने के लिये पहला प्रयास 1958 में हुआ था और अमेरिका ने यह प्रयास शुरू किया था। उसने 17 अगस्त-1958 को ‘पायोनियर 0’ को लॉन्च किया था, परंतु उसका प्रक्षेपण का प्रयास नाकाम हो गया था। इसके बाद उसने 5 बार और प्रयास किये, तब छह प्रयासों के बाद जाकर उसे 1969 में सफलता मिली। सफलता भी अभूतपूर्व थी। क्योंकि अमेरिका अंतरिक्ष यान ही नहीं, अपितु इंसान को भी चांद की धरती पर उतारने में सफल हुआ था। अमेरिका ने 20 जुलाई-1969 को अपोलो 11 मिशन के माध्यम से अपना यान चांद पर उतारा था, जिसके साथ अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रॉन्ग और बज़ एल्ड्रिन चांद पर उतरने वाले पहले और दूसरे अंतरिक्ष यात्री बने थे। अमेरिका ने 17 अगस्त-1958 से लेकर 14 दिसंबर 1972 के बीच 31 मिशन लॉन्च किये, इनमें से उसके 17 मिशन फेल हुए और 14 मिशन सफल हुए। यानि कि अमेरिका के मिशन को 45.17 प्रतिशत सफलता मिली।

पहले ही प्रयास में सफल हो गया था रूस

चांद पर यान उतारने के मामले में रूस ऐसा पहला देश बना जिसने पहले ही प्रयास में अपना यान चांद की धरती पर उतार दिया था। जबकि अमेरिका अंतरिक्ष यात्री को चांद की धरती पर उतारने वाला पहला देश बना। रूस के सफल मिशन का नाम था ‘लूना 1।’ रूस ने सबसे कम समय में इस यान को चांद पर पहुँचाया था। यह यान 2 जनवरी 1959 को लॉन्च हुआ था और मात्र 36 घण्टे में चांद की कक्षा में पहुँच गया था। यह लगभग 3 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चांद की ओर आगे बढ़ा था। इसके बाद रूस का दूसरा यान ‘लूना 2’, 12 सितंबर 1959 को चांद की सतह पर पहुँचा था। इसके बाद रूस ने चांद को छूने और उसकी धरती पर उतरने के लिये 23 सितंबर 1958 से लेकर 9 अगस्त 1976 के बीच लगभग 33 मिशन लॉन्च किये, परंतु इनमें से उसके 26 प्रयास विफल हो गये। इस प्रकार रूस को मात्र 21.21 प्रतिशत ही सफलता मिली है। जब रूस चांद के चारों ओर चक्कर लगाने वाले ऑर्बिटर, सतह पर उतरने वाले लैंडर और सतह से टकराने वाले इंपैक्टर की तैयारी कर रहा था, तब अमेरिका ने उससे एक कदम आगे बढ़ते हुए चांद पर इंसानों को उतार दिया था। उल्लेखनीय है कि मात्र अमेरिका और रूस ने ही चांद को छूने के लिये 64 मिशन चांद पर भेजे थे, इनमें से 43 मिशन को सफलता प्राप्त हुई।

चांद पर पहुँचने वाला तीसरा देश है चीन

चांद की सतह पर पहुँचने वाला तीसरा देश चीन है, जिसका यान चांगई 4 इसी साल 2019 में चांद पर पहुँचा है। चीन ने 8 दिसंबर 2018 को अपना मिशन लॉन्च किया था। उसका लैंडर और रोवर 3 जनवरी 2019 को चांद की सतह पर पहुँच गये। चीन की सफलता भी सविशिष्ट है, क्योंकि चीन ने अपना लैंडर चांद के उस हिस्से में उतारा है, जो हिस्सा पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है। इसलिये अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में चीन के इस कदम को भी बड़ी क्रांति माना जाता है। चांद के इस हिस्से को डार्क साइड कहा जाता है, जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है। इससे पहले चीन ने चांग 3 यान 2013 में चांद पर उतारा था, जो 1976 के बाद चांद पर उतरने वाला पहला स्पेसक्राफ्ट बना।

इसी साल इज़रायल का मिशन भी हो चुका फेल

2019 में ही अप्रैल में इज़राइल ने भी चंद्र अंतरिक्ष यान बेरेशीट को चांद पर लैंडिंग कराने का प्रयास किया था, परंतु इंजन खराब हो जाने से उसका पृथ्वी से संपर्क टूट गया था और वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। चंद्रमा पर उतरने के अंतिम चरण में अंतरिक्ष यान का संपर्क टूट गया, इसके कुछ ही देर बाद इज़राइल ने मिशन को असफल घोषित कर दिया था। यह मिशन 22 फरवरी-2019 को लॉन्च किया गया था।

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