श्रीमद जगद्गुरु शंकराचार्य चतुर्मास्य व्रत समापन समारोह

Written by

जैसा कि हम जानते हैं कि इस बार चातुर्मास का समापन 28 अक्टूबर को होना है जिसके उपलक्ष्य में आदि गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी श्री विश्वदेवानंदतीर्थ जी महाराज (श्री कपिल सिद्ध पीठाधीश्वर श्री शंकराचार्य मठ, सिद्धपुर) का चातुर्मास व्रत समापन समारोह सायं 4 से 6 बजे तक होगा। यह समारोह माता मनसा देवी के प्रांगण में होगा। इस समारोह में सुप्रसिद्ध भजन गायक भाई महावीर शर्मा जी द्वारा भजन संध्या होगी जो 6 से 7 बजे तक होगी। मां भगवती के पावन प्रांगण में, संत भक्तों के संग ब्रज रस्किन भाई महावीर शर्मा जी की वाणी से हरिनाम संकीर्तन रस वर्षा होगी।

इस समारोह में डॉ. श्रेयांश द्विवेदी मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित होंगे, मुख्य वक्ता प्रोफेसर जगदीश प्रसाद सेमवाल और इस समारोह के अध्यक्ष डिप्टी कमिश्नर,  पंचकूला श्री मुकेश कुमार अहूजा होंगे, वेद प्रकाश उपाध्याय, श्री एम. एस. यादव  (मुख्य कार्यकारी, माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड) और स्वामी श्री दामोदर आचार्य जी भी शामिल होंगे। इस पावन अवसर पर श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रमुख सेवा अधिकारी, बृजवासी, श्री हरिदास जी के वंशज, गोस्वामी परिवार से श्री अनंत गोस्वामी जी महाराज उपस्थित होंगे।

चतुर्मास का महत्व- 

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार चातुर्मास के दौरान व्रत, पूजन, हवन और ध्यान एवं योग का अभ्यास किया जाना चाहिए। यह समय संतों, भक्तों और साधुओं के लिए व‍िशेष माना गया है। मान्‍यता है क‍ि इन चार माह में भगवान विष्णु योग निद्रा में होते है। इस समय में जो मनुष्य संयम और नियम का पालन करता है उनके पुण्य की गणना तो ब्रह्माजी भी नहीं कर पाते हैं, ऐसा पद्मपुराण कहता है।।

पुराणों में बताया गया है कि इन महीनों में कुछ नियमों का पालन किया जाए तो मनुष्य सेहतमंद सुखी और मृत्यु के बाद उत्तम लोक को प्राप्त हो सकता है। पद्म पुराण, स्कंदपुराण और भविष्यपुराण ने इन सभी बातों का उल्लेख मिलता है। 

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares