मोदी की मारक कूटनीतिक कुशलता के आगे चित्त हुई चीन की चालाक कुटिलता : जानिए कैसे ?

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जब यार बना हाहाकार, तो फुर्र हो गया प्यार

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

किसी से दोस्ती करना अच्छी बात है, परंतु दोस्त ही दुनिया में एकमात्र ऐसा धर्म संबंध है, जिसका चयन हमारे अपने हाथ में होता है। मित्र का चयन करते समय विवेक की सर्वाधिक आवश्यकता होती है, परंतु दुनिया का सुपरपावर बनने का सपना देखने वाले चीन को अपनी विस्तारवादी नीति ने इतना अंधा कर दिया है कि वह मित्र का चयन करते समय विवेक पर नहीं, लाभ पर ध्यान केन्द्रित रखता है और यही कारण है कि आज चीन के मित्र देशों की सूची में सबसे ऊपर है बदनाम पाकिस्तान।

अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, जर्मनी सहित विश्व के सैकड़ों देश और यहाँ तक कि कई इस्लामिक देश भी जिस पाकिस्तान को उसकी आतंक को प्रश्रय देने की नीति के कारण उससे शत्रुता या दूरी बनाए रखने में ही भलाई समझते हैं, चीन उसी पाकिस्तान को अपनी गोद में लिए बैठा है और इसके पीछे उसकी मंशा सिर्फ और सिर्फ अपनी विस्तारवादी नीति को लागू करना है। आज पूरी दुनिया में चीन और पाकिस्तान की मित्रता चर्चा में है, परंतु इस पर सकारात्मक नहीं, अपितु नकारात्मक चर्चा हो रही है, क्योंकि पूरी दुनिया के सामने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के प्रयासों से पाकिस्तान बेनक़ाब हो चुका है, परंतु चीन को फिर भी पाकिस्तान की यारी पसंद है।

मनमोहन ने मानी हार, मोदी ने ली ठान

पुलवामा आतंकी हमले से पहले भी भारत में कई आतंकी हमले हुए और चीन ने उन सभी हमलों की निंदा तो की, परंतु उन हमलों के लिए ज़िम्मेदार आतंकवादी मौलाना मसूद अज़हर को जब वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने की बात आई, तो चीन के पेट में दर्द हुआ। 2009 में भारत ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव रखा, परंतु चीन के वीटो ने ऐसा होने नहीं दिया। इसके बाद तत्कालीन मनमोहन सरकार दोबारा ऐसा प्रस्ताव लाने का साहस नहीं कर पाई, परंतु 2014 में नरेन्द्र मोदी सत्ता में आए और मसूद को वैश्विक आतंकी बनाने के प्रयास में जुट गए। मोदी के सत्ता में आने के बाद यूएनएससी में मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के लिए 2016 में दूसरी बार, 2017 में तीसरी बार और 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद चौथी बार प्रस्ताव रखा गया, परंतु हर बार चीन ने वीटो कर दिया।

जब यार बना हाहाकार, तब फुर्र हो गया प्यार

चीन के बार-बार वीटो का प्रयोग कर टेक्निकल होल्ड लेने के बावजूद मोदी सरकार चैन से नहीं बैठी। मोदी की आक्रामक कूटनीति के चलते एक तरफ पाकिस्तान पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ गया, वहीं मोदी सरकार के प्रयासों से अमेरिका, रूस और ब्रिटेन सहित कई देशों ने दबाव बनाया। अपने यार पाकिस्तान की चौतरफा हो रही बदनामी के छींटे जब चीन के दामन तक आ पहुँचे, तो चीन को होंश आया। चीन को लगने लगा कि पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति के बीच उसका साथ देने से दुनिया भर में उसकी किरकिरी हो रही है। कई शक्तिशाली देश चीन पर प्रतिबंध तक का विचार करने लगे। मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित होने से रोकने के चीन के प्रयासों से पूरी दुनिया में संदेश गया कि चीन आतंकवाद के मुद्दे पर नरम रुख अपना रहा है। जब चारों ओर से चीन घिर गया, तो उसे होंश आया और अंततः उसे अपने यार का हाथ छोड़ने पर विवश होना पड़ा।

मोदी के मुक्के के आगे ध्वस्त हुआ जिनपिंग का जिन्न

वैसे तो भारत-चीन के संबंधों में दगाबाजी फैक्टर का अच्छा-खासा इतिहास रहा है। 1965 के युद्ध से लेकर 2014 तक चीन ने हर मोर्चे पर, जब भी मौका मिला, भारत को दबाने की कोशिश की, क्योंकि एशिया में चीन भारत को अपना सबसे प्रबल प्रतिस्पर्धी मानता है, परंतु जब से नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तब से चीन का भारत विरोधी रवैया लगातार उग्र होता गया। मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को झूला झुला कर दोस्ती की श्रेष्ठ पहल की, परंतु चीन अपनी कुटिलता से बाज़ नहीं आया और उसने डोकलाम जैसा विवाद पैदा किया। भारत ने मुँह तोड़ जवाब दिया। चीन ने इन पाँच वर्षों के दौरान कई बार घुसपैठ की कोशिश की, परंतु भारत ने उसे नाकाम कर दिया। फिर भी चीन की अकल ठिकाने नहीं आई। हालाँकि मसूद के मामले में चीन का दाँव उल्टा पड़ गया। चीन नहीं समझ पाया कि मसूद कोई सीमा में घुसपैठ करने का मामला नहीं है। चीन ने सोचा कि वह वीटो पावर का हर बार उपयोग करता रहेगा, परंतु मोदी ने चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना कर ऐसा मुक्का मारा कि जिनपिंग का वीटो वाला जिन्न ध्वस्त हो गया।

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