आखिर क्यों बाल मजदूरी बड़ रही है, हमारे देश में

Child labour in India

दिल्ली: भारत में मुंबई, दिल्ली आदि जैसे राज्य में आबादी की कमी नहीं है, लेकिन बेरोज़गारी के मामले यह काफी मशहुर भी हैं। बेरोजगारी के कारण कई छोटे छोटे बच्चे सड़क पर चाय बेचते हैं, ट्रैफिक लाइट पर अपनी जान की बाजी लगाकर रुमाल, फूल, पानी आदि बचते और बाल मजदूरी (Child Labour) करते हैं। रेलवे स्टेशन पर गरम तेल से भड़कती कढ़ाई में पकोड़े बनाते हैं और न जाने बनाते हुए ऐसे कितने बच्चों के हाथ जल जाते हैं। गर्मी में भयंकर तपती हुई भट्टी के द्वारा कांच के कड़े और चूड़ियाँ (bangles) बनाते हुए कितने मासूम बच्चों की जान चली जाती हैं। यह बच्चे अपने माता – पिता के काम आगे बढ़ाने के लिए मजदूरी नहीं करते बल्कि दो वक्त की रोटी के लिए करते हैं। स्कूल जाकर पढने लिखने (Education), खेलने कूदने (play) की चाह रखने वाले बच्चों की चाह कहीं न कहीं दो वक्त की रोटी और गरीबी (unemployment) में ही सीमित रह गयी है| यह तो उन गरीबो की हालत हैं, जो मजबूर है, पेट भरने के लिए भी। लेकन भारत जैसे देश में तो ऐसे हजारो दरिंदे मोजूद हैं जो Human Trafficking करके तकरीबन 8 – 9 वर्ष तक के बच्चों के हाथ पैर कटकर उनक साथ दुराचार करते हैं और उनसे भीख मंगवाते हैं। Human Trafficking में अधिकतर बच्चे अच्छे पढ़े लिखे और अमीर घर के होते हैं।

2-3 वर्ष के भूख और प्यास के कारण तडपते हुए बच्चे अपने माता पिता को मजदूरी करते देखकर, यह तो नहीं समझ पाते की उनके माता पिता क्या कर रहे हैं परन्तु उनके साथ वह छोटे छोटे बच्चे भी मजदूरी (Child Labour) करने के लिए  काम करने लागते हैं, और समय के साथ साथ इन बच्चों को भी शिकार होना पड़ता हैं। बिहार जैसे राज्य से दिल्ली आये अधिकतर माता पिता अपने बच्चों को शिक्षा देने की चाह में उन्हें दिल्ली लेकर आते हैं, मजबूरन उन्हें दिल्ली रहकर भी गरीबी से गुज़ारना पड़ता हैं। एक ओर 5000 रूपये का खाना खाने के बाद होटल में 200 रूपये की टिप देना बहुत proud का काम समझा जाता हैं, तो दूसरी और किसी भी मजदुर से 300 रूपये की मजदूरी करवाने के बाद 300 रूपये देने भी भारी लगते हैं और 300 रुपय की जगह 200 रूपये दे दिए जाते हैं। बाल मजदूरो के लिए कानून द्वारा रोक भी लगाई है। 18 वर्ष से निचे के बच्चों से काम करवने के लिए 20000 रूपये का जुरमाना भी था। लेकिन आज भी लोग इन बच्चो को पढने के लिए सहयता न करके इनसे मजदूरी (Child Labour) करवा रहे हैं।

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