विश्व पंचायत में फिर दिखी मोदी की धाक : दोस्तों ने दिखाया दम, तो निकल गया जिनपिंग का दम

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 18 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। विश्व पंचायत यानी संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) में फिर एक बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की धाक देखने को मिली। भारत के पड़ोस में रह कर निरंतर भारत के साथ उलझने का प्रयास करने वाले चीन ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के आंतरिक मामले कश्मीर को उछालने का प्रयास किया था, परंतु वहाँ मौज़ूद मोदी के दोस्तों डोनाल्ड ट्रम्प, इमेनुएल मैक्रों, बोरिस जॉनसन और व्लादिमीर पुतिन ने ऐसा दम दिखाया कि शी जिनपिंग का दम निकल गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प, फ्रेंच राष्ट्रपति मैक्रों, ब्रिटेन के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री जॉनसन और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ ऐसी पक्की और सुदृढ़ पर्सनल केमिस्ट्री है कि चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर के मुद्दे पर बंद दरवाज़े में चर्चा करवाने की मंशा पर पानी फिर गया।

वास्तव में चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में कश्मीर की स्थिति पर बंद कमरे में चर्चा का प्रस्ताव रखा था, परंतु यूएनएससी के अन्य चार सदस्यों अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन व रूस ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया, जिसके चलते चीन को इसे वापस लेने पर विवश हो जाना पड़ा। चीनी चाल को रोकने का नेतृत्व अमेरिका ने किया, जिसे इसी महीने यूएनएससी की अध्यक्षता मिली है। यूएनएससी के चीनोपरांत चारों राष्ट्रों ने एक स्वर में कहा चीन के कश्मीर पर चर्चा के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसके साथ ही फिर एक बार जिनपिंग को विश्व पंचायत यूएन व यूएनएससी सहित पूरी दुनिया में मोदी की धाक का कड़वा अनुभव हुआ।

चूँकि भारत यूएनएससी का स्थायी या अस्थायी सदस्य नहीं है। इसीलिए जब पाँच स्थायी सदस्यों में से एक चीन ने कश्मीर मसले पर यूएनएससी में बंद कमरे में चर्चा का प्रस्ताव रखा, तो भारत ने चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर असर न पड़ने देते हुए पूरे मामले में मौन साधे रखा, परंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत स्पष्ट रूप से जानते थे कि यूएनएससी में शेष चार स्थायी सदस्य व भारत के मित्र राष्ट्र चीन की चाल को कदापि सफल नहीं होने देंगे और ऐसा ही हुआ भी। फ्रांस ने इस प्रस्ताव पर स्पष्ट कहा, ‘हमारा रुख पूर्णत: स्पष्ट है। कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय रूप से ही देखना होगा। हमने हाल ही में न्यूयॉर्क सहित कई अवसरों पर यह बात कही है।’ ब्रिटेन ने भी पहली बार खुल कर भारत का समर्थन किया, तो रूस ने कहा कि इस मंच (यूएनएससी) पर इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। एजेंडा में अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे होने चाहिए। इतना ही नहीं, 15 सदस्यीय यूएनएससी के अस्थायी सदस्य इंडोनेशिया ने भी इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि भारत ने यदि अपनी नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा जमावड़ा किया है, तो इसे चर्चा का आधार क्यों बनाया जा रहा है। यह भारत का आंतरिक मामला है।

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