सुंदरता और शुभता ही श्राप बन गई इस संत प्रकृति के पक्षी के लिये ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 26 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। केन्द्रीय उद्योग सुरक्षा बल (CISF) ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 से एक व्यक्ति को 49 किलो वजन के मोर पंख के साथ गिरफ्तार किया है। इस पकड़े गये व्यक्ति का नाम नसीर अंसारी बताया जा रहा है। यह व्यक्ति टर्मिनल से हांगकांग जाते समय पकड़ा गया। उसके पास से इतनी बड़ी संख्या में बरामद हुए मोर पंख को लेकर पूछताछ शुरू की गई है। उल्लेखनीय है कि देश में मोर पंख रखना, खरीदना या बेचना कानूनी अपराध नहीं है, परंतु मोर भारत, श्रीलंका और म्यांमार का राष्ट्रीय पक्षी है और सिमटते जंगलों के साथ-साथ इनकी संख्या भी सिमटती जा रही है। इसलिये इनके शिकार और इनकी हत्या कानूनी अपराध की श्रेणी में रखी गई है।

सुंदरता और शुभता ही मोर के लिये बन गये श्राप ?

मोर देखने में तो एक सुंदर और बड़ा पक्षी है ही। इसे शुभता का प्रतीक भी माना जाता है। यही कारण है कि इसे प्रत्येक धर्म और संप्रदाय में शुभ माना गया है। भारत में विभिन्न पशु-पक्षियों को देवी-देवताओं के वाहन के रूप में स्थान और सम्मान दिया जाता है। विद्या की देवी माँ सरस्वती, धन-संपत्ति की दाता माँ लक्ष्मी, स्वर्ग के राजा इंद्र देव, देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय (मुरुगन), देवगण के पति भगवान गणपति, भगवान श्रीकृष्ण के अलावा महान ऋषि-मुनियों का भी किसी न किसी रूप में मोर और उसके सुंदर पंख से प्रत्यक्ष या परोक्ष सम्बंध मिलता है। मोर के सम्बंध में हिंदू धर्म ग्रंथों में काफी कुछ लिखा गया है। माना जाता है कि यह पक्षी किसी भी स्थान को बुरी शक्तियों और प्रतिकूल वस्तुओं के प्रभाव से बचाता है। यही कारण है कि लोग घरों में मोर के सुंदर पंखों को सजा कर रखते हैं। मोर पंख की जितनी महत्ता भारत में है, शायद ही किसी अन्य देश में हो। इसके बावजूद अब विदेशों में भी इसकी माँग तेजी से बढ़ती जा रही है।

भारत में जहाँ मोर और उसके पंखों को शुभ माना जाता है और देवी-देवताओं से जोड़ा जाता है। वहीं ग्रीक लोग मोर के पंखों को स्वर्ग और सितारों की निगाहों से जोड़ते हैं।

एशिया के कई देशों में मोर के पंखों को अध्यात्म से भी जोड़ा जाता है। क्वान-यिन जो कि अध्यात्म का प्रतीक है, उसका मोर से विशेष सम्बंध माना जाता है। क्वान-यिन प्रेम, प्रतिष्ठा, धीरज और स्नेह का सूचक है, इसलिये उससे सम्बंधित देशों के लोगों के अनुसार मोर पंख से निकटता अर्थात् क्वान-यिन से समीपता बढ़ती है।

बौद्ध धर्म के अनुसार मोर अपने सभी पंखों को खोल कर नाचता है, जो उसके खुलेपन और मुक्त विचारधारा को दर्शाते हैं।

ईसाई धर्म में मोर के पंख को अमरता, पुनर्जीवन और आध्यात्मिक शिक्षा से जोड़ा जाता है।

इस्लाम धर्म में भी मोर के खूबसूरत पंख को जन्नत के द्वार के बाहर अद्भुत शाही बगीचे का प्रतीक माना जाता है।

घरों में इसे रखने से सर्प आदि दाखिल नहीं होते हैं, क्योंकि सर्प मोर का प्रिय भोजन है, इसलिये मोर पंख को देखते ही सर्प भाग खड़ा होता है। इसके अलावा भी अन्य कीट-पतंगे और कीड़े-मकोड़े भी घर से दूर रहते हैं।

मोर पंख घर में सजाने से घर की शोभा तो बढ़ती ही है, यह नवग्रहों को प्रभावित करता है, इसलिये इसे रखने से घर की सुख, शांति और समृद्धि में अभिवृद्धि होती है। यह नकारात्मक शक्तियों को सिर नहीं उठाने देता है और अनुकूलताओं तथा सकारात्मक शक्तियों को बल प्रदान करता है।

पढ़ाई में कमजोर बच्चों को इसे किताबों में रखना चाहिये। इससे उनकी बुद्धि बलवती होती है और उनकी स्मरण शक्ति भी बढ़ती है। वे पढ़ाई में तेज हो जाते हैं। पॉकेट आदि में रखने से रुके हुए काम भी बन जाते हैं।

भारत में संरक्षित प्रजातियों में शामिल है मोर

आज़ादी के समय देश में मोरों की जितनी संख्या थी, उससे अब आधी भी नहीं रह गई है। भारत सरकार ने 26 जनवरी-1963 को मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया है और वन्यजीव संरक्षण कानून में संशोधन कर मोर के शिकार को प्रतिबंधित किया है। इस कानून के अनुसार लुप्तप्राय प्रजातियों का शिकार करने पर हत्या के बराबर अपराध माना जाएगा। हालाँकि संशोधित कानून के अनुसार दो साल तक मोर पंख बेचना या खरीदना अपराध माना जाएगा जिसमें व्यक्ति को जेल की सजा हो सकती है, परंतु नागरिकों के मोर पंख रखने को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है।मोर दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाया जाने वाला पक्षी है। भारत में यह लगभग सभी क्षेत्रों में पाया जाता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इनकी आबादी सविशेष है।

मोर पंख की हो रही ऑनलाइन बिक्री

वर्तमान कंप्यूटर और इंटरनेट के युग ने मोर पंख की खरीद-बिक्री को और आसान बना दिया है, जो कि मोरों के लिये बढ़ते संकट का संकेत है। कई साइटों पर इनकी बिक्री हो रही है, जिसके साथ कई प्रकार के ऑफर भी दिये जाते हैं। वन्यजीव संरक्षण विभाग को मोरों के संरक्षण के लिये और दृढ़ता से काम करने की आवश्यकता है।

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